अंतिम नौ कार्य दिवसों में लोकसभा में 12, तो राज्यसभा में 15 विधेयक पारित
एमएसआईआर और धनखड़ के अचानक इस्तीफे पर पूरे सत्र में हुआ सियासी संग्राम
मानसून सत्र स्थगित… हंगामे से संसद के
अंतिम नौ कार्य दिवसों में लोकसभा में 12, तो राज्यसभा में 15 विधेयक पारित
एमएसआईआर और धनखड़ के अचानक इस्तीफे पर पूरे सत्र में हुआ सियासी संग्राम
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। ऑपरेशन सिंधु से लेकर बिहार में मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (एमएसआईआर) पर हुए हंगामे के साथ संसद का मानसून सत्र गुरुवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। यह सत्र सरकार और विपक्ष के बीच लगातार टकराव, अंतिम दो सप्ताह में शोरगुल में निपटाए गए विधेयकों और उपराष्ट्रपति पद से अचानक इस्तीफा और जस्टिस यशवंत धनखड़ के नामांकन प्रस्ताव की प्रक्रिया शुरू करने के कारण चर्चा में रहा। एमएसआईआर पर विपक्ष के हंगामे के चलते लोकसभा के 166 घंटे बाधित हुए। इससे जनता के टैक्स के करीब 248 करोड़ रुपये डूब गए।
विशेष चर्चा के बाद ऑपरेशन सिंधु मामले में टकराव लगा, मगर एमएसआईआर को लेकर सियासी संग्राम अंतिम दिन तक जारी रहा। हंगामे के कारण लोकसभा के 84.5 घंटे और राज्यसभा के 81.12 घंटे बाधित हुए। संसद की कुल कार्यवाही 38.88 घंटे ही चल सकी। दोनों सदनों की कार्यवाही की प्रति मिनट की लागत करीब 2.5 लाख रुपये बैठती है यानी एक घंटे का खर्च लगभग 1.5 करोड़ रुपये बैठता है। इससे लोकसभा में कार्यवाही नहीं चलने से 126 करोड़ रुपये और राज्यसभा में करीब 122 करोड़ रुपये बर्बाद हुए।
हालांकि, अंतिम नौ कार्य दिवसों में ताबड़तोड़ विधायी कामकाज निपटाए गए। राज्यसभा में 15 तो लोकसभा में 12 विधेयक पारित किए गए।
बिना चर्चा पारित हुए सभी विधेयक
सत्र के अंतिम दो सप्ताह में सरकार विधायी कामकाज निपटाने के मामले में हड़बड़ी में दिखी। दोनों सदनों में 27 विधेयक पारित हुए। हालांकि, विपक्ष के हंगामे के बीच सभी विधेयक या तो बिना किसी चर्चा के या चर्चा की औपचारिकता निभाकर पारित कर दिए गए। इसके अतिरिक्त कार्यक्रम पर विशेष चर्चा में भी विपक्ष ने हिस्सा नहीं लिया और यह चर्चा अधूरी रही।
