गोरखपुर में साइबर ठगी
उत्तर प्रदेश के Gorakhpur में साइबर ठगी का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां जालसाजों ने “डिजिटल अरेस्ट” का डर दिखाकर एक रिटायर्ड कर्मचारी से 5.50 लाख रुपये ठग लिए। मामला राजघाट थाना क्षेत्र का है, जहां पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
कैसे रचा गया पूरा जाल
हांसूपुर निवासी रुपेश कुमार श्रीवास्तव के मुताबिक, 15 अप्रैल की सुबह उनके व्हाट्सएप पर वीडियो कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को एटीएस (एंटी टेररिज्म स्क्वाड) का अधिकारी बताया और दावा किया कि उनके बैंक खाते में किसी आतंकी से जुड़े पैसे आए हैं, जिनकी जांच करनी है।
जालसाज ने उन्हें लगातार वीडियो कॉल पर बने रहने के लिए कहा और
आधार कार्ड, पैन कार्ड व पासबुक दिखाने को कहा।
‘जांच’ के नाम पर पैसे ट्रांसफर
पासबुक में 5.80 लाख रुपये की जानकारी मिलने के बाद आरोपी ने “जांच प्रक्रिया” का
हवाला देकर 5.50 लाख रुपये अपने जयपुर स्थित खाते में ट्रांसफर करने को कहा।
उसने भरोसा दिलाया कि जांच पूरी होने के बाद पैसा वापस कर दिया जाएगा। डर के कारण पीड़ित उसी दिन
एसबीआई शाखा पहुंचा और आरटीजीएस के जरिए रकम ट्रांसफर कर दी।
लगातार वीडियो कॉल से बनाया दबाव
ठगी के बाद भी आरोपी हर दो घंटे पर वीडियो कॉल कर “रिपोर्ट” मांगता रहा,
जिससे पीड़ित मानसिक दबाव में बना रहा।
अगले दिन जब उन्होंने परिजनों को जानकारी दी, तब उन्हें ठगी का एहसास हुआ।
पुलिस और साइबर हेल्पलाइन में शिकायत
परिवार के कहने पर पीड़ित ने साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई और
बाद में राजघाट थाने में तहरीर दी।
पुलिस अब मामले की जांच कर रही है और आरोपी की तलाश जारी है।
क्या है ‘डिजिटल अरेस्ट’ ठगी
साइबर अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई या एटीएस अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं और
कहते हैं कि उनके खिलाफ गंभीर केस दर्ज है।
इसके बाद वे वीडियो कॉल के जरिए उन्हें “नजरबंद” जैसा माहौल बनाकर पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर करते हैं।
बचाव के जरूरी उपाय
किसी भी अनजान कॉल पर अपनी निजी
जानकारी साझा न करें
कोई भी सरकारी एजेंसी
वीडियो कॉल पर पैसे ट्रांसफर नहीं कराती
डराने-धमकाने वाले
कॉल्स को तुरंत काटें
संदेह होने पर 1930 हेल्पलाइन पर
तुरंत शिकायत करें
डिजिटल अरेस्ट जैसी ठगी तेजी से बढ़ रही है और आम लोगों को निशाना बना रही है।
जागरूकता ही इससे बचने का सबसे बड़ा उपाय है।
