बिजली कटौती से गांवों में हाहाकार, कई इलाकों में सिर्फ 8 से 12 घंटे ही मिल रही सप्लाई

ग्रामीण इलाकों में बिजली संकट से लोग परेशान

उत्तर प्रदेश के कई ग्रामीण इलाकों में लगातार हो रही बिजली कटौती ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। भीषण गर्मी के बीच गांवों में कई जगहों पर सिर्फ 8 से 12 घंटे ही बिजली मिल पा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे-लंबे पावर कट के कारण घरों से लेकर खेती तक का काम प्रभावित हो रहा है।

एक ओर जहां सरकार और ऊर्जा विभाग रिकॉर्ड बिजली आपूर्ति का दावा कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ गांवों में लोग घंटों अंधेरे और उमस भरी गर्मी झेलने को मजबूर हैं। बिजली संकट को लेकर अब ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

ऊर्जा मंत्री बोले- प्रदेश में रिकॉर्ड बिजली आपूर्ति

प्रदेश के ऊर्जा मंत्री का कहना है कि उत्तर प्रदेश में रिकॉर्ड स्तर पर बिजली आपूर्ति की जा रही है। सरकार का दावा है कि शहरों और ग्रामीण इलाकों के लिए निर्धारित रोस्टर के अनुसार बिजली दी जा रही है।

हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों से लगातार आ रही शिकायतें इन दावों पर सवाल खड़े कर रही हैं। लोगों का कहना है कि कागजों पर बिजली आपूर्ति भले ही पूरी दिखाई जा रही हो, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात काफी खराब हैं।

मुख्य अभियंता ने बताया कटौती का गणित

ऊर्जा विभाग के एक मुख्य अभियंता के अनुसार ग्रामीण इलाकों के लिए 18 घंटे बिजली आपूर्ति का रोस्टर तय है। लेकिन यदि उत्तर प्रदेश लोड डिस्पैच सेंटर की ओर से तीन घंटे की कटौती कर दी जाती है, तो बिजली आपूर्ति घटकर 15 घंटे रह जाती है।

इसके बाद यदि लोकल फाल्ट तीन बार हो जाए और उसे ठीक करने में लगभग तीन घंटे लग जाएं, तो वास्तविक सप्लाई घटकर सिर्फ 12 घंटे तक पहुंच जाती है। कई इलाकों में इससे भी कम बिजली मिल रही है।

लोकल फाल्ट बन रहे बड़ी समस्या

ग्रामीण क्षेत्रों में पुराने तार, जर्जर ट्रांसफॉर्मर और ओवरलोडिंग की वजह से बार-बार फाल्ट हो रहे हैं। बिजली विभाग के कर्मचारियों को फाल्ट ठीक करने में काफी समय लग जाता है, जिससे कटौती और बढ़ जाती है।

ग्रामीणों का आरोप है कि शहरों की तुलना में गांवों में बिजली व्यवस्था को लेकर लापरवाही ज्यादा होती है। यही वजह है कि गांवों में लंबे समय तक बिजली गुल रहने के बावजूद समस्या का समाधान जल्दी नहीं हो पाता।

भीषण गर्मी में बढ़ी लोगों की परेशानी

गर्मी के मौसम में बिजली कटौती ने गांवों में हालात और खराब कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि रात के समय बिजली न रहने से बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे ज्यादा दिक्कत होती है।

पंखे और कूलर बंद होने से लोग उमस भरी गर्मी में रात बिताने को मजबूर हैं। वहीं किसानों को सिंचाई करने में भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

किसानों पर पड़ रहा सीधा असर

ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली संकट का सबसे ज्यादा

असर किसानों पर दिखाई दे रहा है। ट्यूबवेल और सिंचाई के लिए

बिजली जरूरी होती है, लेकिन लगातार कटौती के कारण खेतों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा।

किसानों का कहना है कि यदि यही स्थिति रही तो फसलों की

पैदावार प्रभावित हो सकती है। कई किसानों ने बिजली विभाग से गांवों में निर्बाध बिजली आपूर्ति की मांग की है।

ग्रामीणों में बढ़ रहा आक्रोश

लगातार बिजली कटौती को लेकर कई गांवों में लोगों का

गुस्सा बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि शहरों की

तुलना में गांवों में ज्यादा कटौती की जाती है क्योंकि वहां विरोध कम होता है।

कुछ इलाकों में लोगों ने बिजली विभाग के खिलाफ प्रदर्शन करने की चेतावनी भी दी है।

ग्रामीणों की मांग है कि सरकार गांवों में भी शहरों जैसी बिजली व्यवस्था सुनिश्चित करे।

सरकार और विभाग पर उठ रहे सवाल

ऊर्जा विभाग के रिकॉर्ड बिजली आपूर्ति के दावों के बीच गांवों की जमीनी हकीकत अलग दिखाई दे रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि केवल बिजली

उत्पादन बढ़ाना काफी नहीं है, बल्कि वितरण व्यवस्था को भी मजबूत करना जरूरी है।

यदि ट्रांसफॉर्मर, तार और लोकल नेटवर्क को समय रहते अपग्रेड नहीं किया गया तो

आने वाले समय में ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली संकट और बढ़ सकता है।

उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में बिजली कटौती अब बड़ी समस्या बनती जा रही है।

सरकार रिकॉर्ड बिजली आपूर्ति का दावा कर रही है, लेकिन गांवों में लोगों को

कई बार सिर्फ 8 से 12 घंटे ही बिजली मिल पा रही है। लोकल फाल्ट, रोस्टर कटौती और

कमजोर बिजली व्यवस्था के कारण ग्रामीणों की परेशानी लगातार बढ़ रही है।

अब लोगों की नजर सरकार और बिजली विभाग की अगली कार्रवाई पर बनी हुई है।

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