
उत्तर प्रदेश। चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के दौरान उन्नाव जिले में एक ऐसा फर्जीवाड़ा सामने आया है, जिसने पूरे प्रशासन को हिलाकर रख दिया। एक ही मकान के पते पर मतदाता सूची में 45 नाम दर्ज पाए गए, लेकिन मौके पर जांच करने पहुंचे BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) को सिर्फ तीन लोग ही मिले। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से कई नाम दुबई, कुवैत और अन्य विदेशों में रहने वाले लोगों के थे। यह खुलासा न केवल वोटर लिस्ट की शुद्धता पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि संगठित फर्जीवाड़े की आशंका भी पैदा कर रहा है। 2 दिसंबर 2025 को ETV भारत और न्यूज18 की रिपोर्ट्स के अनुसार, इस मामले ने अधिकारियों को हैरान कर दिया और तुरंत जांच के आदेश जारी हो गए। इस ब्लॉग में हम इस घटना की पूरी डिटेल्स, कैसे हुआ फ्रॉड
, पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई और इससे बचाव के उपाय बताएंगे।
यदि आप भी SIR फॉर्म भर रहे हैं, तो यह पढ़ना जरूरी है।
SIR अभियान क्या है? क्यों हो रहा है यह पुनरीक्षण?
चुनाव आयोग ने 2025-26 के विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची को शुद्ध करने के लिए SIR (Special Intensive Revision) अभियान शुरू किया है। यह अभियान 4 नवंबर से चल रहा है और 11 दिसंबर तक फॉर्म भरने की अंतिम तारीख है। UP सहित 12 राज्यों में BLO घर-घर जाकर फॉर्म-6, फॉर्म-7 और अन्य फॉर्म बांट रहे हैं। इसका उद्देश्य मृत, स्थानांतरित या फर्जी वोटरों को हटाना, नए नाम जोड़ना और अपडेट करना है। लेकिन उन्नाव जैसे मामलों ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठा दिए हैं। आयोग के अनुसार, 96% से अधिक फॉर्म बांटे जा चुके हैं, लेकिन फर्जीवाड़े की घटनाएं बढ़ रही हैं।
उन्नाव में फर्जीवाड़े का पूरा मामला: एक मकान पर 45 नाम, सिर्फ 3 रहने वाले
उन्नाव के पूरन नगर क्षेत्र के 57 नंबर मकान पर यह घटना सामने आई। BLO राजीव कुमार फॉर्म वेरिफाई करने पहुंचे, तो उन्हें कमलेश कुमार, आशीष और माधुरी देवी मिले, जो दो नाबालिग बेटियों के साथ रहते हैं। इन तीनों ने अपना SIR फॉर्म भरकर जमा कर दिया। लेकिन मतदाता सूची में इस पते पर कुल 45 नाम दर्ज थे। जांच में बाकी 42 नाम फर्जी निकले। पड़ोसियों ने पुष्टि की कि ये लोग कभी यहां रहे ही नहीं।
चौंकाने वाला खुलासा तब हुआ जब अधिकारियों ने नामों की डिटेल्स चेक कीं। कई नाम दुबई, कुवैत, सऊदी अरब जैसे देशों में काम करने वालों के थे। कुछ तो वर्षों पुराने रिकॉर्ड से जुड़े थे, जबकि अन्य हाल ही में जोड़े गए लगे। AERO (Assitant Returning Officer) ने बताया कि प्रथम दृष्टया यह फर्जी वोटरों का मामला है। संदेह है कि फैक्ट्री मजदूरों या NRIs के नामों का दुरुपयोग किया गया। इस मकान के मालिक कमलेश ने कहा, “हमें कोई जानकारी नहीं, ये नाम कैसे जुड़े, पता नहीं।” यह घटना सहारनपुर के एक अन्य फ्रॉड से मिलती-जुलती है, जहां नकली प्रमाण-पत्र बनाकर परिवार के नाम जोड़े गए।
जांच में क्या-क्या सामने आया? अधिकारियों की हैरानी
जांच टीम ने बैंक डिटेल्स, आधार कार्ड और पासपोर्ट रिकॉर्ड्स चेक किए। पता चला कि कई नाम विदेशी पते वाले लोगों के थे, जो UP में कभी वोट नहीं डाल सके। ADM सुशील कुमार गौड़ ने कहा, “यह संगठित गड़बड़ी हो सकती है। फैक्टरियों या एजेंट्स ने नाम जोड़े होंगे।” जिला मजिस्ट्रेट गौरांग राठी को पूरी रिपोर्ट सौंपी गई है। पुलिस ने IPC की धारा 420 (धोखाधड़ी) और 465 (जालसाजी) के तहत केस दर्ज करने की तैयारी की है। चुनाव आयोग ने निर्देश दिया कि सभी बूथों पर दोबारा वेरिफिकेशन हो। इस खुलासे से अधिकारी हैरान हैं, क्योंकि SIR का मकसद शुद्धता है, लेकिन फ्रॉड ने सबको चौंका दिया।
ऐसे फर्जीवाड़े क्यों हो रहे हैं? संभावित कारण
UP में SIR के दौरान फर्जी नाम जोड़ने के कई केस सामने आ चुके हैं।
कारण: पुराने रिकॉर्ड अपडेट न होना
, BLO की लापरवाही या राजनीतिक साजिश। सहारनपुर में नकली प्रमाण-पत्र का केस मिला
, जहां परिवार के नाम जोड़ने के लिए फर्जी डॉक्यूमेंट्स बनाए
गए। विदेशी नामों का इस्तेमाल इसलिए क्योंकि NRIs के नाम आसानी से वेरिफाई नहीं होते।
RBI और UIDAI के डेटा से लिंकिंग न होने से गैप रह जाता है। आयोग की रिपोर्ट कहती है
कि 2024 में 20% वोटर फ्रॉड ऐसे ही थे।
बचाव के उपाय: SIR फॉर्म भरते समय सावधान रहें
- हमेशा ऑफिशियल ऐप (Voters.eci.gov.in) से फॉर्म भरें, BLO को नकली डॉक्यूमेंट न दें।
- नाम, पता, मोबाइल नंबर चेक करें; OTP वेरिफाई करें।