नेपाल सरकार के नए व्यापारिक नियम लागू होने के बाद Gorakhpur से नेपाल जाने वाले ट्रांसपोर्ट कारोबारियों में हड़कंप मच गया है। अब जिन सामानों पर स्पष्ट रूप से एमआरपी (MRP) अंकित नहीं है, उन्हें नेपाल में प्रवेश नहीं दिया जा रहा। इस सख्ती के चलते कई ट्रक सीमा पर ही रोक दिए गए हैं और व्यापारियों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
बताया जा रहा है कि नेपाल सरकार उपभोक्ता अधिकारों और टैक्स पारदर्शिता को लेकर बेहद सख्त हो गई है। इसी कारण बिना एमआरपी वाले सामान की एंट्री पर रोक लगा दी गई है।
सोनौली और रुपईडीहा बॉर्डर पर रोके गए ट्रक
Sonauli Border और Rupaidiha Border पर कई ट्रकों को रोक दिया गया, क्योंकि उनमें लदे उत्पादों पर एमआरपी अंकित नहीं था। नेपाल कस्टम अधिकारियों ने ऐसे वाहनों को क्लियरेंस देने से इनकार कर दिया।
इन ट्रकों में किराना सामान, कॉस्मेटिक उत्पाद, प्लास्टिक आइटम, कपड़े और घरेलू उपयोग का सामान शामिल था। कई व्यापारियों का माल दिनों तक सीमा पर फंसा रहा, जिससे आर्थिक नुकसान बढ़ गया।
ट्रांसपोर्ट कारोबारियों ने बदला सिस्टम
गोरखपुर के ट्रांसपोर्टरों ने अब अपने काम करने का तरीका बदलना शुरू कर दिया है। ट्रांसपोर्ट कंपनियों ने गोदाम स्तर पर माल की जांच शुरू कर दी है। अब बिना चेकिंग कोई ट्रक नेपाल के लिए रवाना नहीं किया जा रहा।
यदि किसी पैकेट पर एमआरपी या कंपनी विवरण नहीं मिलता, तो उसे वापस कर दिया जा रहा है। व्यापारियों को पहले से चेतावनी दी जा रही है कि नेपाल भेजे जाने वाले हर उत्पाद पर नियमों के अनुसार जानकारी अंकित हो।
नेपाल सरकार क्यों हुई सख्त?
#नेपाल सरकार का कहना है कि बिना एमआरपी वाले सामान के जरिए टैक्स चोरी और ग्राहकों से मनमानी कीमत
वसूलने की शिकायतें लगातार मिल रही थीं। इसी को रोकने के लिए यह नया नियम लागू किया गया है।
नेपाल के अधिकारियों के अनुसार हर उत्पाद पर एमआरपी,
निर्माण तिथि और कंपनी का विवरण साफ-साफ लिखा होना जरूरी है।
इससे उपभोक्ताओं को सही जानकारी मिलेगी और बाजार में पारदर्शिता बनी रहेगी।
व्यापार पर पड़ सकता है असर
गोरखपुर और नेपाल के बीच हर दिन करोड़ों रुपये का कारोबार होता है।
नए नियम लागू होने के बाद फिलहाल व्यापार की रफ्तार धीमी पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
सबसे ज्यादा असर छोटे व्यापारियों, पैकिंग यूनिट और स्थानीय सप्लायर्स पर पड़ सकता है।
ट्रांसपोर्ट कारोबारियों का कहना है कि अगर नियमों को लेकर जल्द स्पष्ट व्यवस्था नहीं बनी, तो
नेपाल भेजे जाने वाले माल की लागत और ट्रांसपोर्ट खर्च दोनों बढ़ सकते हैं।
व्यापारियों को दी जा रही अहम सलाह
व्यापार मंडल और ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन ने सभी निर्यातकों और व्यापारियों को सलाह दी है कि
नेपाल भेजे जाने वाले हर उत्पाद पर स्पष्ट रूप से एमआरपी, निर्माण तिथि और कंपनी का नाम अंकित करें।
नियमों का पालन नहीं करने पर माल बॉर्डर पर फंस सकता है और व्यापारियों को आर्थिक
नुकसान झेलना पड़ सकता है। फिलहाल सीमा क्षेत्रों में हर ट्रक की सख्ती से जांच की जा रही है।
