गोरखपुर के सेंट एंड्रयूज कॉलेज में
उत्तर प्रदेश के Gorakhpur स्थित St. Andrew’s College में धर्मांतरण को लेकर लगे आरोपों ने अचानक हलचल पैदा कर दी। कॉलेज के लगभग 30 शिक्षकों और कर्मचारियों पर दबाव बनाने के आरोप सामने आए, जिसके बाद जांच के लिए टीम भेजी गई।
हालांकि जांच पूरी होने के बाद ये आरोप निराधार पाए गए और मामला फर्जी शिकायत का निकला।
जांच के लिए गठित हुई समिति
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी Udaybhan द्वारा दो सदस्यीय जांच समिति गठित की गई।
यह मामला Deen Dayal Upadhyaya Gorakhpur University प्रशासन के पास पहुंचा था, जिसके बाद इसे जांच के लिए आगे भेजा गया।
कॉलेज पहुंची टीम, मचा हड़कंप
सोमवार सुबह करीब 10:30 बजे जांच समिति कॉलेज पहुंची। टीम के पहुंचते ही कॉलेज परिसर में हड़कंप मच गया।
समिति ने आरोपों से जुड़े सभी पहलुओं की गहन जांच की और संबंधित लोगों से पूछताछ की।
शिकायतों में सामने आई सच्चाई
जांच के दौरान यह पता चला कि शिकायत में दिए गए मोबाइल नंबर और नाम संदिग्ध थे।
एक नंबर पर संपर्क करने पर पता चला कि वह कॉलेज की एक महिला कर्मचारी का है, जिन्होंने स्पष्ट किया कि उनके नाम और नंबर का दुरुपयोग किया गया है।
दूसरे शिकायतकर्ता का भी कोई स्पष्ट अस्तित्व सामने नहीं आया और संबंधित नंबर कॉलेज की ही एक शिक्षिका का निकला, जिन्होंने किसी शिकायत से इनकार किया।
शिक्षकों ने आरोपों को किया खारिज
जिन 30 शिक्षकों और कर्मचारियों के खिलाफ आरोप लगाए गए थे, वे भी जांच समिति के सामने पेश हुए। सभी ने आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया और इसे साजिश बताया।
जांच समिति ने सभी बिंदुओं की जांच के बाद पाया कि आरोपों का कोई ठोस आधार नहीं है।
कॉलेज प्रशासन का बयान
कॉलेज के प्राचार्य प्रो. एसडी राजकुमार ने कहा कि संस्थान की
छवि खराब करने के उद्देश्य से यह फर्जी शिकायत की गई थी।
उन्होंने मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सच्चाई पूरी तरह सामने आ सके।
गोरखपुर के सेंट एंड्रयूज कॉलेज में धर्मांतरण के आरोपों का मामला जांच के बाद फर्जी साबित हुआ है।
यह घटना दिखाती है कि बिना पुष्टि के फैलाई गई सूचनाएं कैसे बड़े विवाद का रूप ले सकती हैं।
अब इस पूरे मामले में यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर इस तरह की
फर्जी शिकायत के पीछे कौन है और उसका उद्देश्य क्या था।
