अमेरिका और ईरान
अमेरिका और ईरान के बीच संभावित परमाणु समझौते को लेकर रविवार को अचानक अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बयान के बाद यह अटकलें तेज हो गई थीं कि दोनों देशों के बीच कोई बड़ा समझौता हो सकता है। हालांकि देर रात तक तस्वीर पूरी तरह साफ हो गई कि फिलहाल किसी अंतिम समझौते पर सहमति नहीं बन पाई है।
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस मुद्दे पर बड़ा बयान दिया। ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत जारी है, लेकिन किसी भी समझौते में जल्दबाजी नहीं की जाएगी। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि ईरान को यह समझना होगा कि उसे परमाणु हथियार बनाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
इस पूरे घटनाक्रम ने अमेरिकी राजनीति में भी बहस छेड़ दी है। खासकर ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के भीतर ही इस मुद्दे को लेकर मतभेद सामने आने लगे हैं।
मार्को रुबियो के बयान से बढ़ी अटकलें
रविवार को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने मीडिया से बातचीत के दौरान संकेत दिया था कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में कुछ प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि “शायद आज थोड़ी देर में और खबरें सामने आएंगी।”
रुबियो के इस बयान के बाद दुनिया भर की नजरें वॉशिंगटन और तेहरान पर टिक गई थीं। माना जा रहा था कि दोनों देश किसी नए परमाणु समझौते की ओर बढ़ सकते हैं। लेकिन कुछ घंटों बाद ही स्थिति बदलती नजर आई और किसी औपचारिक समझौते की घोषणा नहीं हुई।
ट्रंप ने क्यों कहा- जल्दबाजी नहीं होगी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए कहा कि ईरान के साथ बातचीत जारी है, लेकिन किसी भी समझौते को सोच-समझकर और सही तरीके से किया जाना चाहिए।
ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका की सबसे बड़ी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि ईरान कभी परमाणु हथियार विकसित न कर सके। उन्होंने अमेरिकी वार्ताकारों को निर्देश दिया कि बातचीत में जल्दबाजी न दिखाई जाए और राष्ट्रीय सुरक्षा से कोई समझौता न हो।
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप इस मुद्दे पर अपनी पार्टी के भीतर मौजूद अलग-अलग विचारों को संतुलित करने की कोशिश कर रहे हैं।
ट्रंप की पार्टी में क्यों बढ़ा मतभेद
रिपब्लिकन पार्टी के कई सांसद ईरान के साथ किसी भी नरम समझौते के खिलाफ माने जाते हैं। उनका मानना है कि ईरान पर दबाव बनाए रखना जरूरी है क्योंकि वह मध्य पूर्व में अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए बड़ा सुरक्षा खतरा बना हुआ है।
वहीं पार्टी के कुछ नेता मानते हैं कि यदि बातचीत के जरिए परमाणु कार्यक्रम पर नियंत्रण पाया जा सकता है तो कूटनीतिक रास्ता अपनाना चाहिए। इसी वजह से ट्रंप की पार्टी के भीतर इस मुद्दे पर मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं।
कुछ कट्टरपंथी रिपब्लिकन नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि समझौते में ईरान को ज्यादा छूट दी गई तो
इससे अमेरिका और इजराइल दोनों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
ईरान ने क्या कहा
$ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बग़ाई ने भी रविवार को बयान जारी किया।
उन्होंने कहा कि पिछले एक हफ्ते में दोनों देशों के बीच बातचीत में कुछ नजदीकी जरूर आई है,
लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि सभी अहम मुद्दों पर सहमति बन गई है।
ईरान का कहना है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों और परमाणु अधिकारों से पीछे नहीं हटेगा।
वहीं अमेरिका लगातार ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर कड़े प्रतिबंध और निगरानी की मांग कर रहा है।
इजराइल भी हुआ सक्रिय
अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर इजराइल भी लगातार नजर बनाए हुए है।
इजराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने साफ कहा है कि किसी भी
अंतिम समझौते में “परमाणु खतरे को पूरी तरह खत्म करना जरूरी होगा।”
नेतन्याहू ने दोहराया कि इजराइल की नीति बिल्कुल स्पष्ट है और
वह किसी भी स्थिति में ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इजराइल इस मुद्दे पर अमेरिका पर लगातार दबाव बनाए हुए है
ताकि ईरान को किसी प्रकार की रणनीतिक छूट न मिले।
वैश्विक राजनीति पर पड़ सकता है बड़ा असर
यदि भविष्य में अमेरिका और ईरान के बीच कोई नया समझौता होता है तो इसका
असर केवल मध्य पूर्व ही नहीं बल्कि पूरी वैश्विक राजनीति और तेल बाजार पर भी पड़ सकता है।
ईरान पर लगे प्रतिबंधों में राहत मिलने से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और
ऊर्जा बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
हालांकि फिलहाल दोनों देशों के बीच कई अहम मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं।
अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर भले ही बातचीत जारी हो, लेकिन अभी कई बड़े मुद्दों पर
सहमति बनना बाकी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कर दिया है कि अमेरिका जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं करेगा।
इस मुद्दे पर ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के भीतर भी मतभेद सामने आ चुके हैं,
जबकि इजराइल लगातार कड़ा रुख अपनाए हुए है। आने वाले दिनों में अमेरिका, ईरान और
इजराइल की अगली रणनीति पर पूरी दुनिया की नजर बनी रहेगी।
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