मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार चर्चा में है। कांग्रेस ने 29 सितंबर को कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की बैठक में इस मुद्दे पर अपनी आगे की रणनीति पर चर्चा की। दूसरी ओर महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने भी चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर संयुक्त रूप से अपनी बात रखी। भाजपा की ओर से विपक्ष के आरोपों पर पलटवार किया गया।
*कांग्रेस CWC की बैठक में SIR पर चर्चा
कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक 29 सितंबर को हुई। बैठक का प्रमुख मुद्दा मतदाता सूची में चल रही SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर उठाए जा रहे सवाल रहे।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बैठक में चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने CEC के तत्काल हटाए जाने की मांग की और चुनावी प्रक्रिया को लेकर प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग भी रखी। ये कांग्रेस अध्यक्ष के राजनीतिक आरोप और मांगें हैं; चुनाव आयोग और केंद्र सरकार ने विपक्ष के आरोपों को स्वीकार नहीं किया है।
ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्ष की मांग
विपक्षी दलों की ओर से ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अलग-अलग स्तर पर कार्रवाई की मांग सामने आई है। कांग्रेस सहित कुछ विपक्षी नेताओं ने उनके इस्तीफे और हटाने की मांग की है।
इस विवाद की पृष्ठभूमि में चुनाव आयोग के भीतर SIR, मतदाता सूची और संबंधित डिजिटल प्रक्रियाओं को लेकर दो चुनाव आयुक्तों की कथित आपत्तियों से जुड़ी रिपोर्ट भी है। रिपोर्टों में पिछले 10 महीनों में 14 आपत्तियां दर्ज होने की बात सामने आई है। चुनाव आयोग ने हालांकि कहा है कि अलग-अलग राय संस्थागत विचार-विमर्श का सामान्य हिस्सा हैं और उसके फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।
उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे भी साथ आए
महाराष्ट्र में शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे ने चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की।
दोनों नेताओं की पार्टियों ने 4 अक्टूबर को मुंबई में चुनाव आयोग के खिलाफ मार्च निकालने की घोषणा की है। यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दोनों दलों के बीच राजनीतिक संबंधों में लंबे समय से दूरी रही है।
सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई
ज्ञानेश कुमार से जुड़े विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी मामला पहुंचा है। रिपोर्ट के अनुसार याचिका में उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई और उनके कुछ फैसलों पर रोक लगाने जैसी मांगें की गई हैं।
अदालत में किसी मामले की सुनवाई होना अपने आप में लगाए गए आरोपों की पुष्टि नहीं माना जाता। अंतिम स्थिति न्यायिक प्रक्रिया के परिणाम पर निर्भर करेगी।
SIR को लेकर क्या है विवाद?
SIR यानी Special Intensive Revision मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया है।
इस प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची में नामों की जांच और आवश्यक संशोधन किए जाते हैं।
विपक्ष का आरोप है कि प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए हैं।
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग से प्रक्रिया में
पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों को लेकर सवाल उठाए हैं।
दूसरी ओर चुनाव आयोग ने अपने निर्णयों में किसी तरह की असहमति या संस्थागत टूट की बात को
खारिज किया है और कहा है कि आयोग के फैसले सामूहिक रूप से लिए गए हैं।
भाजपा ने विपक्ष के आरोपों पर क्या कहा?
भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन ने विपक्ष के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए
कांग्रेस पर राजनीतिक सुविधा के अनुसार चुनाव आयोग पर सवाल
उठाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस चुनाव जीतती है तो
चुनाव आयोग पर सवाल नहीं उठाए जाते, जबकि हार के बाद आयोग को जिम्मेदार ठहराया जाता है।
यह भाजपा की राजनीतिक प्रतिक्रिया है। विपक्ष इन आरोपों से सहमत नहीं है और
चुनाव आयोग की निष्पक्षता तथा SIR प्रक्रिया पर अपने सवाल लगातार उठा रहा है।
चुनाव आयोग का पक्ष भी जानना जरूरी
विवाद के बीच चुनाव आयोग ने कहा है कि संस्थान के भीतर अलग-अलग विचार या
टिप्पणियां होना निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा है। आयोग के अनुसार
SIR सहित पिछले एक वर्ष के फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
इसलिए पूरे विवाद को समझने के लिए विपक्ष के आरोपों के साथ-साथ
चुनाव आयोग के आधिकारिक पक्ष को भी देखना जरूरी है।
आगे क्या हो सकता है?
CEC ज्ञानेश कुमार को लेकर राजनीतिक गतिविधियां आने वाले दिनों में भी जारी रहने की संभावना है।
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इस मुद्दे पर
आगे की संयुक्त रणनीति बनाने की तैयारी में हैं। INDIA गठबंधन की बैठक
30 सितंबर को प्रस्तावित है, जिसमें चुनाव आयोग और केंद्र सरकार से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होनी है।
महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की ओर से घोषित 4 अक्टूबर के मार्च पर भी राजनीतिक नजरें रहेंगी।
निष्कर्ष
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विवाद अब कांग्रेस की CWC बैठक,
विपक्षी दलों की संयुक्त गतिविधियों और महाराष्ट्र की राजनीति तक पहुंच गया है। एक तरफ विपक्ष SIR और
चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठा रहा है, वहीं चुनाव आयोग
इन आरोपों को स्वीकार नहीं करता और अपनी निर्णय प्रक्रिया को संस्थागत बताता है।
भाजपा ने भी विपक्ष के आरोपों पर राजनीतिक प्रतिक्रिया दी है।
ऐसे में आगे की राजनीतिक और कानूनी कार्रवाई इस पूरे मामले की दिशा तय करेगी।
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