
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में राप्ती नदी के किनारे बसे डोमिंगाढ़ और जंगल कौड़िया गांवों को हर साल आने वाली बाढ़ की मार से बचाने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। जल संसाधन विभाग ने इन गांवों सहित उत्तराशोट क्षेत्र में बाढ़ रोकथाम के लिए 10 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट शुरू किया है। इस प्रोजेक्ट के तहत नदी तटबंधों पर पिचिंग (पत्थरों की परत) और ठोकरें (रोकने वाली संरचनाएं) बनाई जाएंगी, जो नदी के कटाव को रोकेंगी। यह परियोजना मानसून से पहले पूरी हो जाएगी, जिससे हजारों ग्रामीणों को राहत मिलेगी। गोरखपुर, जो बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में प्रमुख है, में यह कदम स्थानीय लोगों के लिए वरदान साबित होगा।
बाढ़ की समस्या और प्रोजेक्ट की जरूरत
गोरखपुर जिले में राप्ती, घाघरा और रोहिन नदियां हर साल बाढ़ लाती हैं, जिससे डोमिंगाढ़, जंगल कौड़िया और आसपास के गांव जलमग्न हो जाते हैं। इन गांवों में खरीफ की फसलें बर्बाद हो जाती हैं, घर-दुकानें डूब जाती हैं और लोग राहत शिविरों में शरण लेने को मजबूर हो जाते हैं। पिछले साल 2024 में भी राप्ती का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर चढ़ गया था, जिसमें सैकड़ों परिवार प्रभावित हुए थे।
जल संसाधन विभाग के सब इंजीनियर गुलाब वर्मा ने बताया कि प्रोजेक्ट का अनुमानित खर्च 10 करोड़ रुपये है। इसमें राप्ती नदी की तलहटी (निचले हिस्से) से पत्थरों की पिचिंग की जाएगी, जो नदी के तेज बहाव से तटबंधों को मजबूत बनाएगी। साथ ही, ठोकरें लगाई जाएंगी जो कटाव को रोकेंगी। यह कार्य उत्तराशोट क्षेत्र के तीनों गांवों – डोमिंगाढ़, जंगल कौड़िया और उत्तराशोट – को कवर करेगा। वर्मा के अनुसार, “यह प्रोजेक्ट न केवल बाढ़ रोकने में मदद करेगा, बल्कि छठ पूजा के दौरान भी सुविधा प्रदान करेगा।”
प्रोजेक्ट के तकनीकी विवरण
प्रोजेक्ट की शुरुआत हो चुकी है, और विभाग ने ठेकेदारों को जिम्मेदारी सौंपी है। पिचिंग के लिए नदी तट पर मजबूत जाली लगाई जाएगी, जिसमें स्थानीय पत्थर भरे जाएंगे। ठोकरें नदी के मोड़ों पर बनेंगी, जो पानी के प्रवाह को नियंत्रित करेंगी। कुल लंबाई करीब 5-6 किलोमीटर की होगी, जिसमें मिट्टी भराई और कंक्रीट की संरचनाएं शामिल हैं। विभाग का लक्ष्य है कि जून 2025 तक यह कार्य पूरा हो जाए, ताकि जुलाई-अगस्त के मानसून में कोई खतरा न रहे।
इसके अलावा, प्रोजेक्ट में ड्रोन सर्वे और जीआईएस मैपिंग का उपयोग किया जा रहा है, जो भविष्य में बाढ़ पूर्वानुमान में मदद करेगा। गोरखपुर मंडल के जल प्रबंधन विशेषज्ञों के मुताबिक, यह योजना केंद्र सरकार की ‘जल जीवन मिशन’ और राज्य की बाढ़ नियंत्रण नीति का हिस्सा है।
स्थानीय लोगों को मिलने वाले फायदे
इस प्रोजेक्ट से सबसे ज्यादा लाभ डोमिंगाढ़ और जंगल कौड़िया के करीब 5,000 ग्रामीणों को होगा।
ये गांव मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर हैं, जहां चावल, गन्ना और सब्जियां उगाई जाती हैं।
बाढ़ से फसलें नष्ट होने से किसानों को लाखों का नुकसान होता था।
अब मजबूत तटबंधों से खेत सुरक्षित रहेंगे, और सड़क संपर्क बना रहेगा।
ग्रामीणों का कहना है कि छठ घाट पर भी अब बाढ़ का डर नहीं रहेगा।
एक स्थानीय किसान रामप्रकाश ने कहा
, “हर साल बाढ़ में हमारा सब कुछ बह जाता था।
यह प्रोजेक्ट हमें नई जिंदगी देगा।
” महिलाएं और बच्चे भी सुरक्षित रहेंगे
, क्योंकि राहत शिविरों की जरूरत कम हो जाएगी। लंबे समय में, यह विकास को बढ़ावा देगा
– स्कूल, बाजार और स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंच आसान होगी।
सरकार की व्यापक बाढ़ रोकथाम रणनीति
योगी आदित्यनाथ सरकार ने उत्तर प्रदेश में बाढ़ प्रभावित जिलों के लिए 1,000 करोड़ से ज्यादा
का बजट आवंटित किया है।
गोरखपुर में पिछले तीन वर्षों में 50 से अधिक तटबंध मजबूत किए गए हैं।