आगरा धर्मांतरण मामले में
उत्तर प्रदेश के आगरा में सामने आए कथित धर्मांतरण गैंग के मामले में अब एक नया मोड़ आ गया है। आगरा की दो बहनों के मामले के बाद अब राजस्थान की एक सीए छात्रा सामने आई है, जिसने गिरोह पर ब्रेनवॉश कर फंसाने का आरोप लगाया है।
करीब नौ महीने बाद सामने आई इस पीड़िता के बयान ने मामले को और गंभीर बना दिया है।
नौ महीने बाद क्यों सामने आई छात्रा
पुलिस के अनुसार, जब गिरोह का खुलासा हुआ और कई आरोपियों की गिरफ्तारी हुई, तब यह छात्रा पूरी तरह सुरक्षित हो गई। इसके बाद उसने सामने आकर अपनी आपबीती बताने का फैसला किया।
छात्रा का कहना है कि उसे सोशल मीडिया के जरिए संपर्क कर धीरे-धीरे अपने प्रभाव में लिया गया और उसका ब्रेनवॉश किया गया।
कैसे फंसाया गया जाल में
पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरोह सोशल मीडिया के जरिए युवतियों को निशाना बनाता था। राजस्थान के डीडवाना कुचामन की रहने वाली यह छात्रा भी इसी तरीके से संपर्क में आई।
गिरफ्तार आरोपी गोवा की आयशा ने उससे दोस्ती की और धीरे-धीरे उसे अपने जाल में फंसा लिया। आरोप है कि छात्रा के खाते में पैसे भी ट्रांसफर किए गए और उसे मानसिक रूप से प्रभावित करने की कोशिश की गई।
दिल्ली से कोलकाता भेजने की थी तैयारी
पुलिस के मुताबिक छात्रा को जयपुर से दिल्ली लाकर आगे कोलकाता भेजने की योजना थी। वहां उसे धर्मांतरण की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता।
लेकिन समय रहते पुलिस ने गिरोह का पर्दाफाश कर दिया,
जिससे छात्रा इस जाल में पूरी तरह फंसने से बच गई।
आगरा की दो बहनों का मामला
इससे पहले आगरा के सदर थाना क्षेत्र की दो सगी बहनों का मामला सामने आया था,
जिनका कथित अपहरण कर उन्हें कोलकाता ले जाया गया था।
पुलिस ने जुलाई 2025 में छह राज्यों में एक साथ दबिश देकर 14 आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
दोनों बहनों को कोलकाता के तपसिया इलाके से मुक्त कराया गया था।
जांच में सामने आया था कि उन्हें कश्मीरी युवतियों के जरिए फंसाया गया और उनका ब्रेनवॉश किया गया।
पुलिस की जांच जारी
मामले में पुलिस लगातार जांच कर रही है। एडीसीपी पश्चिमी जोन आदित्य सिंह के अनुसार आरोपियों के
मोबाइल फोन और सोशल मीडिया अकाउंट की गहन जांच की जा रही है।
इसके जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि गिरोह किन-किन लोगों को
निशाना बना रहा था और इसका नेटवर्क कितना बड़ा है।
सख्त कार्रवाई की मांग
राजस्थान की छात्रा ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उसके परिजनों का भी कहना है कि
ऐसे गिरोह समाज के लिए खतरनाक हैं और इनके खिलाफ कठोर कदम उठाए जाने चाहिए।
इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को
कैसे निशाना बनाया जा रहा है और इससे बचाव के लिए क्या कदम जरूरी हैं।
आगरा से शुरू हुआ यह मामला अब कई राज्यों तक फैल चुका है और लगातार नए खुलासे हो रहे हैं।
राजस्थान की छात्रा के सामने आने से यह स्पष्ट हो गया है कि गिरोह का नेटवर्क व्यापक था।
पुलिस की कार्रवाई से कई लोगों को समय रहते बचाया जा सका,
लेकिन यह घटना समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी भी है कि
ऑनलाइन संपर्क और अनजान रिश्तों को लेकर सतर्क रहना बेहद जरूरी है।
