देवरिया में नदी किनारे
नदी किनारे बने गहरे गड्ढों से बढ़ रहा खतरा
उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में नदियों के किनारे बने गहरे गड्ढे अब लोगों के लिए “मौत के कुएं” साबित हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई गड्ढे इतने गहरे और खतरनाक हैं कि उनमें गिरने के बाद लोगों के शव तक नहीं मिल पाते। बरसात और बाढ़ के मौसम में यह खतरा और ज्यादा बढ़ जाता है।
ग्रामीणों के अनुसार नदी किनारे कटान, अवैध मिट्टी खनन और तेज जलधारा की वजह से ऐसे गहरे कुएं जैसे गड्ढे बन गए हैं, जिनमें कई हादसे हो चुके हैं।
बरसात में और खतरनाक हो जाते हैं ये गड्ढे
विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश और बाढ़ के दौरान नदी का बहाव तेज हो जाता है। इससे किनारों की मिट्टी कटती रहती है और कई जगह गहरे जलकुंड बन जाते हैं।
देवरिया में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन पहले भी अलर्ट जारी कर चुका है और तटबंधों व नदी किनारों की निगरानी के निर्देश दिए गए थे।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार सामान्य दिखने वाला पानी अंदर से बेहद गहरा होता है, जिससे लोग हादसे का शिकार हो जाते हैं।
कई हादसों के बाद भी नहीं बढ़ी सुरक्षा
ग्रामीणों का आरोप है कि कई जगहों पर चेतावनी बोर्ड तक नहीं लगाए गए हैं। बच्चे और ग्रामीण रोज नदी किनारे जाते हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं दिखाई देती।
देवरिया और आसपास के इलाकों में पहले भी पानी भरे गड्ढों और तालाबों में डूबने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
“शव तक नहीं मिलते” — ग्रामीणों का दावा
स्थानीय लोगों के अनुसार कुछ गड्ढे इतने गहरे हैं कि उनमें गिरने वालों का
शव कई दिनों तक नहीं मिल पाता। कुछ मामलों में गोताखोरों को घंटों तलाश करनी पड़ती है।
ग्रामीणों का कहना है कि नदी के अंदर बने ये गहरे जलकुंड ऊपर से सामान्य दिखाई देते हैं,
लेकिन अंदर उनकी गहराई बेहद ज्यादा होती है।
अवैध खनन और कटान पर उठे सवाल
विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का मानना है कि अवैध मिट्टी खनन और लगातार हो रहे
नदी कटान ने समस्या को और गंभीर बना दिया है।
नदी किनारे बड़े पैमाने पर मिट्टी हटने से
जमीन कमजोर होती जा रही है और गहरे गड्ढे बनते जा रहे हैं।
बच्चों और मवेशियों के लिए सबसे बड़ा खतरा
ग्रामीण इलाकों में बच्चे अक्सर नदी किनारे खेलने या नहाने चले जाते हैं।
कई बार मवेशी भी पानी पीने के दौरान इन गड्ढों में फंस जाते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते सुरक्षा उपाय नहीं किए गए तो
भविष्य में और बड़े हादसे हो सकते हैं।
प्रशासन से कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से नदी किनारों पर चेतावनी बोर्ड लगाने,
खतरनाक स्थानों की घेराबंदी करने और अवैध खनन रोकने की मांग की है।
कुछ लोगों ने यह भी मांग की है कि संवेदनशील क्षेत्रों में SDRF और गोताखोर टीमों की निगरानी बढ़ाई जाए।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरें
देवरिया की नदियों किनारे बने इन “मौत के कुओं” की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर
तेजी से वायरल हो रहे हैं। लोग प्रशासनिक लापरवाही और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं।
विशेषज्ञों ने दी चेतावनी
जल विशेषज्ञों का कहना है कि नदी किनारे बने गहरे जलकुंड बेहद खतरनाक होते हैं।
बरसात के मौसम में इनकी पहचान करना मुश्किल हो जाता है।
उन्होंने लोगों से अपील की है कि बिना जानकारी के नदी किनारे गहरे पानी में न जाएं।
देवरिया में नदियों किनारे बने “मौत के कुएं” अब ग्रामीणों के लिए बड़ी चिंता बन चुके हैं।
कई जगह गहरे जलकुंड और कटान हादसों की वजह बन रहे हैं।
अगर समय रहते सुरक्षा और निगरानी नहीं बढ़ाई गई तो आने
वाले बरसात के मौसम में खतरा और ज्यादा बढ़ सकता है।
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