राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत के न्यूयॉर्क कार्यक्रम को लेकर नया विवाद सामने आया है। कार्यक्रम में शामिल हुए कुछ धार्मिक नेताओं ने बाद में अपनी भागीदारी पर अफसोस जताया और माफी मांगी। उनका कहना है कि उन्हें कार्यक्रम के आयोजन और उसमें मोहन भागवत की मौजूदगी के बारे में पूरी जानकारी नहीं दी गई थी।
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब न्यूयॉर्क में भागवत के कार्यक्रम को लेकर पहले से ही अलग-अलग संगठनों की ओर से विरोध और समर्थन देखने को मिल रहा था। कार्यक्रम के आयोजकों ने इसे सामाजिक एकता और संवाद से जोड़कर पेश किया, जबकि आलोचकों ने RSS की विचारधारा को लेकर सवाल उठाए हैं।
धार्मिक नेताओं ने क्यों जताया अफसोस?
रिपोर्ट के अनुसार, न्यूयॉर्क में आयोजित कार्यक्रम में कुछ ईसाई और मुस्लिम धार्मिक नेता भी शामिल हुए थे। बाद में इन नेताओं ने कहा कि उन्हें कार्यक्रम की वास्तविक प्रकृति और मोहन भागवत की उपस्थिति के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं थी।
कुछ धार्मिक नेताओं का आरोप है कि उन्हें जिस तरह कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किया गया, उससे उन्हें यह स्पष्ट नहीं हुआ कि यह RSS प्रमुख मोहन भागवत से जुड़ा आयोजन है। जानकारी सामने आने के बाद उन्होंने कार्यक्रम में शामिल होने पर खेद जताया।
निमंत्रण को लेकर उठे सवाल
विवाद की एक प्रमुख वजह कार्यक्रम का निमंत्रण बताया जा रहा है। आरोप लगाने वाले धार्मिक नेताओं के अनुसार, निमंत्रण में मोहन भागवत का नाम या कार्यक्रम की पूरी प्रकृति स्पष्ट रूप से सामने नहीं रखी गई थी।
इसी वजह से कुछ लोगों का कहना है कि अगर उन्हें पहले से पूरी जानकारी होती तो वे कार्यक्रम में शामिल होने को लेकर अलग फैसला ले सकते थे। हालांकि, यह संबंधित धार्मिक नेताओं की ओर से लगाए गए आरोप हैं और कार्यक्रम आयोजकों की ओर से इसके जवाब को भी अलग से देखा जाना जरूरी है।
मोहन भागवत का न्यूयॉर्क में क्या कार्यक्रम था?
मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क में आयोजित Universal Oneness Celebration में हिस्सा लिया था। यह कार्यक्रम मैडिसन स्क्वायर गार्डन में हुआ, जिसमें भारतीय मूल के लोगों के साथ विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों की भागीदारी रही।
भागवत के अमेरिकी दौरे को RSS के शताब्दी वर्ष से जुड़े अंतरराष्ट्रीय संपर्क अभियान का हिस्सा बताया गया है। उनके दौरे में अमेरिका के अलावा कनाडा और ब्रिटेन भी शामिल रहे।
भागवत ने कार्यक्रम में एकता और समरसता पर दिया जोर
कार्यक्रम में मोहन भागवत ने सामाजिक एकता, विविधता और आपसी सद्भाव जैसे मुद्दों पर बात की। उन्होंने भारत और भारतीय समाज की विविधता को लेकर अपना दृष्टिकोण रखा।
उनके संबोधन के बाद कार्यक्रम का राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी विश्लेषण हुआ। कुछ लोगों ने उनके संदेश को समावेशी बताया, जबकि आलोचकों ने RSS की विचारधारा और उसके सामाजिक प्रभाव को लेकर सवाल उठाए।
कार्यक्रम से पहले भी हुआ था विरोध
मोहन भागवत के न्यूयॉर्क कार्यक्रम को लेकर विरोध की स्थिति पहले से बनी हुई थी। कुछ मानवाधिकार और सामाजिक संगठनों ने कार्यक्रम के खिलाफ प्रदर्शन किया था।
मैडिसन स्क्वायर गार्डन के बाहर प्रदर्शनकारियों ने RSS की विचारधारा को लेकर अपनी आपत्तियां जाहिर कीं। वहीं, कार्यक्रम के समर्थकों ने इसे भारतीय संस्कृति, संवाद और वैश्विक एकता का मंच बताया।
