चिनाब नदी प्रणाली से
भारत ने चिनाब नदी प्रणाली से जुड़े दो बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पर काम तेज कर दिया है। इन परियोजनाओं को भारत की जल रणनीति और सिंधु जल संधि के संदर्भ में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इन प्रोजेक्ट्स का असर केवल भारत की जल क्षमता पर ही नहीं बल्कि पाकिस्तान की जल व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
इन दोनों परियोजनाओं में हिमाचल प्रदेश का चिनाब-ब्यास लिंक टनल प्रोजेक्ट और जम्मू-कश्मीर के सलाल बांध का सेडिमेंट बायपास टनल प्रोजेक्ट शामिल है। दोनों योजनाओं की कुल लागत लगभग 2600 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
सिंधु जल संधि के बाद बढ़ी रणनीतिक गतिविधियां
भारत ने पिछले साल अप्रैल में पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को निलंबित करने का फैसला लिया था। इसके बाद से भारत पश्चिमी नदियों के पानी के अधिकतम उपयोग को लेकर तेजी से काम कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अब अपने हिस्से के पानी का ज्यादा प्रभावी इस्तेमाल करना चाहता है ताकि जल संसाधनों का पूरा लाभ देश को मिल सके। इसी रणनीति के तहत चिनाब नदी प्रणाली से जुड़े इन बड़े प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाया जा रहा है।
क्या है चिनाब-ब्यास लिंक टनल प्रोजेक्ट?
दोनों परियोजनाओं में सबसे बड़ा प्रोजेक्ट हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति क्षेत्र में बनाया जा रहा चिनाब-ब्यास लिंक टनल प्रोजेक्ट है। इस परियोजना की लागत करीब 2352 करोड़ रुपये बताई गई है।
इस योजना के तहत लगभग 8.7 किलोमीटर लंबी सुरंग बनाई जाएगी, जिसके जरिए चिनाब बेसिन से अतिरिक्त पानी को ब्यास नदी प्रणाली की ओर मोड़ा जाएगा।
यह परियोजना एक बड़े इंटर-बेसिन नदी जोड़ो अभियान का हिस्सा मानी जा रही है। इसका उद्देश्य चिनाब की सहायक नदी चंद्रा से पानी को हाइड्रोलिक संरचनाओं और सुरंगों के जरिए ब्यास बेसिन तक पहुंचाना है।
सलाल बांध में बनेगी सेडिमेंट बायपास टनल
दूसरा अहम प्रोजेक्ट जम्मू-कश्मीर के सलाल बांध से जुड़ा हुआ है। इस परियोजना पर लगभग 268 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य बांध में जमा हो रही गाद यानी सेडिमेंट को नियंत्रित करना और जल प्रवाह क्षमता को बहाल करना है। विशेषज्ञों का कहना है कि सेडिमेंट बायपास टनल बनने से बांध की कार्यक्षमता लंबे समय तक बेहतर बनी रहेगी।
यह परियोजना बिजली उत्पादन और जल प्रबंधन दोनों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
पाकिस्तान पर क्या पड़ेगा असर?
विशेषज्ञों के अनुसार इन परियोजनाओं का सीधा असर पाकिस्तान पर भी पड़ सकता है।
पाकिस्तान लंबे समय से सिंधु नदी प्रणाली के जल प्रवाह पर निर्भर रहा है।
यदि भारत अपने हिस्से के पानी का ज्यादा उपयोग करने लगता है, तो पाकिस्तान को जल संकट और
सिंचाई संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि भारत का कहना है कि
वह अंतरराष्ट्रीय नियमों के दायरे में रहकर ही परियोजनाओं को आगे बढ़ा रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि भारत की ये परियोजनाएं पाकिस्तान पर रणनीतिक दबाव बढ़ाने का काम भी कर सकती हैं।
भारत को क्या होगा फायदा?
इन परियोजनाओं से भारत को कई बड़े फायदे मिलने की उम्मीद है।
सबसे बड़ा लाभ जल संसाधनों के बेहतर उपयोग के रूप में देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक अतिरिक्त पानी को दूसरी नदी प्रणालियों की ओर मोड़ने से बिजली उत्पादन,
सिंचाई और जल संरक्षण में मदद मिलेगी। साथ ही हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर
जैसे पहाड़ी राज्यों में इंफ्रास्ट्रक्चर और रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा।
भारत लंबे समय से पश्चिमी नदियों के अपने हिस्से के पानी का पूरा उपयोग नहीं कर पा रहा था।
अब इन परियोजनाओं के जरिए स्थिति बदलने की उम्मीद जताई जा रही है।
जल सुरक्षा पर बढ़ा फोकस
भारत अब जल सुरक्षा को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़कर देख रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि
भविष्य में पानी सबसे बड़ा रणनीतिक संसाधन बन सकता है।
इसी वजह से केंद्र सरकार नदी जोड़ो परियोजनाओं, बांधों और जल संरक्षण योजनाओं पर तेजी से काम कर रही है।
चिनाब नदी से जुड़े ये प्रोजेक्ट उसी बड़ी रणनीति का हिस्सा माने जा रहे हैं।
पर्यावरण को लेकर भी उठे सवाल
हालांकि कुछ पर्यावरण विशेषज्ञों ने इन परियोजनाओं को लेकर चिंता भी जताई है।
उनका कहना है कि हिमालयी क्षेत्रों में
बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का असर पर्यावरण और स्थानीय पारिस्थितिकी पर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों ने सरकार से पर्यावरणीय संतुलन और सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखने की
अपील की है ताकि विकास और प्रकृति के बीच संतुलन बना रहे।
चिनाब नदी प्रणाली से जुड़े भारत के ये दो बड़े प्रोजेक्ट केवल इंफ्रास्ट्रक्चर योजनाएं नहीं
बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
एक तरफ ये परियोजनाएं भारत को जल संसाधनों का बेहतर
उपयोग करने में मदद करेंगी, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान पर भी
इसका असर पड़ सकता है। आने वाले समय में इन परियोजनाओं को लेकर भारत और
पाकिस्तान के बीच राजनीतिक और कूटनीतिक चर्चा और तेज होने की संभावना है।
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