गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे परियोजना ने पकड़ी रफ्तार
,गोरखपुर से सिलीगुड़ी को जोड़ने वाले महत्वाकांक्षी एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट को लेकर अब प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। बिहार के West Champaran जिले में भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को गति देने के लिए 10 दिनों के भीतर LPC यानी लैंड पजेशन सर्टिफिकेट तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।
इस फैसले के बाद परियोजना से जुड़े किसानों और स्थानीय लोगों के बीच हलचल बढ़ गई है। प्रशासन का मानना है कि यदि दस्तावेजी प्रक्रिया तेजी से पूरी हो जाती है तो निर्माण कार्य भी जल्द शुरू किया जा सकेगा।
किसानों के दस्तावेज तेजी से तैयार करने का निर्देश
जिला प्रशासन की ओर से राजस्व विभाग के अधिकारियों को साफ निर्देश दिए गए हैं कि जिन किसानों की जमीन एक्सप्रेसवे के लिए चिन्हित की गई है, उनके LPC जल्द से जल्द तैयार किए जाएं।
अधिकारियों का कहना है कि दस्तावेज पूरे होने के बाद मुआवजा प्रक्रिया भी तेजी से आगे बढ़ेगी। इससे परियोजना में देरी नहीं होगी और निर्माण कार्य तय समय पर शुरू किया जा सकेगा।
बिहार और यूपी के बीच मजबूत होगा कनेक्शन
Gorakhpur-Siliguri Expressway केवल एक सड़क परियोजना नहीं बल्कि पूर्वी भारत के विकास की बड़ी कड़ी माना जा रहा है।
इस एक्सप्रेसवे के जरिए उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के बीच कनेक्टिविटी मजबूत होगी। इससे व्यापार, पर्यटन, परिवहन और माल ढुलाई को नया फायदा मिलने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना पूर्वांचल और सीमावर्ती इलाकों की अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार दे सकती है।
पश्चिम चंपारण में जमीन अधिग्रहण बना अहम मुद्दा
West Champaran के कई गांव इस परियोजना के दायरे में आ रहे हैं। ऐसे में प्रशासन किसानों से लगातार संपर्क कर रहा है।
अधिकारियों का दावा है कि अधिकांश किसानों ने विकास परियोजना के लिए सहयोग का भरोसा दिया है। हालांकि कुछ स्थानों पर मुआवजे और जमीन अधिग्रहण को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं।
प्रशासन लोगों को समझाने और उनकी समस्याओं का समाधान करने में जुटा हुआ है।
यात्रा समय में होगी भारी कमी
फिलहाल गोरखपुर से सिलीगुड़ी तक का सफर लंबा और ट्रैफिक से प्रभावित माना जाता है। लेकिन एक्सप्रेसवे बनने के बाद यात्रा समय में कई घंटों की कमी आने की संभावना है।
इससे नेपाल बॉर्डर और पूर्वोत्तर राज्यों तक पहुंच भी पहले से ज्यादा आसान हो जाएगी। ट्रांसपोर्ट सेक्टर को इसका बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।
व्यापार और उद्योग को मिलेगा फायदा
विशेषज्ञों के अनुसार एक्सप्रेसवे बनने के बाद पूर्वांचल और बिहार के
सीमावर्ती जिलों में औद्योगिक गतिविधियां तेजी से बढ़ सकती हैं।
ट्रांसपोर्ट लागत कम होने से व्यापार को फायदा मिलेगा और नए निवेश आने की संभावनाएं मजबूत होंगी।
खासकर कृषि उत्पादों, छोटे उद्योगों और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को इसका सीधा लाभ मिल सकता है।
ग्रामीण इलाकों में बढ़ी चर्चा
जिन गांवों से एक्सप्रेसवे गुजरने वाला है वहां इस परियोजना को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
कुछ लोग इसे विकास और रोजगार का बड़ा अवसर मान रहे हैं,
जबकि कुछ किसान अपनी खेती की जमीन जाने को लेकर चिंतित हैं।
प्रशासन लगातार ग्रामीणों को जानकारी देने और उनकी शंकाएं दूर करने में लगा हुआ है।
आने वाले महीनों में तेज हो सकता है निर्माण कार्य
अगर भूमि अधिग्रहण और LPC की प्रक्रिया तय समय में पूरी हो जाती है तो
आने वाले महीनों में निर्माण कार्य भी तेजी से शुरू हो सकता है।
इस परियोजना से हजारों लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। साथ ही स्थानीय बाजारों और
छोटे कारोबारों में आर्थिक गतिविधियां भी बढ़ सकती हैं।
Gorakhpur-Siliguri Expressway परियोजना पूर्वी भारत की कनेक्टिविटी को
मजबूत करने वाला बड़ा कदम मानी जा रही है। पश्चिम चंपारण में LPC प्रक्रिया तेज होने के बाद
अब लोगों को उम्मीद है कि एक्सप्रेसवे निर्माण जल्द शुरू होगा।
यह परियोजना यूपी, बिहार और पश्चिम बंगाल के विकास को नई दिशा दे सकती है।
