यूपी सरकार ने महिला आरक्षण मुद्दे
उत्तर प्रदेश की राजनीति में महिला आरक्षण को लेकर माहौल गरमा गया है। Uttar Pradesh सरकार ने इस मुद्दे पर बड़ा कदम उठाते हुए 30 अप्रैल से विधानमंडल का विशेष सत्र बुलाने का फैसला किया है।
यह निर्णय आगामी 2027 विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए अहम माना जा रहा है।
कैबिनेट ने दी मंजूरी
सरकार ने रविवार रात कैबिनेट बाई सर्कुलेशन के जरिए इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। अब इसे राज्यपाल की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा।
नियमों के अनुसार, सत्र बुलाने के लिए सदस्यों को कम से कम सात दिन पहले सूचना देना आवश्यक होता है, इसलिए यह प्रक्रिया समय से पहले शुरू की गई है।
संसद से शुरू हुआ विवाद
महिला आरक्षण से जुड़ा ‘नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक’ संसद में पारित नहीं हो सका, जिसके बाद यह मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।
विपक्ष जहां विधेयक की खामियों को गिना रहा है, वहीं सत्तारूढ़ दल विपक्ष पर
महिला सशक्तीकरण के मुद्दे को रोकने का आरोप लगा रहा है।
Yogi Adityanath का विपक्ष पर हमला
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मुद्दे पर विपक्ष पर तीखा हमला बोला।
उन्होंने कहा कि संसद में विरोधी दलों का रवैया महिला सम्मान और लोकतंत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण था।
सरकार अब इसी मुद्दे को विधानमंडल में भी प्रमुखता से उठाने की तैयारी कर रही है।
विशेष सत्र में क्या होगा
सूत्रों के अनुसार, 30 अप्रैल को होने वाले सत्र में:
सरकार महिला आरक्षण पर अपनी स्थिति स्पष्ट करेगी
विपक्ष के रवैये पर तीखी बहस होगी
संभव है कि निंदा प्रस्ताव भी लाया जाए
यह सत्र केवल विधायी कार्यवाही तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राजनीतिक टकराव का बड़ा मंच बन सकता है।
चुनावी रणनीति का हिस्सा
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति का हिस्सा है।
महिला आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे के जरिए दोनों
पक्ष जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।
महिला आरक्षण को लेकर उत्तर प्रदेश में शुरू हुआ
यह सियासी घमासान आने वाले समय में और तेज हो सकता है।
30 अप्रैल का विशेष सत्र न सिर्फ कानून बनाने का मंच होगा,
बल्कि राजनीतिक ताकत दिखाने का भी बड़ा अवसर बनेगा।
