Gorakhpur Rajghat Bridge
एक साल बाद भी सीधा नहीं हो सका तिरछा पिलर
Gorakhpur के राजघाट क्षेत्र में राप्ती नदी पर बन रहे नए पुल का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है, लेकिन करीब एक साल पहले तिरछा हुआ एक पिलर अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है। निर्माण एजेंसी और तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा लगातार प्रयास किए जाने के बावजूद पिलर को सीधा नहीं किया जा सका है।
अब इस समस्या के समाधान के लिए नए विशेषज्ञों को बुलाया गया है। तकनीकी टीम पिलर के कुएं को हटाकर पत्थर के स्लैब को तोड़ने की नई योजना पर काम कर रही है।
नदी की धारा तक मोड़नी पड़ी
जानकारी के अनुसार, करीब एक वर्ष पहले पुल निर्माण के दौरान एक पिलर अचानक तिरछा हो गया था। इसके बाद इंजीनियरों और विशेषज्ञों ने पिलर को संतुलित करने के लिए कई तकनीकी उपाय अपनाए।
Punjab और आजमगढ़ से बुलाए गए विशेषज्ञों की सलाह पर राप्ती नदी की धारा तक मोड़ दी गई ताकि पानी का दबाव कम हो सके और पिलर को सीधा करने में मदद मिले।
इसके अलावा पिलर के कुएं के अंदर मौजूद पत्थर के स्लैब को काटने की कोशिश भी की गई, लेकिन इन प्रयासों से भी सफलता नहीं मिल सकी।
बाकी हिस्सों में तेजी से चल रहा निर्माण
हालांकि, तिरछे पिलर की समस्या के बावजूद पुल के बाकी हिस्सों का निर्माण तेजी से जारी है। नौसड़ से राजघाट और राजघाट से नौसड़ दोनों लेन में अन्य पिलरों पर काम लगातार चल रहा है।
बुधवार को भी निर्माण स्थल पर मजदूरों और इंजीनियरों की टीमें काम में जुटी रहीं।
अधिकारियों का कहना है कि परियोजना के अन्य हिस्सों का कार्य तय समयसीमा के अनुसार आगे बढ़ रहा है।
289 करोड़ रुपये की है परियोजना
सेतु निगम के जीएम Mithilesh Kumar के अनुसार इस परियोजना पर करीब 289 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
दोनों नए पुलों की लंबाई 412.92 मीटर और चौड़ाई 12 मीटर होगी। पुल दो-दो लेन का बनाया जा रहा है,
जिससे शहर की यातायात व्यवस्था को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
शहर के ट्रैफिक को मिलेगी राहत
पुल बनने के बाद नौसड़ और राजघाट के बीच आवागमन काफी आसान हो जाएगा।
वर्तमान में इस मार्ग पर अक्सर जाम की समस्या बनी रहती है, जिससे लोगों को घंटों परेशानी झेलनी पड़ती है।
नई परियोजना के पूरा होने के बाद शहर के ट्रैफिक दबाव में
कमी आएगी और लोगों का सफर अधिक सुगम हो सकेगा।
तिरछा पिलर अब भी सबसे बड़ी चुनौती
हालांकि, परियोजना की सबसे बड़ी चुनौती अब भी तिरछा पिलर ही बना हुआ है।
तकनीकी विशेषज्ञ लगातार समाधान खोजने में लगे हैं, लेकिन अब तक कोई स्थायी सफलता नहीं मिल सकी है।
अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही नए तकनीकी उपायों के जरिए
इस समस्या को दूर करने की कोशिश की जाएगी।
