बांग्लादेश अल्पसंख्यक मंत्री 2026: निताई रॉय चौधरी और दीपेन दीवान की कैबिनेट में एंट्री

बांग्लादेश अल्पसंख्यक मंत्री 2026: निताई रॉय चौधरी और दीपेन दीवान की कैबिनेट एंट्री, तारिक रहमान सरकार में समावेशी कदम

बांग्लादेश में 12 फरवरी 2026 को हुए 13वें संसदीय चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने भारी बहुमत हासिल किया। तारिक रहमान के नेतृत्व वाली BNP ने 212 सीटें जीतीं, जबकि जमात-ए-इस्लामी गठबंधन को 77 सीटें मिलीं। इस ऐतिहासिक जीत के बाद 17 फरवरी 2026 को ढाका के नेशनल पार्लियामेंट में तारिक रहमान ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने 25 मंत्रियों और 24 राज्य मंत्रियों सहित कुल 50 सदस्यीय कैबिनेट की शपथ दिलाई।

इस कैबिनेट में अल्पसंख्यक समुदायों को प्रतिनिधित्व देकर सरकार ने महत्वपूर्ण संदेश दिया है। दो प्रमुख अल्पसंख्यक नेता शामिल किए गए: निताई रॉय चौधरी (हिंदू समुदाय) और दीपेन दीवान (चकमा आदिवासी, बौद्ध)। यह कदम बांग्लादेश में घटती हिंदू आबादी (लगभग 8%) और आदिवासी क्षेत्रों की असुरक्षा के बीच राहत की सांस माना जा रहा है।

निताई रॉय चौधरी: हिंदू समुदाय का एकमात्र कैबिनेट मंत्री

निताई रॉय चौधरी, जो BNP के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और रणनीतिकार हैं, मगुरा-2 निर्वाचन क्षेत्र से सांसद चुने गए। उन्होंने 1,47,896 वोट हासिल कर जमात उम्मीदवार मुस्तर्शीद बिल्लाह को हराया। 1949 में जन्मे इस वकील ने 1990 के दशक में खालिदा जिया और एरशाद सरकारों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसमें युवा एवं खेल मंत्रालय भी शामिल है। अब वे सांस्कृतिक मामलों के मंत्री बने हैं। उनकी नियुक्ति हिंदू समुदाय के लिए प्रतीकात्मक महत्व रखती है, जहां पिछले वर्षों में हिंसा की घटनाएं चिंता का विषय रहीं। संसद में कुल चार अल्पसंख्यक सांसद चुने गए, जिनमें दो हिंदू (निताई रॉय चौधरी और गोयेश्वर चंद्र रॉय) शामिल हैं, लेकिन कैबिनेट में निताई को चुना गया।

दीपेन दीवान: चकमा आदिवासी और बौद्ध प्रतिनिधि

दीपेन दीवान, चकमा समुदाय से हैं, जो मुख्यतः बौद्ध हैं। वे रंगमती से सांसद चुने गए और निर्दलीय प्रतिद्वंद्वी को हराया। बांग्लादेश के इतिहास में बौद्ध नेता कैबिनेट में कम ही शामिल हुए हैं। दीपेन को चटगांव हिल ट्रैक्ट्स मामलों के मंत्री बनाया गया है। यह नियुक्ति चटगांव हिल ट्रैक्ट्स जैसे संवेदनशील आदिवासी क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए सकारात्मक संकेत है।

चकमा समुदाय की मांगों को मजबूती मिलेगी।

कैबिनेट में अन्य प्रमुख नाम और महत्व

शपथ ग्रहण समारोह में मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर, अमीर खोशरू महमूद चौधरी जैसे वरिष्ठ नेता शामिल हैं।

तारिक रहमान ने अल्पसंख्यकों को साथ लेकर चलने का संदेश दिया, जो क्षेत्रीय स्थिरता और

भारत जैसे पड़ोसी देशों के लिए महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञों का मानना है कि

ये मंत्री अल्पसंख्यक अधिकारों की रक्षा और हिंदू-विरोधी हिंसा रोकने में भूमिका निभाएंगे।

यह कैबिनेट 2024 की छात्र-नेतृत्व वाली क्रांति के बाद लोकतंत्र की बहाली का प्रतीक है।

अल्पसंख्यक मुद्दे अब बांग्लादेश राजनीति के केंद्र में हैं, और

इन मंत्रियों की सफलता सरकार की समावेशी छवि की कसौटी बनेगी।