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मलौनी बांध : धंधेबाजों ने रोक से पहले ही कर दी प्लॉटिंग, बन रहे मकान-दुकान
- गोरखपुर की राप्ती नदी के किनारे बने मलौनी बांध के पास कई गांव ऐसे हैं, जो हर साल बाढ़ से प्रभावित होते हैं।
- प्रशासन ने बाढ़ और डूब क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए इन गांवों में रजिस्ट्री (जमीन की खरीद-फरोख्त) पर रोक लगा दी थी।
- डीएम के आदेश के बाद कुल 14 गांवों में रजिस्ट्री रोक दी गई, ताकि लोग अवैध तरीके से डूब क्षेत्र की जमीन पर कब्जा कर मकान-दुकान न बना सकें।
लेकिन जमीन के धंधेबाजों ने प्रशासन की रोक से पहले ही प्लॉटिंग कर दी। कई जगहों पर अब मकान और दुकानें भी बननी शुरू हो गई हैं।
अवैध निर्माण की असलियत
- मलौनी बांध की कटरी (नदी किनारे के इलाक़े) में अवैध रूप से प्लॉट काटकर बेचे जा रहे हैं।
- लोग बिना अनुमति के मकान-दुकान बना रहे हैं।
- इससे न केवल नदी का बहाव प्रभावित होगा बल्कि हर साल बाढ़ के दौरान हजारों लोग खतरे में आ जाएंगे।
- प्रशासन और सिंचाई विभाग की कई बार की चेतावनी के बावजूद अवैध निर्माण जारी है।
नियम क्या कहते हैं?
- राप्ती और रमगढ़ताल के किनारे 50 मीटर के दायरे में किसी भी तरह का निर्माण पूरी तरह से प्रतिबंधित है।
- इसके बावजूद लोग यहां बिना अनुमति के प्लॉटिंग और मकान-दुकान खड़ी कर रहे हैं।
- सिंचाई विभाग और जिला प्रशासन का कहना है कि इस तरह का निर्माण खतरनाक है, क्योंकि यह नदी के प्राकृतिक प्रवाह को रोक देगा और हर साल जलभराव बढ़ेगा।
प्रशासन की कार्रवाई
- रिपोर्ट के अनुसार प्रशासन ने 27 अगस्त को बड़े स्तर पर अभियान चलाया।
- पांच एकड़ क्षेत्रफल में अवैध प्लॉटिंग को बुलडोजर चलवाकर ध्वस्त कर दिया गया।
- आगे भी ऐसे निर्माणों को चिन्हित कर कार्रवाई की जाएगी।
- 2025 तक इन डूब क्षेत्रों में किसी भी तरह की रजिस्ट्री या नया निर्माण प्रतिबंधित रहेगा।
प्रभावित गांवों की सूची
रजिस्ट्री और निर्माण पर रोक वाले गांव –
- मुंडेरा कला
- अजनवा
- अमहिया
- भटहट
- समधनवा
- मुंडेरा खुर्द
- सरेया
- रानीडीहा
- झंगहा
- सिधारी
- पिपरी
- उचवा
- नचनी
- अन्य प्रभावित क्षेत्र
निष्कर्ष
यह खबर साफ करती है कि गोरखपुर में धंधेबाजों ने कानून और प्रशासन की अनदेखी करते हुए राप्ती नदी के किनारे प्लॉटिंग और निर्माण का धंधा शुरू कर दिया। प्रशासन ने रोक तो लगाई, मगर उससे पहले ही बड़े पैमाने पर जमीन बेची जा चुकी है। अब खरीदार मकान-दुकान खड़ी कर रहे हैं, जिससे बाढ़ का खतरा और बढ़ जाएगा। प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर कुछ निर्माण ध्वस्त किए हैं, लेकिन असली चुनौती है कि आगे भी ऐसे अवैध कब्जों को कैसे रोका जाए।
