गोरखपुर जू में बदली जानवरों की डाइट, गर्मी से बचाने के लिए विशेष इंतजाम
उत्तर प्रदेश में पड़ रही भीषण गर्मी का असर अब सिर्फ इंसानों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि वन्यजीव भी इससे प्रभावित हो रहे हैं। लगातार बढ़ते तापमान और लू की स्थिति को देखते हुए गोरखपुर जू प्रशासन ने जानवरों की डाइट और देखभाल में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। जू प्रबंधन का उद्देश्य गर्मी के मौसम में जानवरों को स्वस्थ रखना और उन्हें हीट स्ट्रेस से बचाना है।
बाघों की डाइट में की गई कटौती
गर्मी के मौसम में मांसाहारी जानवरों के पाचन तंत्र पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए गोरखपुर जू प्रशासन ने बाघों को दिए जाने वाले मांस की मात्रा कम कर दी है। विशेषज्ञों के अनुसार अत्यधिक गर्मी में भारी भोजन स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा कर सकता है।
जू के पशु चिकित्सकों की सलाह के अनुसार बाघों को अब हल्का और संतुलित भोजन दिया जा रहा है, जिससे उनका शरीर मौसम के अनुसार बेहतर ढंग से अनुकूलन कर सके। साथ ही उनकी गतिविधियों और स्वास्थ्य की नियमित निगरानी भी की जा रही है।
भालुओं को दी जा रही विशेष फ्रूट आइसक्रीम
गोरखपुर जू में इन दिनों सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र भालुओं के लिए तैयार की जा रही विशेष फ्रूट आइसक्रीम बनी हुई है। फलों के रस, तरबूज, खरबूजा और अन्य प्राकृतिक सामग्री से तैयार यह आइसक्रीम भालुओं को गर्मी से राहत देने के लिए दी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भालुओं के शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है और उन्हें आवश्यक पोषण भी मिलता है। गर्मी के कारण सुस्त पड़ने वाले भालुओं को यह विशेष आहार सक्रिय बनाए रखने में मदद कर रहा है।
बाड़ों में बढ़ाई गई ठंडक की व्यवस्था
जानवरों को गर्मी से बचाने के लिए केवल भोजन में ही बदलाव नहीं किया गया है बल्कि उनके रहने के स्थानों में भी विशेष इंतजाम किए गए हैं। बाड़ों में नियमित पानी का छिड़काव किया जा रहा है और कई स्थानों पर कूलिंग सिस्टम लगाए गए हैं।
इसके अलावा कृत्रिम जलाशय, छोटे तालाब और पानी के कुंड बनाए गए हैं ताकि जानवर गर्मी के दौरान पानी में समय बिताकर राहत महसूस कर सकें। छायादार स्थानों की संख्या भी बढ़ाई गई है।
फलों और तरल पदार्थों की मात्रा बढ़ाई गई
गर्मी के मौसम में शरीर में पानी की कमी होना सबसे बड़ी समस्या होती है। इसी वजह से जू प्रशासन ने जानवरों की डाइट में रसदार फलों और तरल पदार्थों की मात्रा बढ़ा दी है। तरबूज, खरबूजा, खीरा, ककड़ी और अन्य मौसमी फलों को भोजन में शामिल किया गया है।
शाकाहारी जानवरों को हरी घास के साथ पौष्टिक और पानी से भरपूर आहार दिया जा रहा है
ताकि उनके शरीर में पानी की पर्याप्त मात्रा बनी रहे और वे स्वस्थ रहें।
पशु चिकित्सकों की टीम लगातार कर रही निगरानी
जू प्रशासन ने पशु चिकित्सकों और विशेषज्ञों की टीम को पूरी तरह सतर्क रखा है।
सभी जानवरों की स्वास्थ्य स्थिति, खान-पान और व्यवहार पर नियमित नजर रखी जा रही है।
यदि किसी जानवर में डिहाइड्रेशन, हीट स्ट्रेस या अन्य स्वास्थ्य संबंधी लक्षण दिखाई देते हैं तो
तुरंत उपचार की व्यवस्था की जाती है। नियमित स्वास्थ्य परीक्षण के जरिए
यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि गर्मी का असर किसी भी वन्यजीव पर गंभीर रूप से न पड़े।
पर्यटकों के लिए बना आकर्षण
जानवरों की विशेष गर्मी वाली डाइट पर्यटकों के बीच भी चर्चा का विषय बनी हुई है।
खासकर भालुओं को दी जा रही फ्रूट आइसक्रीम देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग जू पहुंच रहे हैं।
बच्चों और परिवारों के लिए यह अनोखा अनुभव बन गया है।
जू प्रशासन का कहना है कि वन्यजीवों की सुरक्षा और
स्वास्थ्य उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और मौसम के अनुसार सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
वन्यजीव संरक्षण की दिशा में सराहनीय पहल
विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते मौसम और बढ़ती गर्मी को देखते हुए इस प्रकार की
व्यवस्थाएं वन्यजीव संरक्षण के लिए बेहद जरूरी हैं। उचित आहार,
ठंडक की व्यवस्था और नियमित स्वास्थ्य जांच से जानवरों को गर्मी के दुष्प्रभावों से बचाया जा सकता है।
गोरखपुर जू द्वारा उठाए गए कदम अन्य चिड़ियाघरों के लिए भी एक उदाहरण बन सकते हैं कि
किस प्रकार मौसम के अनुसार जानवरों की देखभाल की जानी चाहिए।
गोरखपुर जू प्रशासन ने भीषण गर्मी को देखते हुए जानवरों की डाइट और देखभाल में
महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। बाघों को कम मांस, भालुओं को पौष्टिक फ्रूट आइसक्रीम और अन्य वन्यजीवों को विशेष
संतुलित आहार देकर उन्हें गर्मी से बचाने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही बाड़ों में ठंडक,
पर्याप्त पानी और स्वास्थ्य निगरानी की बेहतर व्यवस्था कर वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है।
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