भारत और बांग्लादेश सीमा पर स्थित संवेदनशील तीन बीघा कॉरिडोर एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। सीमा पर चल रहे फेंसिंग कार्य को लेकर भारत और बांग्लादेश के बीच तनाव की स्थिति देखने को मिली, जिसके बाद सीमा सुरक्षा बल (BSF) और बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) के अधिकारियों के बीच अहम फ्लैग मीटिंग आयोजित की गई। इस बैठक में भारत ने स्पष्ट कर दिया कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े फेंसिंग कार्य को किसी भी हाल में नहीं रोका जाएगा।
BSF अधिकारियों ने कहा कि सीमा पर अवैध घुसपैठ, तस्करी और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों को रोकने के लिए मजबूत बाड़बंदी बेहद जरूरी है। भारत ने यह भी दोहराया कि सीमा सुरक्षा देश की प्राथमिकता है और इस पर किसी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
क्या है तीन बीघा कॉरिडोर का पूरा मामला
तीन बीघा कॉरिडोर पश्चिम बंगाल के कूचबिहार जिले में स्थित एक रणनीतिक और संवेदनशील क्षेत्र है। यह इलाका बांग्लादेश के दहग्राम-अंगरपोटा एन्क्लेव को मुख्य भूमि से जोड़ने का काम करता है। इस कॉरिडोर का ऐतिहासिक और कूटनीतिक महत्व काफी बड़ा माना जाता है।
भारत और बांग्लादेश के बीच इस क्षेत्र को लेकर पहले भी कई बार बातचीत और समझौते हो चुके हैं। हालांकि दोनों देशों के रिश्ते सामान्य रूप से मजबूत और सहयोगात्मक रहे हैं, लेकिन सीमा सुरक्षा और फेंसिंग जैसे मुद्दों पर समय-समय पर तनाव की स्थिति बनती रही है।
सीमा पर क्यों जरूरी है फेंसिंग
भारत सरकार का मानना है कि सीमा पर मजबूत बाड़बंदी से अवैध घुसपैठ, हथियारों की तस्करी, मवेशी तस्करी और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है। BSF ने फ्लैग मीटिंग में यही मुद्दा प्रमुखता से उठाया और कहा कि सीमा सुरक्षा राष्ट्रीय हित से जुड़ा विषय है।
अधिकारियों के मुताबिक सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। स्मार्ट फेंसिंग, ड्रोन निगरानी और हाईटेक सर्विलांस सिस्टम के जरिए सीमा पर निगरानी लगातार बढ़ाई जा रही है।
फ्लैग मीटिंग में क्या हुई बातचीत
सूत्रों के अनुसार BGB ने सीमा पर चल रहे फेंसिंग कार्य को लेकर आपत्ति दर्ज कराई थी। इसके बाद दोनों देशों के अधिकारियों के बीच फ्लैग मीटिंग हुई। बैठक के दौरान BSF ने साफ कहा कि
फेंसिंग का कार्य अंतरराष्ट्रीय नियमों और द्विपक्षीय समझौतों के तहत किया जा रहा है।
भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि सीमा पर शांति बनाए रखना दोनों देशों की साझा जिम्मेदारी है,
लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में कोई समझौता नहीं किया जाएगा। अधिकारियों ने
यह भरोसा भी दिलाया कि सभी गतिविधियां नियमों के दायरे में रहकर की जा रही हैं।
स्थानीय लोगों में बढ़ी चिंता
सीमा क्षेत्र में रहने वाले लोगों के बीच इस घटनाक्रम को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सीमा पर तनाव बढ़ने का असर आम लोगों की जिंदगी पर पड़ता है।
हालांकि प्रशासन और BSF ने लोगों को भरोसा दिलाया है कि हालात पूरी तरह
नियंत्रण में हैं और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर दी गई है।
भारत-बांग्लादेश संबंधों पर क्या पड़ेगा असर
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और बांग्लादेश के संबंध पिछले कुछ वर्षों में काफी मजबूत हुए हैं।
व्यापार, कनेक्टिविटी, सुरक्षा और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों ने मिलकर कई बड़े कदम उठाए हैं।
ऐसे में सीमा से जुड़े छोटे विवादों को बातचीत के जरिए सुलझा लिया जाएगा।
हालांकि सुरक्षा मामलों में भारत हमेशा सख्त नीति अपनाता रहा है। केंद्र सरकार की प्राथमिकता सीमा सुरक्षा को और
मजबूत करना है ताकि किसी भी प्रकार की घुसपैठ या गैरकानूनी गतिविधि को रोका जा सके।
तीन बीघा कॉरिडोर में BSF और BGB के बीच हुई फ्लैग मीटिंग ने यह साफ कर दिया है कि
भारत सीमा सुरक्षा के मुद्दे पर किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के पक्ष में नहीं है।
सीमा पर फेंसिंग का काम जारी रहेगा और निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा।
हालांकि दोनों देशों के बीच लगातार संवाद जारी है, जिससे उम्मीद की जा रही है कि
हालात शांतिपूर्ण तरीके से संभाले जाएंगे। आने वाले दिनों में
भारत और बांग्लादेश की अगली रणनीति पर सभी की नजर बनी रहेगी।
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