चाणक्य के कथन के साथ छात्रों ने जताई चिंता
प्रयागराज में रोजगार की मांग को लेकर छात्रों और युवाओं ने एकजुट होकर कैंडल मार्च निकाला। हाथों में मोमबत्तियां और रोजगार संबंधी तख्तियां लिए छात्रों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को सरकार और प्रशासन तक पहुंचाने का प्रयास किया। इस दौरान आचार्य चाणक्य का प्रसिद्ध कथन— “शिक्षक कभी साधारण नहीं होता, प्रलय और निर्माण उसकी गोद में पलते हैं” — विशेष रूप से चर्चा का विषय रहा। छात्रों का कहना था कि शिक्षा और रोजगार किसी भी राष्ट्र के विकास की आधारशिला हैं और यदि पढ़े-लिखे युवाओं को अवसर नहीं मिलेंगे तो इसका असर पूरे समाज पर पड़ेगा।
बेरोजगारी को लेकर युवाओं में बढ़ रही चिंता
कैंडल मार्च में शामिल छात्रों ने कहा कि लंबे समय से विभिन्न सरकारी भर्तियां लंबित हैं, कई परीक्षाओं के परिणाम समय पर नहीं आ रहे हैं और रोजगार के अवसर लगातार कम होते जा रहे हैं। इससे लाखों युवा मानसिक, आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यदि समय रहते युवाओं की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
रोजगार को लेकर सरकार से की गई मांगें
छात्रों ने सरकार से रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती प्रक्रिया शुरू करने, लंबित परीक्षाओं के परिणाम घोषित करने, पारदर्शी चयन प्रक्रिया सुनिश्चित करने और युवाओं के लिए नए रोजगार अवसर सृजित करने की मांग की। उनका कहना था कि देश की सबसे बड़ी ताकत युवा आबादी है और यदि यही वर्ग निराश होगा तो विकास की गति प्रभावित होगी।
शांतिपूर्ण तरीके से दर्ज कराया विरोध
कैंडल मार्च पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा। छात्रों ने किसी भी प्रकार की अव्यवस्था पैदा किए बिना लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखी। मार्च के दौरान “रोजगार हमारा अधिकार है”, “युवा जागा है, देश जागेगा” और “छात्र एकता जिंदाबाद” जैसे नारे लगाए गए। बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं इस कार्यक्रम में शामिल हुए और रोजगार के मुद्दे पर एकजुटता दिखाई।
युवाओं की उम्मीदों का प्रतीक बना कैंडल मार्च
मोमबत्तियों की रोशनी के बीच निकला यह मार्च केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं बल्कि युवाओं की उम्मीदों, संघर्ष और भविष्य की चिंता का प्रतीक बन गया। छात्रों का कहना था कि वे किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं बल्कि अपने अधिकार और भविष्य की सुरक्षा के लिए सड़क पर उतरे हैं। उनका मानना है कि रोजगार केवल आर्थिक जरूरत नहीं बल्कि सम्मानजनक जीवन जीने का आधार भी है।
निष्कर्ष
प्रयागराज में आयोजित छात्रों का यह कैंडल मार्च युवाओं की बढ़ती चिंताओं और रोजगार की मांग को स्पष्ट रूप से सामने लाता है। आचार्य चाणक्य के विचारों का उल्लेख करते हुए छात्रों ने संदेश दिया कि शिक्षित युवा किसी भी राष्ट्र के निर्माण की सबसे बड़ी शक्ति होते हैं। यदि उनकी आवाज को गंभीरता से नहीं सुना गया तो इसके दूरगामी सामाजिक और आर्थिक परिणाम सामने आ सकते हैं। फिलहाल छात्र रोजगार, भर्ती प्रक्रिया में तेजी और युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने की मांग पर अडिग हैं।
