छत्तीसगढ़: नक्सलियों के साथ जवानों की मुठभेड़, दंतेवाड़ा- बीजापुर की सीमा पर कई माओवादियों के मारे जाने की खबर

जवानों की मुठभेड़

छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षाबलों की मुहिम तेज हो चुकी है। दंतेवाड़ा और बीजापुर जिलों की सीमा पर इंद्रावती नदी के घने जंगलों में शनिवार सुबह एक बड़ी मुठभेड़ हुई, जिसमें दो से तीन माओवादियों के मारे जाने की खबर है। डीआरजी (डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड) और एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स) की संयुक्त टीम ने नक्सलियों के छिपे होने की खुफिया जानकारी के आधार पर ऑपरेशन शुरू किया था। गोलीबारी अभी भी जारी है, और सुरक्षाबल बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं।

मुठभेड़ की पूरी घटना

यह ऑपरेशन दंतेवाड़ा-बीजापुर बॉर्डर के इंद्रावती नेशनल पार्क क्षेत्र में शुक्रवार शाम से शुरू हुआ था। खुफिया एजेंसियों को जानकारी मिली थी कि इंद्रावती एरिया कमिटी के वरिष्ठ नक्सली कैडर इस इलाके में मौजूद हैं। सुबह करीब 9 बजे डीआरजी की दंतेवाड़ा, नारायणपुर और बस्तर यूनिट्स ने जंगल में घुसकर सर्चिंग शुरू की। अचानक नक्सलियों ने घात लगाकर फायरिंग शुरू कर दी, जिसके जवाब में सुरक्षाबलों ने भी मोर्चा संभाला।

पुलिस के अनुसार, मुठभेड़ के बाद दो पुरुष नक्सलियों के शव बरामद हो चुके हैं, जबकि एक महिला कैडर के घायल होने की भी पुष्टि हुई है। घटनास्थल से एक एसएलआर, एक 3०३ राइफल, ग्रेनेड और विस्फोटक सामग्री बरामद की गई है। बस्तर आईजी ने बताया कि ऑपरेशन अभी जारी है, और फ्लाइंग स्क्वायड को तैनात कर दिया गया है ताकि भागे हुए नक्सलियों को घेरा जा सके।

नक्सलवाद पर केंद्र सरकार की सख्ती

यह मुठभेड़ केंद्र सरकार की ‘नक्सल मुक्त भारत अभियान’ का हिस्सा है। गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में घोषणा की थी कि मार्च 2026 तक देश को नक्सल मुक्त बनाने का लक्ष्य है। छत्तीसगढ़ में इस साल अब तक 230 से ज्यादा नक्सली मारे जा चुके हैं, और 1300 से अधिक ने आत्मसमर्पण कर दिया है। दंतेवाड़ा-बीजापुर बॉर्डर नक्सलियों का प्रमुख गढ़ रहा है, जहां अभुजमाड़ के जंगलों में वे छिपे रहते हैं।

हाल के महीनों में बस्तर डिवीजन में कई बड़ी सफलताएं मिली हैं। मई 2025 में नारायणपुर-बीजापुर बॉर्डर पर 27 नक्सलियों को मार गिराया गया, जिसमें सीपीआई-माओइस्ट का जनरल सेक्रेटरी बसवराजू भी शामिल था। मार्च में दंतेवाड़ा में तीन नक्सली मारे गए, और अप्रैल में भैरमगढ़ इलाके में तीन और। इन ऑपरेशन्स से नक्सली संगठन कमजोर पड़ रहा है, लीडरशिप की कमी हो रही है।

सुरक्षाबलों की बहादुरी और चुनौतियां

डीआरजी के जवान स्थानीय आदिवासियों से हैं, जो जंगलों की हर गली-कूची से वाकिफ हैं।

बस्तर फाइटर्स और सीआरपीएफ की मदद से ये ऑपरेशन सफल हो रहे हैं।

हालांकि, नक्सली आईईडी ब्लास्ट और घात लगाकर हमले करते रहते हैं।

इस साल जनवरी में नारायणपुर-दंतेवाड़ा बॉर्डर पर एक जवान शहीद हो चुका है।

फिर भी, सुरक्षाबल ‘जीरो टॉलरेंस’ पॉलिसी पर अडिग हैं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस सफलता पर जवानों को बधाई दी और कहा, “लाल आतंक का अंत नजदीक है।

नक्सलवाद विकास और शांति का सबसे बड़ा दुश्मन है।

” गृह मंत्री ने भी ट्वीट कर कहा कि मोदी सरकार नक्सलियों के खिलाफ बेरहम रवैया अपना रही है।

भविष्य की राह और अपील

यह घटना नक्सलियों को मुख्यधारा में लौटने की अपील को मजबूत करती है।

सरकार ने आत्मसमर्पण करने वालों के लिए पुनर्वास योजना शुरू की है

, जिसमें आवास, रोजगार और कानूनी छूट दी जा रही है।

छत्तीसगढ़ सरकार ने नक्सल प्रभावितों के लिए पीएम आवास योजना का लाभ सुनिश्चित किया है।

लेकिन नक्सली संगठन अभी भी टैक्टिकल काउंटर ऑफेंसिव कैंपेन (टीसीओसी) चला रहे हैं, जो मार्च से जून तक चलता है।