न्यूयॉर्क के मेयर ने भी जताई थी आपत्ति
कार्यक्रम से पहले न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने भी भागवत के कार्यक्रम को लेकर चिंता जाहिर की थी। उन्होंने भारत में एक कथित बहिष्कारी राजनीतिक दृष्टिकोण के बढ़ने पर आपत्ति जताई थी, हालांकि उन्होंने यह भी कहा था कि निजी आयोजन को रद्द कराने का अधिकार शहर प्रशासन के पास सीमित है।
कार्यक्रम के बाद विवाद ने पकड़ा जोर
अब धार्मिक नेताओं की ओर से अपनी भागीदारी पर अफसोस जताए जाने के बाद
कार्यक्रम को लेकर विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
इस पूरे मामले में दो अलग-अलग पक्ष सामने दिखाई दे रहे हैं। एक ओर आयोजक
इसे सामाजिक और सांस्कृतिक संवाद का कार्यक्रम बता रहे हैं, वहीं
कुछ प्रतिभागियों का कहना है कि उन्हें आयोजन की पूरी जानकारी नहीं दी गई थी।
ऐसे में विवाद का केंद्र अब मोहन भागवत के भाषण से ज्यादा
कार्यक्रम के निमंत्रण और आयोजन की पारदर्शिता बन गया है।
RSS की अंतरराष्ट्रीय पहुंच भी चर्चा में
मोहन भागवत का अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन दौरा RSS के शताब्दी वर्ष के
दौरान चलाए जा रहे अंतरराष्ट्रीय संपर्क अभियान से जुड़ा है। इस दौरान भारतीय प्रवासी समुदाय और
विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच संवाद बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
इस अभियान को लेकर समर्थकों का कहना है कि इससे भारतीय संस्कृति और
सामाजिक विचारों को वैश्विक स्तर पर सामने रखने का अवसर मिलता है। दूसरी ओर,
आलोचक RSS की विचारधारा को लेकर अपनी चिंताएं लगातार जाहिर कर रहे हैं।
निष्कर्ष
न्यूयॉर्क में मोहन भागवत के कार्यक्रम में शामिल हुए कुछ धार्मिक नेताओं द्वारा बाद में
अफसोस और माफी जताने से नया विवाद खड़ा हो गया है।
इन नेताओं का दावा है कि उन्हें कार्यक्रम की पूरी जानकारी नहीं दी गई थी। वहीं,
भागवत के कार्यक्रम को आयोजकों की ओर से सामाजिक एकता और संवाद से जोड़ा गया था।
अब इस मामले में कार्यक्रम के निमंत्रण और आयोजकों की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
FAQ: Mohan Bhagwat New York Event
1. मोहन भागवत न्यूयॉर्क क्यों गए थे?
मोहन भागवत RSS के शताब्दी वर्ष से जुड़े अंतरराष्ट्रीय संपर्क कार्यक्रम के तहत
अमेरिका पहुंचे थे और न्यूयॉर्क में आयोजित Universal Oneness Celebration में शामिल हुए।
2. न्यूयॉर्क कार्यक्रम को लेकर विवाद क्यों हुआ?
कुछ धार्मिक नेताओं ने आरोप लगाया कि उन्हें कार्यक्रम में
मोहन भागवत की मौजूदगी और आयोजन की वास्तविक प्रकृति की पूरी जानकारी नहीं दी गई थी।
3. क्या धार्मिक नेताओं ने कार्यक्रम में शामिल होने के लिए माफी मांगी?
रिपोर्ट के अनुसार, कुछ धार्मिक नेताओं ने कार्यक्रम में अपनी भागीदारी पर अफसोस जताया और इसके लिए माफी मांगी।
4. मोहन भागवत ने कार्यक्रम में क्या संदेश दिया?
उन्होंने सामाजिक एकता, विविधता और आपसी सद्भाव जैसे विषयों पर जोर दिया।
5. क्या कार्यक्रम का विरोध भी हुआ था?
हां। कार्यक्रम से पहले और उसके दौरान कुछ सामाजिक एवं
मानवाधिकार संगठनों ने भागवत और RSS की विचारधारा के विरोध में प्रदर्शन किया था।
6. क्या यह विवाद अभी खत्म हो गया है?
नहीं। धार्मिक नेताओं की ओर से लगाए गए आरोपों के बाद
कार्यक्रम के निमंत्रण और आयोजकों की भूमिका को लेकर चर्चा जारी है।
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