वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट
ईरान-इस्राइल युद्ध के बाद बढ़ी अमेरिका की चिंता
हाल ही में ईरान और इस्राइल के बीच हुए संघर्ष के बाद अब अमेरिका की रक्षा तैयारियों को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार इस्राइल की सुरक्षा के लिए अमेरिका ने अपने आधुनिक मिसाइल इंटरसेप्टर का बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया, जिससे उसके रक्षा भंडार पर भारी असर पड़ा है।
बताया जा रहा है कि इस पूरे घटनाक्रम के बाद अमेरिकी रक्षा मंत्रालय यानी पेंटागन की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं। विशेषज्ञ इसे अमेरिका की सैन्य रणनीति और वैश्विक सुरक्षा संतुलन से जोड़कर देख रहे हैं।
वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट में बड़ा दावा
The Washington Post की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका ने ईरानी हमलों से इस्राइल को बचाने के लिए अपने सबसे आधुनिक और महंगे इंटरसेप्टर मिसाइल सिस्टम का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका ने 200 से अधिक THAAD (थाड) मिसाइल इंटरसेप्टर दागे। इसके अलावा अमेरिकी नौसेना के जहाजों से 100 से ज्यादा SM-3 और SM-6 मिसाइलें भी इस्तेमाल की गईं।
विशेषज्ञों के अनुसार यह अमेरिका के रक्षा भंडार का बड़ा हिस्सा माना जाता है।
क्या है THAAD मिसाइल सिस्टम?
THAAD यानी Terminal High Altitude Area Defense अमेरिका का अत्याधुनिक मिसाइल रक्षा सिस्टम है। इसका इस्तेमाल दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही नष्ट करने के लिए किया जाता है।
यह सिस्टम दुनिया के सबसे उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम में गिना जाता है और इसकी एक-एक मिसाइल की कीमत करोड़ों डॉलर बताई जाती है।
इस्राइल ने बचाकर रखे अपने हथियार?
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि जहां अमेरिका लगातार मिसाइल इंटरसेप्टर दाग रहा था, वहीं इस्राइल ने अपने “Arrow” इंटरसेप्टर सिस्टम का सीमित इस्तेमाल किया।
बताया गया कि इस्राइल ने 100 से कम एरो मिसाइलों का इस्तेमाल किया और अपने हथियारों का बड़ा हिस्सा सुरक्षित रखा। इस दावे के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है।
अमेरिका के सहयोगियों की भी बढ़ी चिंता
रिपोर्ट सामने आने के बाद अमेरिकी सहयोगी देशों की चिंता भी बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भविष्य में किसी बड़े संघर्ष की स्थिति बनती है तो अमेरिका के पास आधुनिक मिसाइल इंटरसेप्टर की उपलब्धता एक बड़ा मुद्दा बन सकती है।
पेंटागन अब अपने रक्षा भंडार को तेजी से दोबारा भरने की तैयारी में जुट सकता है।
पेंटागन के सामने नई चुनौती
Pentagon के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती अपने रक्षा भंडार को दोबारा मजबूत करना माना जा रहा है।
आधुनिक इंटरसेप्टर मिसाइलों का निर्माण बेहद महंगा और समय लेने वाला होता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार वैश्विक तनाव के बीच अमेरिका को
अब अपनी रक्षा नीति में बड़े बदलाव करने पड़ सकते हैं।
क्या ट्रंप को हो सकता है राजनीतिक नुकसान?
रिपोर्ट के बाद अमेरिकी राजनीति में भी बहस तेज हो गई है। कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि
यदि अमेरिका का रक्षा भंडार कमजोर पड़ता है तो इसका असर आगामी चुनावी राजनीति पर भी पड़ सकता है।
हालांकि इस मुद्दे पर पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump और वर्तमान अमेरिकी नेतृत्व की
रणनीतियों को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही हैं।
सोशल मीडिया पर तेज हुई बहस
इस खबर के सामने आने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X और अन्य जगहों पर बहस तेज हो गई है।
कुछ लोग अमेरिका द्वारा इस्राइल को दिए गए समर्थन को जरूरी बता रहे हैं,
जबकि कुछ लोग इसे अमेरिकी संसाधनों पर भारी बोझ मान रहे हैं।
कई विशेषज्ञों ने यह सवाल भी उठाया है कि भविष्य में
अमेरिका कितने लंबे समय तक इस तरह वैश्विक संघर्षों में सैन्य मदद जारी रख पाएगा।
वैश्विक सुरक्षा पर क्या पड़ेगा असर?
विशेषज्ञों के अनुसार यह घटनाक्रम वैश्विक सुरक्षा संतुलन पर असर डाल सकता है। यदि अमेरिका का
रक्षा भंडार कमजोर होता है तो इसका असर एशिया, यूरोप और मध्य पूर्व में उसकी सैन्य रणनीति पर भी पड़ सकता है।
इसी वजह से अमेरिका अब अपने सहयोगी देशों के साथ
रक्षा सहयोग और उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर जोर दे सकता है।
ईरान-इस्राइल संघर्ष के बाद सामने आई रिपोर्ट ने अमेरिका की रक्षा तैयारियों और
वैश्विक सैन्य रणनीति को लेकर नई बहस छेड़ दी है। इस्राइल की सुरक्षा के लिए
अमेरिका द्वारा बड़े पैमाने पर मिसाइल इंटरसेप्टर इस्तेमाल किए जाने से
उसके रक्षा भंडार पर असर पड़ा है। अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि
अमेरिका आगे अपनी सैन्य रणनीति और रक्षा उत्पादन को किस तरह मजबूत करता है।
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