वाराणसी में बुजुर्गों से 12 करोड़ की ठगी का दावा, रिटायर्ड नौसेना अधिकारी से प्रोफेसर-डॉक्टर तक बने निशाना

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में बुजुर्गों को निशाना बनाकर साइबर और वित्तीय ठगी का गंभीर मामला सामने आया है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार करीब दो वर्षों के दौरान अलग-अलग मामलों में बुजुर्ग लोगों से लगभग 12 करोड़ रुपये की ठगी किए जाने की बात सामने आई है। ठगी के शिकार लोगों में सेवानिवृत्त नौसेना अधिकारी, प्रोफेसर और डॉक्टर जैसे पढ़े-लिखे और अनुभवी लोग भी शामिल बताए गए हैं।

यह घटनाक्रम दिखाता है कि ऑनलाइन ठगी करने वाले गिरोह अब केवल तकनीकी जानकारी से अनजान लोगों को ही निशाना नहीं बना रहे, बल्कि आर्थिक रूप से सक्षम और शिक्षित लोगों को भी अलग-अलग तरीकों से जाल में फंसा रहे हैं।

बुजुर्गों को अलग-अलग तरीके से बनाया गया निशाना

रिपोर्ट के अनुसार ठगी के मामलों में आरोपियों ने अलग-अलग बहानों और डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल किया। कहीं निवेश में अधिक मुनाफे का लालच दिया गया तो कहीं सरकारी विभाग, बैंक या जांच एजेंसी से जुड़े होने का दावा कर लोगों पर दबाव बनाया गया।

बुजुर्गों को फोन, मैसेज या ऑनलाइन संपर्क के जरिए विश्वास में लेने के बाद उनसे पैसे ट्रांसफर कराने की कोशिश की गई। कुछ मामलों में लगातार संपर्क बनाए रखकर पीड़ितों को मानसिक दबाव में रखने की बात भी सामने आई है।

रिटायर्ड नौसेना अधिकारी भी बने शिकार

ठगी के मामलों में एक सेवानिवृत्त नौसेना अधिकारी का नाम भी सामने आया है। सरकारी सेवा से सेवानिवृत्ति के बाद जमा पूंजी और आर्थिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ऐसे लोगों को साइबर अपराधी अपने निशाने पर लेते हैं।

सेवानिवृत्त लोगों के पास जीवनभर की बचत या निवेश की रकम हो सकती है। इसी कारण साइबर ठगी करने वाले गिरोह उन्हें निवेश, बैंकिंग, टैक्स, डिजिटल सुरक्षा या किसी कथित कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर पैसे भेजने के लिए मजबूर करने की कोशिश कर सकते हैं।

प्रोफेसर और डॉक्टर भी ठगी से नहीं बच पाए

इस मामले में प्रोफेसर और डॉक्टर जैसे पेशेवर लोगों के भी ठगी का शिकार होने की जानकारी सामने आई है। इससे स्पष्ट होता है कि साइबर अपराध का खतरा केवल कम पढ़े-लिखे या तकनीकी जानकारी से दूर लोगों तक सीमित नहीं है।

ऑनलाइन अपराध में अक्सर तकनीकी ज्ञान से ज्यादा महत्वपूर्ण विश्वास पैदा करना और सामने वाले को जल्द निर्णय लेने के लिए मजबूर करना होता है। यही वजह है कि किसी अनजान कॉल, लिंक या निवेश प्रस्ताव पर तुरंत प्रतिक्रिया देना जोखिम भरा हो सकता है।

करोड़ों रुपये की ठगी ने बढ़ाई चिंता

करीब दो वर्षों में लगभग 12 करोड़ रुपये की ठगी का आंकड़ा सामने आने से वाराणसी में बुजुर्गों की साइबर सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है। ऐसे मामलों में एक ही व्यक्ति से बड़ी रकम ठगे जाने के साथ कई छोटे-बड़े मामलों को जोड़ने पर कुल नुकसान काफी अधिक हो सकता है।

पुलिस और साइबर अपराध से जुड़े अधिकारी ऐसे मामलों में बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, डिजिटल लेनदेन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच करते हैं।

