कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट
सोमवार सुबह भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। बाजार खुलते ही सेंसेक्स 800 अंकों से ज्यादा उछल गया, जबकि निफ्टी 50 में भी 250 अंकों तक की मजबूती दर्ज की गई। इस तेजी से निवेशकों की संपत्ति में महज कुछ ही मिनटों में करीब 5 लाख करोड़ रुपये का इजाफा हो गया।
सुबह 9:30 बजे सेंसेक्स करीब 832 अंकों की तेजी के साथ 76,247 अंक पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 50 भी 226 अंकों की बढ़त के साथ 23,945.60 पर पहुंच गया। बीएसई (BSE) पर लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप बढ़कर करीब 468 लाख करोड़ रुपये हो गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सकारात्मक संकेतों और कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट ने बाजार को मजबूती दी है।
1. अमेरिका-ईरान शांति समझौते की उम्मीद
बाजार में तेजी की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की खबर रही। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने के लिए एक समझौते के मसौदे पर काफी हद तक बातचीत हो चुकी है।
ट्रंप के इस बयान से वैश्विक निवेशकों में सकारात्मक माहौल बना। बाजार को उम्मीद है कि यदि दोनों देशों के बीच तनाव कम होता है तो वैश्विक व्यापार और तेल सप्लाई पर सकारात्मक असर पड़ेगा।
2. कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट
शांति वार्ता की खबरों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली। सोमवार सुबह ब्रेंट क्रूड करीब 5% टूटकर 98 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया।
वहीं डब्ल्यूटीआई (WTI) क्रूड भी लगभग 6% गिरकर 91.30 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए तेल का सस्ता होना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।
कम तेल कीमतों से महंगाई पर दबाव घट सकता है और कंपनियों की लागत कम होने की उम्मीद बढ़ती है। यही वजह है कि बाजार में खरीदारी तेज हुई।
3. वैश्विक बाजारों में जबरदस्त रैली
दुनियाभर के शेयर बाजारों में भी सोमवार को शानदार तेजी देखने को मिली। जापान का निक्केई इंडेक्स 3% से ज्यादा उछलकर इतिहास में पहली बार 65,000 के स्तर के पार निकल गया।
चीन का शंघाई कंपोजिट लगभग 1% मजबूत हुआ, जबकि ताइवान का शेयर बाजार 3% से ज्यादा चढ़ गया। अमेरिकी फ्यूचर्स बाजार में भी मजबूती देखने को मिली और डॉव जोंस फ्यूचर्स करीब 1% ऊपर ट्रेड करते दिखाई दिए।
वैश्विक बाजारों की इस मजबूती का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई दिया।
4. विदेशी निवेशकों की खरीदारी बढ़ी
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक विदेशी निवेशकों (FII) की खरीदारी भी तेजी की बड़ी वजह बनी।
वैश्विक जोखिम कम होने की उम्मीद से विदेशी फंड्स ने भारतीय बाजार में निवेश बढ़ाना शुरू कर दिया।
भारतीय बाजार को एशिया के सबसे मजबूत और तेजी से बढ़ते बाजारों में गिना जाता है।
ऐसे में अंतरराष्ट्रीय माहौल बेहतर होते ही विदेशी निवेशक भारतीय शेयरों में फिर से दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
5. बैंकिंग और आईटी शेयरों में मजबूती
सोमवार की तेजी में बैंकिंग, आईटी और ऑटो सेक्टर के शेयरों ने
अहम भूमिका निभाई। बड़े बैंकिंग शेयरों और टेक कंपनियों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली।
एचडीएफसी बैंक, रिलायंस, इंफोसिस, टीसीएस और आईसीआईसीआई बैंक जैसे दिग्गज शेयरों में तेजी से सेंसेक्स और निफ्टी को मजबूती मिली।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वैश्विक माहौल सकारात्मक बना रहता है तो
आने वाले दिनों में बाजार में और तेजी देखने को मिल सकती है।
निवेशकों में लौटा भरोसा
पिछले कुछ समय से वैश्विक तनाव और महंगाई की
चिंता के कारण बाजार में दबाव देखा जा रहा था। लेकिन
अब अमेरिका-ईरान तनाव कम होने और तेल कीमतों में गिरावट से निवेशकों का भरोसा लौटता दिखाई दे रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रण में रहती हैं तो
भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार दोनों को बड़ा फायदा मिल सकता है।
क्या आगे भी जारी रहेगी तेजी?
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक घटनाक्रम,
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियां और कच्चे तेल की कीमतें बाजार की दिशा तय करेंगी।
यदि अंतरराष्ट्रीय माहौल स्थिर रहता है और विदेशी निवेश बना रहता है तो
भारतीय शेयर बाजार नई ऊंचाइयों को छू सकता है।
सोमवार सुबह शेयर बाजार में आई तेज रैली ने निवेशकों को बड़ी राहत दी है।
सेंसेक्स और निफ्टी में जोरदार उछाल के पीछे अमेरिका-ईरान शांति वार्ता,
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और वैश्विक बाजारों की मजबूती जैसे बड़े कारण रहे।
अब निवेशकों की नजर आने वाले दिनों के वैश्विक संकेतों और बाजार की अगली चाल पर बनी हुई है।
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