कांग्रेस ने
उत्तर प्रदेश विधानमंडल के विशेष सत्र में महिला आरक्षण को लेकर जोरदार राजनीतिक टकराव देखने को मिला। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप के बीच सदन का माहौल गर्म रहा।
कांग्रेस का सवाल: “नीयत है तो तुरंत लागू करें आरक्षण”
आराधना मिश्रा मोना ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर भाजपा सरकार की नीयत साफ है, तो महिला आरक्षण को तत्काल लागू किया जाए।
उन्होंने मांग रखी कि:
- 2027 के विधानसभा चुनाव में महिलाओं को 33% आरक्षण दिया जाए
- संसद में पास बिल को तुरंत लागू किया जाए
उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस ने ही देश में महिलाओं को बराबरी का अधिकार दिलाने में अहम भूमिका निभाई है।
भाजपा का जवाब: परिसीमन के बिना संभव नहीं
कांग्रेस के आरोपों पर सुरेश खन्ना ने जवाब देते हुए कहा कि महिला आरक्षण लागू करने के लिए परिसीमन (Delimitation) जरूरी है।
इस पर कांग्रेस नेता ने पलटवार करते हुए कहा कि:
- इसके लिए परिसीमन आवश्यक नहीं है
- सरकार चाहे तो तुरंत लागू कर सकती है
डिप्टी सीएम का सपा पर हमला
बृजेश पाठक ने समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला।
उन्होंने आरोप लगाया कि:
- सपा महिलाओं के सम्मान की बात करती है लेकिन अतीत में घटनाएं इसके उलट रही हैं
- स्टेट गेस्ट हाउस कांड जैसे मामलों का जिक्र किया
सपा का पलटवार
संग्राम यादव ने मुख्यमंत्री के भाषण पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि:
- मुख्यमंत्री ने नारी सशक्तिकरण पर नई बात नहीं रखी
- बार-बार वही पुराने मुद्दे दोहराए जा रहे हैं
सीएम योगी का बयान: कानून व्यवस्था से बढ़ी महिलाओं की भागीदारी
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राज्य में कानून व्यवस्था में सुधार हुआ है, जिससे महिलाओं की कार्यबल में भागीदारी बढ़ी है।
उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा:
- अगर सपा 33% आरक्षण की बात करती है, तो पहले अपने आचरण पर विचार करे
- संसद में अपने व्यवहार की निंदा करे
तीखे बयान से बढ़ी सियासी गर्मी
सत्र के दौरान मुख्यमंत्री ने कांग्रेस और सपा पर तीखे शब्दों में हमला बोला, जिससे राजनीतिक माहौल और गरमा गया।
यह बहस अब केवल नीति तक सीमित नहीं रही, बल्कि राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का केंद्र बन गई है।
क्या है बड़ा मुद्दा?
महिला आरक्षण बिल को लेकर मुख्य सवाल यही है:
- क्या इसे तुरंत लागू किया जा सकता है?
- क्या परिसीमन जरूरी है?
- क्या 2027 चुनाव में महिलाओं को आरक्षण मिलेगा?
उत्तर प्रदेश विधानमंडल का यह विशेष सत्र दिखाता है कि महिला आरक्षण अब बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। आराधना मिश्रा मोना की मांग और योगी आदित्यनाथ के जवाब ने इस बहस को और तेज कर दिया है।
आने वाले समय में यह मुद्दा चुनावी राजनीति का केंद्र बन सकता है।