साइबर ठगी में बढ़ रहे नए तरीके

आजकल साइबर अपराधी लोगों को फंसाने के लिए कई तरह की रणनीतियां अपनाते हैं। इनमें फर्जी निवेश योजना, बैंक खाता बंद होने का डर, डिजिटल गिरफ्तारी जैसी धमकियां, फर्जी सरकारी अधिकारी बनकर फोन करना और ऑनलाइन ट्रेडिंग से बड़े मुनाफे का लालच शामिल हो सकता है।

इनमें से किसी भी स्थिति में फोन करने वाले व्यक्ति की पहचान केवल उसकी बातों के

आधार पर तय नहीं की जानी चाहिए। बैंक या सरकारी एजेंसी से संबंधित होने का दावा करने वाले

व्यक्ति को भी आधिकारिक माध्यम से सत्यापित करना जरूरी है।

बुजुर्गों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

साइबर ठगी से बचने के लिए खास तौर पर बुजुर्गों को कुछ सावधानियां अपनानी चाहिए।

  • किसी अनजान व्यक्ति को OTP, PIN या पासवर्ड न बताएं।
  • बैंक खाते की जानकारी फोन पर साझा न करें।
  • अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें।
  • अचानक मिलने वाले निवेश प्रस्ताव पर तुरंत पैसा न लगाएं।
  • किसी अधिकारी के नाम से धमकी मिलने पर पहले संबंधित विभाग से सीधे संपर्क करें।
  • स्क्रीन शेयरिंग या रिमोट एक्सेस देने से पहले पूरी तरह सत्यापन करें।
  • बड़ी रकम ट्रांसफर करने से पहले परिवार के विश्वसनीय सदस्य से सलाह लें।
  • ठगी होने पर तुरंत बैंक और साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें।

ठगी होने पर तुरंत कार्रवाई जरूरी

साइबर अपराध में समय बहुत महत्वपूर्ण होता है। यदि किसी व्यक्ति के खाते से

धोखाधड़ी के जरिए रकम चली जाती है तो उसे देर किए बिना

बैंक को सूचना देनी चाहिए और साइबर अपराध की शिकायत दर्ज करनी चाहिए।

जल्दी शिकायत करने से संबंधित लेनदेन को रोकने या रकम की आगे की आवाजाही पर कार्रवाई की

संभावना बढ़ सकती है। शिकायत के समय बैंक ट्रांजेक्शन, मोबाइल नंबर, मैसेज, स्क्रीनशॉट और

अन्य डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखना भी उपयोगी होता है।

परिवार के लोगों की भी जिम्मेदारी

बुजुर्गों को साइबर अपराध से बचाने में परिवार की भूमिका महत्वपूर्ण है।

परिवार के सदस्यों को समय-समय पर डिजिटल बैंकिंग, ऑनलाइन निवेश और

साइबर सुरक्षा से जुड़े सामान्य नियमों की जानकारी देनी चाहिए।

विशेष रूप से यदि कोई बुजुर्ग अचानक बड़ी रकम ट्रांसफर करने की बात करे या किसी अनजान

व्यक्ति के लगातार फोन आने की जानकारी दे, तो परिवार को स्थिति की जांच करनी चाहिए।

निष्कर्ष

वाराणसी में बुजुर्गों से करीब 12 करोड़ रुपये की ठगी का मामला साइबर

अपराध के बदलते स्वरूप को सामने लाता है। रिपोर्ट के अनुसार रिटायर्ड

नौसेना अधिकारी, प्रोफेसर और डॉक्टर जैसे लोग भी ठगी का शिकार हुए हैं।

ऐसे मामलों से बचने के लिए किसी भी अनजान कॉल,

निवेश प्रस्ताव या सरकारी कार्रवाई के नाम पर दिए जा रहे दबाव में तुरंत

पैसा ट्रांसफर नहीं करना चाहिए। संदेह होने पर आधिकारिक माध्यम से सत्यापन और

ठगी की स्थिति में तत्काल शिकायत करना सबसे जरूरी कदम है।

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