लखीमपुर खीरी में
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में मंगलवार शाम बड़ा बवाल हो गया। बांकेगंज इलाके के मोतीपुर गांव में आंबेडकर जयंती के दौरान डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा क्षतिग्रस्त होने की खबर के बाद स्थिति हिंसक हो गई। देखते ही देखते आक्रोशित भीड़ ने सड़क जाम कर दिया और पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया।
कैसे भड़का पूरा मामला
मोतीपुर गांव में जयंती के मौके पर माल्यार्पण के बाद जुलूस निकाला जा रहा था। इसी दौरान शाम करीब चार बजे प्रतिमा हटाने या तोड़े जाने की सूचना फैल गई।
इस खबर के बाद ग्रामीणों में गुस्सा भड़क गया
लोगों ने सड़क जाम कर प्रदर्शन शुरू कर दिया
महिलाओं ने भी बड़ी संख्या में विरोध में हिस्सा लिया
सड़क जाम और बढ़ता तनाव
प्रदर्शनकारियों ने बांकेगंज-कुकरा मार्ग पर धरना देकर रास्ता रोक दिया।
करीब चार घंटे तक लंबा जाम लगा रहा
दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं
स्थिति धीरे-धीरे तनावपूर्ण होती चली गई
पुलिस पर हमला और हिंसा
हालात तब बिगड़े जब भीड़ ने पुलिस पर हमला शुरू कर दिया।
करीब 500 से ज्यादा उपद्रवी मौके पर मौजूद थे
वहीं सिर्फ 35 से 40 पुलिसकर्मी स्थिति संभाल रहे थे
छतों और सड़कों से लगातार पथराव हुआ
उत्तर प्रदेश पुलिस के कई जवान इस पथराव में घायल हो गए, जिनमें मैलानी थानाध्यक्ष भी शामिल हैं।
आगजनी और तोड़फोड़
उपद्रवियों ने हिंसा को और बढ़ाते हुए सरकारी संपत्ति को निशाना बनाया।
सीओ गोला रमेश तिवारी और नायब तहसीलदार की गाड़ियां क्षतिग्रस्त की गईं
वाहनों को पलट दिया गया
दो सरकारी गाड़ियों में आग लगा दी गई
इस दौरान पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया।
रात में भी जारी रहा बवाल
रात होने के बाद भी हालात सामान्य नहीं हुए।
अंधेरे का फायदा उठाकर फिर पथराव किया गया
कई वाहनों में तोड़फोड़ जारी रही
पुलिस को सुरक्षित स्थान तलाशना पड़ा
बाजार बंद, लोग घरों में कैद
घटना के बाद आसपास के इलाकों में भय का माहौल फैल गया।
बांकेगंज कस्बे में दुकानों को बंद कर दिया गया
लोग अपने घरों में रहने को मजबूर हो गए
इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया
प्रशासन की कार्रवाई
घटना की जानकारी मिलते ही कई थानों की पुलिस मौके पर पहुंची।
हालात को काबू करने के लिए बल प्रयोग किया गया
उपद्रवियों की पहचान के लिए जांच शुरू
दोषियों पर सख्त
कार्रवाई की बात कही गई
लखीमपुर खीरी की यह घटना बताती है कि संवेदनशील मुद्दों पर छोटी सी चिंगारी भी
बड़े बवाल में बदल सकती है। प्रशासन के लिए यह कानून-व्यवस्था की
बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है। अब नजर इस बात पर है कि हालात कितनी
जल्दी पूरी तरह सामान्य होते हैं और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है।
