UP Flood: यूपी के 26 जिलों में बाढ़ का कहर, 3.53 लाख लोग प्रभावित; 17 हजार से ज्यादा लोगों का रेस्क्यू

उत्तर प्रदेश में लगातार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर से बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। प्रदेश के 26 जिलों में करीब 3.53 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। प्रशासन ने बड़े स्तर पर राहत और बचाव अभियान शुरू किया है। अब तक 17,544 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है, जबकि हजारों लोग राहत शिविरों में शरण लिए हुए हैं।

राज्य सरकार के अनुसार प्रभावित क्षेत्रों में लोगों तक भोजन, जरूरी सामान और स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के लिए प्रशासनिक मशीनरी को सक्रिय रखा गया है। बाढ़ की स्थिति पर नजर रखने के लिए जगह-जगह बाढ़ चौकियां बनाई गई हैं और नावों व मोटरबोट की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है।

26 जिलों में बाढ़ का असर

उत्तर प्रदेश के जिन 26 जिलों में बाढ़ का प्रभाव बताया गया है, उनमें अमरोहा, अयोध्या, आजमगढ़, बदायूं, बलिया, बाराबंकी, बस्ती, चंदौली, फर्रुखाबाद, गाजीपुर, गोंडा, गोरखपुर, हरदोई, कासगंज, कानपुर, लखीमपुर खीरी, मिर्जापुर, मुरादाबाद, पीलीभीत, प्रयागराज, रायबरेली, रामपुर, संत कबीर नगर, शाहजहांपुर, उन्नाव और वाराणसी शामिल हैं।

इन इलाकों में कहीं नदियों का जलस्तर बढ़ने से गांवों में पानी पहुंच रहा है तो कहीं तटवर्ती इलाकों में कटान और जलभराव की समस्या बनी हुई है।

17,544 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया

बाढ़ प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को निकालने का अभियान लगातार जारी है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 17,544 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है।

वहीं, 4,847 लोग राहत शिविरों में रह रहे हैं। प्रभावित परिवारों को सुरक्षित रखने के लिए पूरे प्रदेश में 1,312 बाढ़ राहत शिविर स्थापित किए गए हैं।

1,697 नाव और मोटरबोट रेस्क्यू में तैनात

बाढ़ प्रभावित गांवों और जलभराव वाले इलाकों तक पहुंचने के लिए प्रशासन ने बड़ी संख्या में नाव और मोटरबोट तैनात की हैं।

  • 1,634 बाढ़ चौकियां सक्रिय
  • 1,697 नाव और मोटरबोट तैनात
  • 1,068 मेडिकल टीमें मैदान में
  • 1,312 राहत शिविर स्थापित
  • 4,847 लोग राहत शिविरों में रह रहे हैं

इन संसाधनों के जरिए प्रशासन राहत, निगरानी और बचाव अभियान को गति दे रहा है।

बाढ़ पीड़ितों तक पहुंचाया जा रहा भोजन

बाढ़ के कारण घरों से बाहर निकलना मुश्किल होने वाले लोगों के लिए प्रशासन की ओर से भोजन की व्यवस्था की जा रही है। अब तक 72,897 राहत खाद्यान्न पैकेट और 3,67,551 लंच पैकेट वितरित किए जा चुके हैं।

प्रशासन का प्रयास है कि राहत शिविरों और प्रभावित गांवों में रहने वाले लोगों को भोजन और जरूरी सामान की कमी न हो।

स्वास्थ्य विभाग भी अलर्ट

बाढ़ के बाद दूषित पानी से संक्रमण और दूसरी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्रभावित इलाकों में सक्रिय हैं।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 1,068 मेडिकल टीमें काम कर रही हैं। इसके अलावा लोगों को पानी से होने वाली बीमारियों और डिहाइड्रेशन से बचाने के लिए 5.52 लाख से ज्यादा क्लोरीन टैबलेट और 1.87 लाख से अधिक ORS पैकेट वितरित किए गए हैं।

