गोरखपुर में निषाद युवा वाहिनी ने
निषाद समाज के अधिकारों को लेकर उठी नई आवाज
गोरखपुर में निषाद समाज के अधिकारों और सामाजिक न्याय को लेकर एक बार फिर आवाज बुलंद हुई है। सामाजिक संगठन निषाद युवा वाहिनी उत्तर प्रदेश की ओर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित एक ज्ञापन भेजा गया है। इस ज्ञापन में निषाद समाज की विभिन्न उपजातियों को अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र जारी किए जाने की मांग की गई है। संगठन का कहना है कि समाज लंबे समय से अपने संवैधानिक अधिकारों और सामाजिक पहचान के लिए संघर्ष कर रहा है।
मुख्यमंत्री से की गई विशेष मांग
ज्ञापन में निषाद, केवट, मल्लाह, धीवर, कश्यप, बिंद और अन्य संबंधित उपजातियों को अनुसूचित जाति के रूप में प्रमाण पत्र जारी करने की मांग रखी गई है। संगठन का दावा है कि इन समुदायों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति लंबे समय से पिछड़े वर्गों जैसी रही है और इन्हें सामाजिक न्याय का लाभ मिलना चाहिए।

निषाद समाज के इतिहास का दिया गया हवाला
ज्ञापन में कहा गया है कि निषाद समाज का इतिहास अत्यंत प्राचीन और गौरवशाली रहा है। संगठन के अनुसार निषाद समुदाय का उल्लेख भारतीय संस्कृति और पौराणिक ग्रंथों में भी मिलता है। समाज के लोग परंपरागत रूप से जल, मत्स्य पालन और नदी आधारित आजीविका से जुड़े रहे हैं तथा आर्थिक रूप से लंबे समय तक वंचित स्थिति में जीवन यापन करते रहे हैं।
सामाजिक और आर्थिक स्थिति पर जताई चिंता
निषाद युवा वाहिनी का कहना है कि समाज के अधिकांश लोग आज भी शिक्षा, रोजगार और सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ नहीं प्राप्त कर पा रहे हैं। संगठन का मानना है कि अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र मिलने से समाज के युवाओं को शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में बेहतर अवसर प्राप्त होंगे।
ज्ञापन में ऐतिहासिक तथ्यों का भी उल्लेख
संगठन द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि अंग्रेजी शासनकाल के दौरान कई समुदायों को अलग-अलग श्रेणियों में रखा गया था। ज्ञापन में ऐतिहासिक संदर्भों का हवाला देते हुए निषाद समाज की सामाजिक स्थिति पर पुनर्विचार करने की मांग की गई है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष के नेतृत्व में उठी मांग
निषाद युवा वाहिनी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशील चंद साहनी एडवोकेट के नेतृत्व में यह मांग उठाई गई है। संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि समाज के लोगों को उनका संवैधानिक अधिकार दिलाने के लिए यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। ज्ञापन के माध्यम से सरकार से इस विषय पर सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की गई है।
सामाजिक न्याय और समान अवसर पर जोर
संगठन ने कहा कि संविधान सभी नागरिकों को समान अवसर और
सामाजिक न्याय प्रदान करने की बात करता है। ऐसे में निषाद समाज की उपजातियों को भी
उनकी वास्तविक सामाजिक स्थिति के आधार पर उचित अधिकार दिए जाने चाहिए।
संगठन का कहना है कि इससे समाज के लाखों लोगों को लाभ मिल सकता है।
पहले भी उठती रही है मांग
निषाद समाज को अनुसूचित जाति श्रेणी में शामिल करने और
जाति प्रमाण पत्र जारी करने की मांग पहले भी विभिन्न मंचों पर उठती रही है। कई सामाजिक संगठनों और
राजनीतिक दलों ने भी समय-समय पर इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है।
समाज में बढ़ी चर्चा
ज्ञापन सामने आने के बाद निषाद समाज के लोगों के बीच इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे समाज के अधिकारों से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बताया है।
वहीं संगठन ने सरकार से जल्द निर्णय लेने की मांग की है।
सरकार के फैसले पर टिकी नजरें
अब समाज और संगठन के लोगों की नजर राज्य सरकार पर टिकी हुई है।
यदि इस मांग पर सकारात्मक निर्णय लिया जाता है तो इसका प्रभाव प्रदेश के लाखों लोगों पर पड़ सकता है।
फिलहाल संगठन ने अपने अभियान को और व्यापक स्तर पर चलाने की बात कही है।
निषाद युवा वाहिनी द्वारा मुख्यमंत्री को भेजा गया
यह ज्ञापन निषाद समाज की सामाजिक पहचान और अधिकारों से
जुड़ा महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। संगठन ने निषाद, केवट, मल्लाह, धीवर, कश्यप और अन्य उपजातियों को
अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र जारी करने की मांग करते हुए सामाजिक न्याय की बात उठाई है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस मांग पर क्या रुख अपनाती है।
read this post :ट्रंप की बेटी टिफनी ट्रंप पहुंचीं ताजमहल, पति माइकल बुलोस संग किया भ्रमण
