करोड़ों के खर्च के बावजूद जल जीवन मिशन की पोल खुली
उत्तर प्रदेश में जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission) की स्थिति दिन-ब-दिन बदतर होती जा रही है, जहाँ करोड़ों रुपये के खर्च के बावजूद बुनियादी सुविधाएँ भी ठीक से काम नहीं कर पा रही हैं। महोबा जिले में हाल ही में एक चौंकाने वाली घटना ने इस योजना की पोल खोल दी है, जहाँ 65 लाख रुपये की लागत से बनी जल टंकी पानी भरते ही दरक गई और टूटने लगी। यह घटना न केवल जल जीवन मिशन UP की कार्यान्वयन में लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति पर सवाल खड़े करती है।
महोबा चिखारा गांव में टंकी का निर्माण दोष
महोबा के चिखारा गांव में निर्मित इस ओवरहेड टैंक (OHT) को पिछले साल पूरा किया गया था, लेकिन परीक्षण के दौरान ही इसके दीवारें लीक करने लगीं और दरारें पड़ गईं। स्थानीय निवासियों ने बताया कि टंकी में पानी भरते ही भारी मात्रा में रिसाव शुरू हो गया, जिससे पूरा निर्माण व्यर्थ साबित हो गया। जल जीवन मिशन महोबा के तहत यह प्रोजेक्ट केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से चला था, लेकिन घटिया निर्माण सामग्री और ठेकेदारों की लापरवाही ने इसे नाकाम कर दिया।
उत्तर प्रदेश सरकार ने 2024 तक हर घर नल-जल योजना को पूरा करने का लक्ष्य रखा था, लेकिन ऐसी घटनाएँ योजना की प्रगति पर पानी फेर रही हैं। महोबा जिले में कुल 65 लाख रुपये का यह खर्चा व्यर्थ जाने के बाद अब प्रशासनिक जाँच का आदेश दिया गया है, लेकिन स्थानीय लोग आश्वासन से तृप्त नहीं हो रहे।
जल जीवन मिशन UP में निर्माण गुणवत्ता की लगातार शिकायतें
जल जीवन मिशन उत्तर प्रदेश में शुरूआत से ही विवादों में घिरा रहा है, जहाँ कई जिलों से टूटे नलकूप, लीकेज वाली पाइपलाइनों और खराब टैंकों की खबरें आती रहती हैं। महोबा जल जीवन मिशन बदहाली का यह मामला कोई पहला नहीं है; इससे पहले बांदा, हमीरपुर और झाँसी जैसे जिलों में भी समान समस्याएँ सामने आई हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, UP जल जीवन मिशन में तेजी से काम पूरा करने की होड़ में गुणवत्ता की अनदेखी हो रही है।
महोबा की इस 65 लाख की टंकी में इस्तेमाल की गई सीमेंट और स्टील की खराब क्वालिटी थी, जिसके कारण पानी का दबाव सहन न कर पाई। स्थानीय पत्रकारों ने बताया कि ठेकेदार ने निर्धारित M-30 ग्रेड कंक्रीट के बजाय कम गुणवत्ता वाली सामग्री का उपयोग किया, जिसकी जाँच में कमी पाई गई। जल जीवन मिशन की आधिकारिक वेबसाइट पर महोबा जिले में 80% कवरेज का दावा किया गया है, लेकिन हकीकत में ग्रामीण इलाकों में पानी की कमी बनी हुई है। इस घटना के बाद ग्रामीणों ने जिलाधिकारी कार्यालय का घेराव किया और नई टंकी बनाने की मांग की।
महोबा जल जीवन मिशन घोटाले के संकेत और अगला कदम
*महोबा वाटर टैंक लीकेज की यह घटना महज निर्माण दोष नहीं, बल्कि संभावित भ्रष्टाचार का मामला प्रतीत हो रही है। 65 लाख के बजट में से कितना पैसा सामग्री पर खर्च हुआ, इसकी जाँच अब CAG स्तर पर होनी चाहिए।
विपक्षी दलों ने इसे जल जीवन मिशन UP घोटाला करार देते हुए
विधानसभा में मामला उठाने की चेतावनी दी है। स्थानीय BJP विधायक ने कहा कि दोषी ठेकेदार को काली
सूची में डाल दिया जाएगा, लेकिन पिछले मामलों में ऐसी कार्रवाई कागजों तक सीमित रही।
महोबा जिले के अन्य गांवों में भी जल जीवन मिशन पाइपलाइन
लीकेज की शिकायतें हैं, जहाँ पानी सड़कों पर बह रहा है।
पर्यावरणविदों का कहना है कि ऐसी बर्बादी जल संसाधनों का अपव्यय है, खासकर जब बुंदेलखंड क्षेत्र पहले से सूखाग्रस्त है।
सरकार को अब सख्त निगरानी, थर्ड-पार्टी ऑडिट और डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम लागू करना चाहिए।
पारदर्शिता और जवाबदेही की जरूरत
फिलहाल, चिखारा गांव के निवासी टैंकरों पर निर्भर हैं, जो महंगा और अस्वास्थ्यकर है।
यह घटना पूरे UP में जल जीवन मिशन की बदहाली को दर्शाती है,
जहाँ बजट के बावजूद पेयजल संकट गहराता जा रहा है।
भविष्य में ऐसी योजनाओं के लिए पारदर्शिता जरूरी है ताकि गरीब ग्रामीणों को न्याय मिल सके।
जल जीवन मिशन महोबा की यह विफलता उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों के लिए चेतावनी है।
सरकार को तत्काल मरम्मत, दोषी पर कार्रवाई और गुणवत्ता मानकों को सख्ती से लागू करना होगा।
अन्यथा, हर घर नल-जल का सपना अधर में लटक जाएगा।