45 हजार से ज्यादा पशु भी प्रभावित

बाढ़ का असर सिर्फ इंसानों तक सीमित नहीं है। सरकारी जानकारी के मुताबिक 45 हजार से अधिक पशु भी प्रभावित हुए हैं। पशुओं के लिए भी राहत व्यवस्था की जा रही है और चारे का इंतजाम किया जा रहा है।

उपलब्ध सरकारी आंकड़ों में अब तक पशुधन की मौत की सूचना नहीं दी गई है।

कानपुर से वाराणसी तक बढ़ी चिंता

कई शहरों और ग्रामीण इलाकों में नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी से प्रशासन सतर्क है। कानपुर में पांडु नदी के बढ़े जलस्तर के कारण कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बने हैं और प्रभावित परिवारों को सुरक्षित निकालने के लिए एनडीआरएफ की मदद ली गई है।

वहीं वाराणसी में गंगा का जलस्तर भी तेजी से बढ़ा है। तटवर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की जरूरत पड़ रही है।

भारी बारिश का दौर अभी चिंता का कारण

उत्तर प्रदेश में बारिश का सिलसिला पूरी तरह थमा नहीं है। मौसम विभाग की ओर से भी कई इलाकों में भारी बारिश को लेकर चेतावनी जारी की गई है। ऐसे में नदियों का जलस्तर और बढ़ने की

आशंका के बीच प्रशासन को लगातार निगरानी बनाए रखने की जरूरत है।

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से प्रशासन की ओर से

सुरक्षित स्थानों पर रहने और स्थानीय अधिकारियों के निर्देशों का पालन करने की अपील की जा रही है।

सरकार और प्रशासन की प्राथमिकता क्या?

फिलहाल प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना,

राहत शिविरों में पर्याप्त व्यवस्था बनाए रखना और प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है।

17 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है और

राहत अभियान अभी जारी है। आने वाले दिनों में मौसम और नदियों के जलस्तर के

आधार पर रेस्क्यू ऑपरेशन को और तेज किया जा सकता है।

निष्कर्ष

उत्तर प्रदेश के 26 जिलों में बाढ़ से करीब 3.53 लाख लोगों के प्रभावित होने के बाद प्रशासन ने

बड़े स्तर पर राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया है। 1,312 राहत शिविरों, 1,697 नाव-मोटरबोट और

1,068 मेडिकल टीमों को मैदान में उतारा गया है। हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है।

अब प्रशासन की नजर नदियों के जलस्तर और आने वाली बारिश पर है।

FAQ: UP Flood 2026

1. उत्तर प्रदेश में कितने जिले बाढ़ से प्रभावित हैं?

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक उत्तर प्रदेश के 26 जिले बाढ़ से प्रभावित हैं।

2. यूपी में बाढ़ से कितने लोग प्रभावित हुए हैं?

करीब 3.53 लाख लोग बाढ़ की स्थिति से प्रभावित बताए गए हैं।

3. कितने लोगों को सुरक्षित निकाला गया है?

अब तक 17,544 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।

4. यूपी में कितने राहत शिविर बनाए गए हैं?

प्रदेश में 1,312 बाढ़ राहत शिविर स्थापित किए गए हैं।

5. बाढ़ राहत के लिए कितनी नावें लगाई गई हैं?

प्रशासन ने 1,697 नाव और मोटरबोट राहत एवं बचाव अभियान में तैनात की हैं।

6. बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की क्या व्यवस्था है?

प्रभावित क्षेत्रों में 1,068 मेडिकल टीमें सक्रिय हैं और क्लोरीन टैबलेट व ORS पैकेट भी वितरित किए जा रहे हैं।

7. यूपी के कौन-कौन से जिले बाढ़ से प्रभावित हैं?

अमरोहा, अयोध्या, आजमगढ़, बदायूं, बलिया, बाराबंकी, बस्ती, चंदौली, फर्रुखाबाद,

गाजीपुर, गोंडा, गोरखपुर, हरदोई, कासगंज, कानपुर,

लखीमपुर खीरी, मिर्जापुर, मुरादाबाद, पीलीभीत, प्रयागराज, रायबरेली, रामपुर,

संत कबीर नगर, शाहजहांपुर, उन्नाव और वाराणसी प्रभावित जिलों में शामिल हैं।

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