रक्षा उत्पादन में बड़ी छलांग: चार गुना बढ़कर ₹1.8 लाख करोड़ पहुंचा उत्पादन, जबलपुर में ₹472 करोड़ की टैंक ओवरहाल सुविधा का शिलान्यास

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रक्षा उत्पादन में भारत की बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि देश का घरेलू रक्षा उत्पादन करीब चार गुना बढ़कर ₹1.8 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। इसी क्रम में जबलपुर में ₹472 करोड़ की T-72 और T-90 टैंक ओवरहाल सुविधा की आधारशिला रखी गई है। नई सुविधा में हर साल 80 टैंकों का ओवरहाल किया जा सकेगा, जिससे भारतीय सेना की परिचालन तैयारी और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

नई दिल्ली/जबलपुर। भारत के रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में लगातार तेजी देखने को मिल रही है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि देश का घरेलू रक्षा उत्पादन पिछले वर्षों में करीब चार गुना बढ़कर लगभग ₹1.8 लाख करोड़ के स्तर तक पहुंच गया है। उन्होंने इसे भारत की बढ़ती रक्षा औद्योगिक क्षमता और आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। हालिया रिपोर्टों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में घरेलू रक्षा उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा है

जबलपुर में ₹472 करोड़ की टैंक ओवरहाल सुविधा का शिलान्यास

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 27 अगस्त 2026 को मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित व्हीकल फैक्ट्री में टी-72 और टी-90 टैंकों के ओवरहाल के लिए ₹472 करोड़ की नई सुविधा की आधारशिला रखी। यह परियोजना भारत की रक्षा उत्पादन एवं सैन्य उपकरणों के रखरखाव की घरेलू क्षमता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

नई सुविधा के जरिए हर साल करीब 80 टी-72 और टी-90 टैंकों का ओवरहाल किया जा सकेगा। भारतीय सेना को प्रतिवर्ष लगभग 230 टी-सीरीज टैंकों के ओवरहाल की आवश्यकता होती है, जबकि अवाडी स्थित हेवी व्हीकल्स फैक्ट्री करीब 150 टैंकों का ओवरहाल करती है। ऐसे में जबलपुर की नई क्षमता मौजूदा कमी को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगी।

T-72 और T-90 टैंकों की परिचालन क्षमता होगी मजबूत

रक्षा मंत्री ने टैंकों को भारतीय सेना की जमीनी युद्ध क्षमता का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। आधुनिक युद्ध में ड्रोन, मिसाइल और नई तकनीकों की भूमिका बढ़ने के बावजूद T-72 और T-90 जैसे मुख्य युद्धक टैंक भारतीय थलसेना की क्षमता में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। नई ओवरहाल सुविधा से पुराने प्लेटफॉर्म को निर्धारित समय पर तकनीकी रूप से तैयार रखने में मदद मिलेगी और सेना की परिचालन तैयारी मजबूत होगी।

आत्मनिर्भर भारत और Make in India को मिलेगा बढ़ावा

जबलपुर परियोजना को केवल टैंकों के रखरखाव तक सीमित नहीं देखा जा रहा है। इससे देश में रक्षा उपकरणों की मरम्मत, रखरखाव और तकनीकी क्षमता को बढ़ावा मिलेगा। रक्षा क्षेत्र में घरेलू उत्पादन बढ़ने से विदेशी निर्भरता कम करने और भारतीय रक्षा उद्योग को मजबूत करने के सरकार के प्रयासों को गति मिलने की उम्मीद है।

राजनाथ सिंह ने रक्षा क्षेत्र में हुए बदलाव को रेखांकित करते हुए बताया कि वर्ष 2014 में देश का रक्षा उत्पादन लगभग ₹46,000 करोड़ था, जो अब करीब ₹1.8 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। यह वृद्धि देश में रक्षा निर्माण के विस्तार को दर्शाती है।

मध्य प्रदेश भी बन रहा रक्षा उत्पादन का महत्वपूर्ण केंद्र

रक्षा मंत्री ने मध्य प्रदेश की रक्षा निर्माण क्षमता का भी उल्लेख किया। जबलपुर की व्हीकल फैक्ट्री लंबे समय से सैन्य वाहनों और रक्षा उपकरणों के निर्माण एवं रखरखाव से जुड़ी रही है। नई टैंक ओवरहाल परियोजना से क्षेत्र में रक्षा क्षेत्र से जुड़े कौशल, तकनीकी विशेषज्ञता और औद्योगिक गतिविधियों को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर Armoured Vehicles Nigam Limited (AVNL) के अंतर्गत आती है और रक्षा मंत्रालय से जुड़ी प्रमुख सैन्य वाहन निर्माण इकाइयों में शामिल है।

रक्षा उत्पादन में भारत की बढ़ती ताकत

भारत सरकार पिछले कुछ वर्षों से रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी उत्पादन को बढ़ाने पर जोर दे रही है। इसका उद्देश्य न केवल भारतीय सशस्त्र बलों की जरूरतों को घरेलू स्तर पर पूरा करना है, बल्कि भारत को रक्षा उपकरणों के निर्माण और निर्यात के क्षेत्र में एक मजबूत वैश्विक केंद्र बनाना भी है।

रक्षा उत्पादन में करीब चार गुना वृद्धि और जबलपुर जैसी आधुनिक रखरखाव सुविधाओं का विस्तार इस व्यापक रणनीति का हिस्सा है। इससे सेना को आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता बनाए रखने, रखरखाव में लगने वाले समय को कम करने और घरेलू रक्षा औद्योगिक आधार को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।