गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज
BRD Medical College के ऑडिटोरियम नवीनीकरण मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में माना है कि ऑडिटोरियम में मानकों के विपरीत निम्न गुणवत्ता की कुर्सियां लगाई गई हैं, जबकि इन पर करीब सवा करोड़ रुपये खर्च किए गए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए कॉलेज प्रशासन ने जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी है। साथ ही कार्यदायी संस्था को निर्देश दिया गया है कि टेंडर में तय मानकों के अनुसार ब्रांडेड कुर्सियां दोबारा लगाई जाएं।
आठ करोड़ की परियोजना पर उठे सवाल
जानकारी के अनुसार ऑडिटोरियम के नवीनीकरण के लिए शासन ने करीब आठ करोड़ रुपये की परियोजना स्वीकृत की थी। इस कार्य की जिम्मेदारी UPSIDCO को दी गई थी।
परियोजना में उच्च गुणवत्ता वाली ब्रांडेड कुर्सियां लगाने का प्रावधान था, लेकिन आरोप है कि इसके बजाय स्थानीय स्तर की कम गुणवत्ता वाली कुर्सियां लगा दी गईं।
जांच समिति ने क्या पाया?
जांच समिति की रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि लगाए गए फर्नीचर और कुर्सियां तय मानकों के अनुरूप नहीं हैं। रिपोर्ट सामने आने के बाद कॉलेज प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया है।
प्राचार्य Dr. Ramkumar Jaiswal ने कार्यदायी संस्था को पत्र भेजकर जल्द सुधार करने और मानक के अनुसार नई कुर्सियां लगाने के निर्देश दिए हैं।
शिकायत के बाद शुरू हुई जांच
इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब नेहरू अस्पताल की एसआईसी Dr. Kanchan Srivastava ने 31 मार्च को प्राचार्य को पत्र लिखकर अनियमितता की जांच की मांग की।
इसके बाद कॉलेज प्रशासन ने जांच समिति गठित की, जिसने निरीक्षण के बाद अपनी रिपोर्ट सौंपी।
रिपोर्ट में गुणवत्ता से समझौता किए जाने की पुष्टि की गई है।
बड़े कार्यक्रमों में इस्तेमाल हो चुका ऑडिटोरियम
हैरानी की बात यह है कि कुर्सियां लगाए जाने के बाद ऑडिटोरियम में
कई बड़े कार्यक्रम और राष्ट्रीय स्तर की कॉन्फ्रेंस आयोजित हो चुकी हैं।
अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतनी बड़ी परियोजना में गुणवत्ता जांच कैसे नजरअंदाज हो गई।
राजनीतिक गलियारों में भी बढ़ी हलचल
मामले के सामने आने के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। कांग्रेस नेताओं ने
इस प्रकरण को भ्रष्टाचार का बड़ा उदाहरण बताते हुए प्रशासन पर सवाल उठाए हैं।
विपक्ष का आरोप है कि मामले में सख्त कार्रवाई के बजाय केवल औपचारिक
निर्देश देकर विवाद को शांत करने की कोशिश की जा रही है।
क्या बोले प्राचार्य?
प्राचार्य डॉ. रामकुमार जायसवाल ने कहा कि पूरे मामले की जानकारी उच्च अधिकारियों को भेज दी गई है।
उन्होंने बताया कि कार्यदायी संस्था को मानकों के अनुसार कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
कॉलेज प्रशासन का कहना है कि गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
लोगों के बीच उठ रहे सवाल
इस मामले के बाद लोग पूछ रहे हैं:
- करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद घटिया सामग्री कैसे लगी?
- गुणवत्ता जांच में लापरवाही किसकी थी?
- क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी?
- क्या अन्य निर्माण कार्यों की भी जांच होगी?
बीआरडी मेडिकल कॉलेज ऑडिटोरियम विवाद ने सरकारी परियोजनाओं में गुणवत्ता और
पारदर्शिता को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच समिति की
रिपोर्ट के बाद अब सभी की नजर इस बात पर है कि दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है और
क्या ऑडिटोरियम में दोबारा मानक के अनुसार काम कराया जाएगा।
