चाणक्य के कथन के साथ छात्रों ने जताई चिंता
उत्तर प्रदेश के शिक्षा नगरी कहे जाने वाले प्रयागराज में रोजगार की मांग को लेकर छात्रों और युवाओं ने एकजुट होकर कैंडल मार्च निकाला। हाथों में मोमबत्तियां, तख्तियां और रोजगार से जुड़े संदेश लेकर बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं सड़कों पर उतरे और अपनी आवाज सरकार तथा प्रशासन तक पहुंचाने का प्रयास किया। यह प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा, लेकिन इसमें शामिल युवाओं की भावनाएं और भविष्य को लेकर उनकी चिंता साफ दिखाई दी।
मार्च के दौरान आचार्य चाणक्य का प्रसिद्ध कथन— “शिक्षक कभी साधारण नहीं होता, प्रलय और निर्माण उसकी गोद में पलते हैं” — विशेष रूप से चर्चा का विषय बना। छात्रों का कहना था कि यदि शिक्षित युवाओं को रोजगार नहीं मिलेगा तो इसका असर केवल उन पर नहीं बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र के विकास पर पड़ेगा।
📢 रोजगार की मांग को लेकर युवाओं का प्रदर्शन
कैंडल मार्च में शामिल छात्रों ने कहा कि लंबे समय से विभिन्न सरकारी विभागों में रिक्त पदों पर भर्तियां लंबित हैं। कई प्रतियोगी परीक्षाओं के परिणाम समय पर घोषित नहीं हो रहे हैं, जबकि कुछ भर्तियां वर्षों से अधर में लटकी हुई हैं। इससे लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि पढ़ाई पूरी करने के बाद भी रोजगार नहीं मिलने से युवा मानसिक तनाव, आर्थिक कठिनाइयों और सामाजिक दबाव का सामना कर रहे हैं।
🚨 बढ़ती बेरोजगारी से चिंतित हैं युवा
छात्रों ने कहा कि देश की युवा आबादी उसकी सबसे बड़ी ताकत है, लेकिन रोजगार के अवसर सीमित होने के कारण युवाओं में निराशा बढ़ रही है। उनका मानना है कि यदि समय रहते रोजगार के अवसर नहीं बढ़ाए गए और भर्ती प्रक्रियाओं में तेजी नहीं लाई गई तो यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।
युवाओं ने कहा कि वे केवल नौकरी नहीं बल्कि अपने भविष्य और सम्मानजनक जीवन के अधिकार की मांग कर रहे हैं।
🎯 सरकार के सामने रखीं प्रमुख मांगें
कैंडल मार्च के दौरान छात्रों ने सरकार के सामने कई महत्वपूर्ण मांगें रखीं। इनमें रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती प्रक्रिया शुरू करना, लंबित परीक्षाओं के परिणाम जल्द घोषित करना, भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना और युवाओं के लिए नए रोजगार अवसर सृजित करना प्रमुख रूप से शामिल रहा।
छात्रों का कहना था कि यदि भर्ती प्रक्रिया समयबद्ध और पारदर्शी होगी तो युवाओं का विश्वास भी मजबूत होगा।
✊ शांतिपूर्ण तरीके से दर्ज कराया विरोध
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखी। मार्च में शामिल युवाओं ने किसी प्रकार की अव्यवस्था या हिंसा का सहारा नहीं लिया। उन्होंने “रोजगार हमारा अधिकार है”, “युवा जागा है, देश जागेगा”, “छात्र एकता जिंदाबाद” और
“भर्ती दो, भविष्य बचाओ” जैसे नारों के माध्यम से अपनी मांगों को बुलंद किया।
यह मार्च युवाओं की एकजुटता और लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रति उनकी जागरूकता का भी प्रतीक बना।
🕯️ उम्मीद और संघर्ष का प्रतीक बना कैंडल मार्च
मोमबत्तियों की रोशनी के बीच निकला यह कैंडल मार्च केवल एक विरोध प्रदर्शन
नहीं बल्कि लाखों युवाओं की उम्मीदों, संघर्ष और बेहतर भविष्य की आकांक्षाओं का प्रतीक बन गया।
छात्रों का कहना था कि वे किसी राजनीतिक दल या विचारधारा के लिए
नहीं बल्कि अपने अधिकारों और रोजगार के मुद्दे को लेकर एकजुट हुए हैं।
उनका मानना है कि रोजगार केवल आर्थिक आवश्यकता नहीं बल्कि आत्मसम्मान और सामाजिक सुरक्षा का भी आधार है।
📚 शिक्षा और रोजगार हैं राष्ट्र निर्माण की नींव
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि शिक्षा और रोजगार किसी भी विकसित राष्ट्र की बुनियादी जरूरतें हैं।
यदि शिक्षित युवाओं को अवसर नहीं मिलेंगे तो देश की
विकास गति भी प्रभावित होगी। आचार्य चाणक्य के विचारों का उल्लेख करते हुए
छात्रों ने कहा कि राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है और
उनकी समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर हल किया जाना चाहिए।
प्रयागराज में आयोजित छात्रों का यह कैंडल मार्च युवाओं की बढ़ती बेरोजगारी और रोजगार की
मांग को मजबूती से सामने लाता है। छात्रों ने शांतिपूर्ण तरीके से
सरकार और प्रशासन तक अपनी आवाज पहुंचाने का प्रयास किया और
भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने की मांग दोहराई। आने वाले समय में यह देखना
महत्वपूर्ण होगा कि युवाओं की इन मांगों पर क्या कदम उठाए जाते हैं।
फिलहाल प्रयागराज का यह कैंडल मार्च रोजगार की लड़ाई का एक मजबूत प्रतीक बनकर उभरा है।
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