UP ग्राम पंचायत कार्यकाल
यूपी में खत्म होने जा रहा ग्राम प्रधानों का कार्यकाल
उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत राज व्यवस्था के तहत चुनी गई ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त होने जा रहा है। इसके साथ ही गांवों की सरकार का मौजूदा ढांचा बदल जाएगा। अब सबकी निगाहें राज्य सरकार के फैसले पर टिकी हैं कि पंचायतों के संचालन के लिए कौन-सी नई व्यवस्था लागू की जाएगी।
सूत्रों के मुताबिक शासन स्तर पर पंचायत संचालन को लेकर तीन बड़े विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। माना जा रहा है कि सोमवार को इस संबंध में सरकार की ओर से बड़ा आदेश जारी हो सकता है।
पंचायत संचालन के लिए तीन बड़े विकल्प
सरकारी सूत्रों के अनुसार पहला विकल्प यह है कि मौजूदा ग्राम प्रधानों की अध्यक्षता में तीन या छह सदस्यीय समिति बनाई जाए और उसे पंचायत संचालन का अधिकार दिया जाए।
दूसरा प्रस्ताव एडीओ (पंचायत) को प्रशासक बनाकर पंचायतों का संचालन कराने का है। यदि यह मॉडल लागू होता है तो पंचायतों की प्रशासनिक और वित्तीय जिम्मेदारी सीधे अधिकारियों के हाथ में जा सकती है।
तीसरे विकल्प के तहत पंचायत सचिव, पंचायत सहायक और ग्राम प्रधान को मिलाकर एक संयुक्त समिति बनाने पर विचार किया जा रहा है। यह समिति पंचायतों के रोजमर्रा के कार्यों और विकास योजनाओं को आगे बढ़ा सकती है।
क्या यूपी अपनाएगा राजस्थान मॉडल?
विभागीय सूत्रों के मुताबिक सरकार राजस्थान मॉडल पर भी विचार कर रही है।
इस मॉडल में मौजूदा प्रधानों की अध्यक्षता वाली समिति पंचायतों का संचालन करती है,
जबकि वित्तीय अधिकार अधिकारियों के पास रहते हैं।
यदि यूपी सरकार यह मॉडल अपनाती है तो मौजूदा प्रधानों की
भूमिका पूरी तरह खत्म नहीं होगी। हालांकि विकास कार्यों और
बजट से जुड़े अंतिम फैसले प्रशासनिक अधिकारियों के हाथों में रह सकते हैं।
प्रधानों ने कार्यकाल बढ़ाने की उठाई मांग
ग्राम प्रधानों की ओर से कार्यकाल बढ़ाने की मांग भी लगातार उठ रही है।
अखिल भारतीय ग्राम प्रधान संगठन ने हाल ही में
लखनऊ में धरना देकर सरकार से मांग की थी कि प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाया जाए या
फिर पंचायत संचालन का अधिकार प्रधानों की अध्यक्षता वाली समिति को दिया जाए।
प्रधानों का कहना है कि कई विकास कार्य अभी अधूरे हैं और अचानक
नई व्यवस्था लागू होने से गांवों के विकास पर असर पड़ सकता है।
विकास कार्यों में आई तेजी
कार्यकाल खत्म होने से पहले कई जिलों में विकास कार्यों को तेजी से पूरा किया जा रहा है।
मुरादाबाद जिले की 643 ग्राम पंचायतों में 15वें वित्त आयोग और पांचवें वित्त आयोग के बचे हुए
करीब आठ करोड़ रुपये से विकास कार्य कराने की प्रक्रिया तेज हो गई है।
अधिकारियों और प्रधानों दोनों की कोशिश है कि कार्यकाल समाप्त होने से
पहले ज्यादा से ज्यादा योजनाओं को पूरा किया जा सके।
27 मई से लागू होगी नई व्यवस्था
वर्ष 2021 में हुए पंचायत चुनावों के बाद ग्राम पंचायतों की
पहली बैठक 25 और 26 मई को आयोजित हुई थी।
इसी आधार पर 26 मई को पंचायतों का कार्यकाल समाप्त माना जा रहा है।
मुरादाबाद, अमरोहा, संभल, रामपुर और बिजनौर समेत कई जिलों की
हजारों ग्राम पंचायतों में 27 मई से नई व्यवस्था लागू हो जाएगी।
अब देखना यह होगा कि सरकार पंचायत संचालन के लिए कौन-सा मॉडल चुनती है।
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