गोरखपुर BRD मेडिकल कॉलेज में रैगिंग से मचा बवाल, 18 MBBS छात्रों पर बड़ी कार्रवाई

मेडिकल कॉलेज में जूनियर छात्रों के आरोप से खुला मामला

गोरखपुर के बाबा राघव दास (BRD) मेडिकल कॉलेज में रैगिंग का मामला सामने आने के बाद मेडिकल शिक्षा जगत में हड़कंप मच गया है। कॉलेज प्रशासन ने 18 वरिष्ठ MBBS छात्रों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें एक महीने के लिए निलंबित कर दिया है। साथ ही प्रत्येक छात्र पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।

बताया जा रहा है कि जूनियर छात्रों ने मानसिक उत्पीड़न और रैगिंग की शिकायत राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) और UGC तक पहुंचाई थी। इसके बाद कॉलेज प्रशासन को जांच शुरू करनी पड़ी।

कई दिनों तक चलता रहा कथित उत्पीड़न

सूत्रों के अनुसार प्रथम वर्ष के छात्रों ने आरोप लगाया कि उन्हें लगातार परेशान किया जा रहा था। कथित तौर पर कई दिनों तक उनका मानसिक दबाव और उत्पीड़न किया गया।

शिकायत मिलने के बाद एंटी रैगिंग कमेटी ने पूरे मामले की जांच शुरू की। कॉलेज परिसर और हॉस्टल के CCTV फुटेज भी खंगाले गए।

जांच में सही पाए गए आरोप

कॉलेज प्रशासन के अनुसार जांच के दौरान कई आरोप सही पाए गए। इसके बाद एंटी रैगिंग कमेटी ने दोषी छात्रों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की सिफारिश की।

प्रशासन ने 18 छात्रों को एक महीने के लिए कॉलेज और हॉस्टल से निलंबित कर दिया। साथ ही उन पर आर्थिक दंड भी लगाया गया।

मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने दिखाई सख्ती

कॉलेज प्रशासन ने साफ कहा है कि संस्थान में रैगिंग किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि मेडिकल कॉलेज को “रैगिंग फ्री कैंपस” बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है।

अधिकारियों ने चेतावनी दी कि भविष्य में अगर कोई छात्र इस तरह की गतिविधियों में शामिल पाया गया तो और भी कठोर कार्रवाई की जाएगी।

NMC और UGC तक पहुंचा मामला

जूनियर छात्रों द्वारा शिकायत सीधे राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग और

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को भेजे जाने के बाद मामला और गंभीर हो गया।

विशेषज्ञों का कहना है कि अब मेडिकल कॉलेजों में

एंटी रैगिंग नियमों को पहले से ज्यादा सख्ती से लागू किया जा रहा है।

मेडिकल कॉलेजों में क्यों गंभीर माना जाता है रैगिंग?

विशेषज्ञों के अनुसार मेडिकल शिक्षा पहले से ही काफी तनावपूर्ण होती है।

ऐसे में रैगिंग जैसी घटनाएं नए छात्रों पर गंभीर मानसिक असर डाल सकती हैं।

कई मामलों में छात्रों में डर, तनाव और मानसिक अवसाद जैसी समस्याएं भी देखने को मिलती हैं।

यही वजह है कि रैगिंग को अब गंभीर अपराध की श्रेणी में रखा जाता है।

BRD मेडिकल कॉलेज पहले भी रहा चर्चा में

BRD मेडिकल कॉलेज पहले भी कई विवादों को लेकर सुर्खियों में रह चुका है।

इससे पहले भी कॉलेज में रैगिंग और अनुशासनहीनता के मामलों में कार्रवाई हो चुकी है।

इस घटना के बाद एक बार फिर कॉलेज प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।

सोशल मीडिया पर लोगों की नाराजगी

रैगिंग मामले की खबर सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों में नाराजगी देखने को मिल रही है।

कई यूजर्स ने दोषी छात्रों के खिलाफ और सख्त कार्रवाई की मांग की है।

कुछ लोगों ने लिखा कि डॉक्टर बनने वाले छात्रों से इस तरह के व्यवहार की उम्मीद नहीं की जा सकती।

एंटी रैगिंग सिस्टम को और मजबूत करने की तैयारी

सूत्रों के अनुसार कॉलेज प्रशासन अब हॉस्टल निगरानी, CCTV मॉनिटरिंग और

शिकायत व्यवस्था को और मजबूत करने की तैयारी कर रहा है।

इसके अलावा नए छात्रों के लिए जागरूकता कार्यक्रम और काउंसलिंग सत्र भी आयोजित किए जा सकते हैं।

गोरखपुर के BRD मेडिकल कॉलेज में 18 MBBS छात्रों पर हुई कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि

अब रैगिंग के मामलों में प्रशासन किसी तरह की नरमी नहीं बरतेगा।

मेडिकल संस्थानों में सुरक्षित और सकारात्मक माहौल बनाए रखने के लिए

सख्त एंटी रैगिंग व्यवस्था बेहद जरूरी मानी जा रही है।

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