613 करोड़ की साइबर ठगी का महाघोटाला!
भारत में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराधों के बीच पुलिस और जांच एजेंसियों ने एक बेहद बड़े डिजिटल फ्रॉड नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। इस हाईटेक साइबर गिरोह ने कथित तौर पर करीब 613 करोड़ रुपये की ऑनलाइन ठगी को अंजाम दिया। मामले में अब तक 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि कई अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरे नेटवर्क का कथित मास्टरमाइंड केवल 8वीं पास बताया जा रहा है।
फर्जी बैंक खातों से चल रहा था करोड़ों का खेल
जांच एजेंसियों के मुताबिक आरोपी फर्जी दस्तावेजों की मदद से बैंक खाते खुलवाते थे और उन्हीं खातों के जरिए ठगी की रकम को इधर-उधर ट्रांसफर किया जाता था। गिरोह ने अलग-अलग राज्यों में एजेंट तैयार कर रखे थे जो लोगों से किराए पर बैंक खाते और सिम कार्ड लेते थे। इन खातों में ऑनलाइन ठगी से जुटाए गए करोड़ों रुपये जमा किए जाते थे और फिर रकम को कई हिस्सों में बांटकर गायब कर दिया जाता था।
पुलिस ने छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में एटीएम कार्ड, मोबाइल फोन, लैपटॉप, फर्जी दस्तावेज और सैकड़ों सिम कार्ड बरामद किए हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह नेटवर्क बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था।
सोशल मीडिया और कॉल सेंटर बना ठगी का हथियार
जांच में सामने आया है कि यह गिरोह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, फर्जी वेबसाइट और नकली कॉल सेंटर के जरिए लोगों को निशाना बनाता था। किसी को आसान लोन दिलाने का झांसा दिया जाता था तो किसी को ऑनलाइन ट्रेडिंग और निवेश में भारी मुनाफे का सपना दिखाया जाता था। कई लोगों को नौकरी दिलाने के नाम पर भी ठगा गया।
जैसे ही पीड़ित पैसे ट्रांसफर करते थे, आरोपी तुरंत रकम को अलग-अलग खातों में भेज देते थे ताकि पुलिस ट्रांजैक्शन ट्रैक न कर सके। यही वजह है कि इस नेटवर्क को पकड़ने में जांच एजेंसियों को काफी समय लगा।
8वीं पास युवक ने बनाया हाईटेक नेटवर्क
कम पढ़ाई लेकिन दिमाग इतना तेज कि पुलिस भी रह गई हैरान
इस मामले में सबसे ज्यादा चर्चा उस आरोपी की हो रही है जिसे गिरोह का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार आरोपी केवल 8वीं पास है, लेकिन उसने तकनीकी जानकारी रखने वाले लोगों के साथ मिलकर साइबर ठगी का बेहद मजबूत नेटवर्क तैयार कर लिया था।
आरोपी डिजिटल पेमेंट सिस्टम, ऑनलाइन बैंकिंग और मोबाइल एप्स की कमजोरियों का फायदा उठाकर करोड़ों रुपये की ठगी को अंजाम देता था। पुलिस का कहना है कि आरोपी ने कम पढ़ाई के बावजूद तकनीक का गलत इस्तेमाल करके बड़ा अपराध खड़ा कर दिया।
देशभर में फैला था साइबर गैंग
जांच एजेंसियों का मानना है कि यह गिरोह केवल एक राज्य तक सीमित नहीं था बल्कि देश के
कई हिस्सों में सक्रिय था। कई राज्यों की पुलिस अब इस मामले में जांच कर रही है।
संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
पुलिस अब बैंक खातों, ऑनलाइन ट्रांजैक्शन और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर रही है ताकि
यह पता लगाया जा सके कि इस ठगी नेटवर्क से और कौन-कौन लोग जुड़े हुए थे।
साइबर एक्सपर्ट्स ने जारी किया बड़ा अलर्ट
विशेषज्ञों का कहना है कि आज के डिजिटल दौर में साइबर अपराधी नए-नए तरीके
अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करना, ओटीपी साझा करना या
बिना जांच किए निवेश करना भारी नुकसान का कारण बन सकता है।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध कॉल,
मैसेज या ऑनलाइन ऑफर से सतर्क रहें। अगर किसी प्रकार की
साइबर ठगी होती है तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।
इंटरनेट की दुनिया में सावधानी ही सबसे बड़ी सुरक्षा
613 करोड़ रुपये की इस साइबर ठगी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि ऑनलाइन दुनिया में छोटी सी
लापरवाही भी भारी नुकसान पहुंचा सकती है। सरकार और साइबर एजेंसियां लगातार कार्रवाई कर रही हैं,
लोगों की जागरूकता सबसे बड़ा हथियार मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत पासवर्ड, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन और
सतर्क इंटरनेट इस्तेमाल जैसी आदतें अपनाकर ही ऐसे बड़े साइबर फ्रॉड से बचा जा सकता है।
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