आंधी-तूफान और बूंदाबांदी से तबाह हुई आम की फसल
उत्तर प्रदेश में बेमौसम आंधी, तूफान और बूंदाबांदी ने आम किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। प्रदेशभर में करीब 40 से 50 फीसदी तक आम की पैदावार प्रभावित हुई है। मौसम में अचानक आए बदलाव और कीटों के हमले ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। एक तरफ किसान भारी नुकसान से परेशान हैं, वहीं दूसरी ओर कम उत्पादन के कारण इस बार आम आम लोगों की पहुंच से भी महंगा हो सकता है।
मलिहाबाद की फलपट्टी में किसानों की चिंता बढ़ी
मलिहाबाद की पहचान देशभर में आम की बेहतरीन पैदावार के लिए होती है, लेकिन इस बार यहां के बागों में मायूसी छाई हुई है। काकोरी क्षेत्र में बाग के नीचे चारपाई पर बैठे किसान अमरजीत सिंह ने बताया कि हर साल एक एकड़ में 90 से 100 क्विंटल तक आम निकलता था।
उन्होंने कहा कि यदि बाजार में आम का भाव 30 रुपये प्रति किलो भी रहता, तो करीब तीन लाख रुपये की आमदनी हो जाती थी। खर्च निकालने के बाद डेढ़ से दो लाख रुपये तक बच जाते थे, लेकिन इस बार आधी कमाई होना भी मुश्किल दिखाई दे रहा है। उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि इस बार घर की मरम्मत कराने का सपना भी अधूरा रह जाएगा।
लागत निकालना भी हुआ मुश्किल
कुसमौरा गांव के बाग मालिक विपिन मौर्य ने बताया कि उन्होंने इस बार किराये पर बाग लेकर करीब 70 लाख रुपये निवेश किए हैं। लेकिन मौसम की मार के बाद अब लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है।
उन्होंने बताया कि प्रति बीघा बाग का किराया 45 से 50 हजार रुपये तक होता है। इसके अलावा दवा छिड़काव, मजदूरी, बैग बांधने और तोड़ाई पर 30 से 35 हजार रुपये तक खर्च आता है। कुल मिलाकर प्रति बीघा करीब 80 हजार रुपये लागत बैठती है।
विपिन मौर्य ने कहा कि बौर आते ही आंधी और बारिश शुरू हो गई, जिससे फसल में रोग लग गया। अब खराब फलों को हटाकर बचे हुए आमों को बचाने की कोशिश की जा रही है।
मौसम का बदलाव बना सबसे बड़ी समस्या
करीब दस वर्षों से बागों में काम कर रहे मुनऊ बताते हैं कि पांच साल पहले भी ऐसे ही हालात बने थे। किसानों का कहना है कि इस समय आम की फसल को तेज गर्मी की जरूरत होती है, लेकिन लगातार नमी और मौसम में बदलाव ने फसल को भारी नुकसान पहुंचाया है।
स्थानीय बागवान समौर सिंह और विपिन शंकर शुक्ला का कहना है कि मौसम का
यह असंतुलन आम की खेती के लिए “जहर” साबित हो रहा है।
कीटों के हमले ने बढ़ाई परेशानी
औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र के विशेषज्ञ डॉ. सचिन आर्या के मुताबिक मौसम में
बदलाव के कारण पहले भुनगा और फिर थ्रीप्स नामक कीटों का हमला बढ़ गया।
उन्होंने बताया कि थ्रीप्स एक सूक्ष्म कीट होता है, जो आम के बौर और
नई पत्तियों को नुकसान पहुंचाता है।
इसे नियंत्रित करने के लिए इमिडाक्लोप्रिड या फिप्रोनिल जैसी दवाओं का
छिड़काव करना पड़ता है, जिससे किसानों की लागत और बढ़ गई है।
उत्तर प्रदेश में आम उत्पादन के बड़े आंकड़े
- उत्तर प्रदेश में करीब 3.25 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में आम की बागवानी होती है।
- राज्य में हर साल लगभग 61 लाख मीट्रिक टन आम का उत्पादन होता है।
- प्रदेश में 13 प्रमुख आम पट्टियां हैं।
- पिछले वर्ष आम का औसत भाव 4383 रुपये प्रति क्विंटल रहा था।
- हर साल करीब 400 मीट्रिक टन आम का निर्यात किया जाता है और इसमें लगातार बढ़ोतरी हो रही है।
आम खाने वालों की जेब पर पड़ेगा असर
विशेषज्ञों का मानना है कि उत्पादन कम होने के कारण
इस बार बाजार में आम के दाम बढ़ सकते हैं। यानी आम खाने के शौकीनों को
इस सीजन ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं। खासकर दशहरी और लंगड़ा
जैसी लोकप्रिय किस्मों की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है।
मलिहाबाद समेत पूरे उत्तर प्रदेश में बेमौसम बारिश, आंधी और कीटों के हमले ने
आम किसानों को भारी नुकसान पहुंचाया है। मौसम का लगातार बदलता
मिजाज खेती के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। यदि हालात ऐसे ही रहे, तो
आने वाले वर्षों में आम उत्पादन और किसानों की आय दोनों पर गंभीर असर पड़ सकता है।