यूपी में नया सत्र शुरू
उत्तर प्रदेश में नए शैक्षणिक सत्र 2026–27 की शुरुआत 1 अप्रैल से हो चुकी है, लेकिन 15 दिन बीत जाने के बाद भी कई जिलों में छात्रों को नई किताबें नहीं मिल पाई हैं। बेसिक शिक्षा विभाग उत्तर प्रदेश की समीक्षा में सामने आया है कि 25 जिलों में किताब वितरण की प्रक्रिया बेहद धीमी चल रही है, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
किताब वितरण में बड़ी लापरवाही
सरकार की योजना थी कि सत्र के पहले ही दिन से छात्रों को सभी किताबें उपलब्ध करा दी जाएं। लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग है।
कई स्कूलों में अभी तक किताबें नहीं पहुंची हैं
कुछ जिलों ने रिपोर्ट तक जमा नहीं की
विभाग ने इस पर नाराजगी जताई है
इन जिलों में सबसे ज्यादा समस्या
रिपोर्ट के अनुसार कई जिलों में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
बहराइच के 2834 में से 2002 स्कूलों में किताबें नहीं पहुंचीं
आजमगढ़ के 2955 में से 1921 स्कूल प्रभावित
संभल के 1289 में से 803 स्कूलों में किताबें नहीं
बांदा के 1797 में से 630 स्कूलों में कमी
चित्रकूट के 1262 में से 377 स्कूलों में वितरण नहीं हुआ
इसके अलावा
अयोध्या
गोरखपुर
सीतापुर
अमेठी
लखनऊ
इन जिलों के कई स्कूलों में भी अभी तक सभी किताबें नहीं पहुंची हैं।
रिपोर्ट न देने वाले जिले
इटावा और हाथरस ने अभी तक किताब वितरण की कोई रिपोर्ट ही नहीं दी है, जिससे विभाग की चिंता और बढ़ गई है।
पढ़ाई पर सीधा असर
किताबें समय पर न मिलने से छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
शिक्षकों को पढ़ाने में दिक्कत
छात्रों को सिलेबस समझने में परेशानी
नई कक्षा की शुरुआत कमजोर पड़ रही है
नामांकन बढ़ाने के निर्देश
स्कूल चलो अभियान के तहत नामांकन बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
कक्षा 1 में पिछले साल से 2 लाख ज्यादा नामांकन
कक्षा 5 से 6 में 6.66 लाख नए दाखिले
कक्षा 8 से 9 में 18912 नामांकन
अलीगढ़ कक्षा 1 नामांकन में पहले स्थान पर है, जबकि श्रावस्ती सबसे पीछे है।
कक्षा 5 से 6 में कौशांबी आगे है, जबकि हरदोई पीछे चल रहा है।
कक्षा 8 से 9 में अमेठी आगे है, जबकि औरैया और कानपुर नगर की स्थिति कमजोर बताई गई है।
विभाग ने दिए सख्त निर्देश
बेसिक शिक्षा विभाग ने सभी जिलों को निर्देश दिए हैं कि जल्द से जल्द किताब वितरण की प्रक्रिया पूरी करें।
देरी पर जवाबदेही तय की जाएगी
प्रक्रिया में तेजी लाने के आदेश
नियमित मॉनिटरिंग शुरू
उत्तर प्रदेश में शिक्षा सत्र शुरू होने के बाद भी किताबों की कमी एक बड़ी समस्या बनकर सामने आई है।
अगर जल्द सुधार नहीं हुआ, तो इसका असर बच्चों की पढ़ाई और पूरे शैक्षणिक सत्र पर पड़ सकता है।
अब देखना होगा कि विभाग कितनी जल्दी इस समस्या का समाधान करता है।
