गोरखपुर के शोधकर्ताओं ने बनाया AI टूल, अब आंखों की तस्वीर से होगी एनीमिया की पहचान

स्वास्थ्य क्षेत्र में गोरखपुर की बड़ी उपलब्धि

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के शोधकर्ताओं ने स्वास्थ्य क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने ऐसा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित टूल विकसित किया है, जो केवल आंखों की तस्वीर (विशेष रूप से आंख की कंजंक्टाइवा) का विश्लेषण करके एनीमिया की शुरुआती पहचान करने में सक्षम है। यदि यह तकनीक व्यापक स्तर पर सफल साबित होती है, तो भविष्य में लाखों लोगों की बिना रक्त जांच के प्रारंभिक स्क्रीनिंग संभव हो सकेगी। एनीमिया भारत में महिलाओं, बच्चों और गर्भवती महिलाओं के बीच एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या है। ऐसे में यह तकनीक स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा दे सकती है।

क्या है यह AI टूल?

यह AI टूल मशीन लर्निंग और डीप लर्निंग तकनीक पर आधारित है। मरीज की आंख के अंदर मौजूद कंजंक्टाइवा (Conjunctiva) की तस्वीर लेकर AI उसके रंग, रक्त वाहिकाओं और अन्य सूक्ष्म संकेतों का विश्लेषण करता है। इन संकेतों के आधार पर सिस्टम अनुमान लगाता है कि व्यक्ति में हीमोग्लोबिन का स्तर सामान्य है या एनीमिया की संभावना है।

यह तकनीक पूरी तरह नॉन-इनवेसिव (Non-Invasive) है, यानी इसमें शरीर से खून निकालने की आवश्यकता नहीं होती। यही इसकी सबसे बड़ी विशेषता मानी जा रही है।

$एनीमिया क्या होता है?

एनीमिया एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा सामान्य से कम हो जाती है। हीमोग्लोबिन लाल रक्त कोशिकाओं में पाया जाने वाला प्रोटीन है, जो शरीर के विभिन्न अंगों तक ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करता है।

एनीमिया होने पर व्यक्ति को—

  • लगातार कमजोरी महसूस होती है।
  • जल्दी थकान होती है।
  • चक्कर आ सकते हैं।
  • सांस फूलने की समस्या हो सकती है।
  • बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर असर पड़ सकता है।
  • गर्भवती महिलाओं में गंभीर स्वास्थ्य जोखिम बढ़ सकते हैं।

भारत में एनीमिया एक प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती है, इसलिए इसकी समय पर पहचान बेहद आवश्यक मानी जाती है।

AI तकनीक कैसे करेगी पहचान?

इस AI मॉडल को बड़ी संख्या में आंखों की तस्वीरों और संबंधित हीमोग्लोबिन रिपोर्ट के डेटा से प्रशिक्षित किया गया है। सिस्टम पहले आंख की तस्वीर को प्रोसेस करता है, फिर उसमें मौजूद रंग और रक्त प्रवाह से जुड़े पैटर्न की तुलना अपने प्रशिक्षित मॉडल से करता है।

यदि तस्वीर में एनीमिया से जुड़े संकेत मिलते हैं तो सिस्टम स्क्रीनिंग के स्तर पर संभावित एनीमिया की जानकारी देता है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह तकनीक शुरुआती स्क्रीनिंग के लिए है, अंतिम पुष्टि के लिए रक्त जांच अभी भी आवश्यक रहेगी।

ग्रामीण भारत के लिए क्यों है महत्वपूर्ण?

भारत के कई ग्रामीण क्षेत्रों में आधुनिक पैथोलॉजी लैब और रक्त जांच की सुविधाएं आसानी से उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में यदि मोबाइल कैमरा या सामान्य डिजिटल कैमरे से आंख की तस्वीर लेकर एनीमिया की प्रारंभिक जांच संभव हो जाती है तो स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा बदलाव आ सकता है।

इस तकनीक से—

  • गांवों में तेजी से स्क्रीनिंग हो सकेगी।
  • महिलाओं और बच्चों की नियमित जांच आसान होगी।
  • स्वास्थ्य कर्मियों का समय बचेगा।
  • शुरुआती स्तर पर मरीजों की पहचान संभव होगी।
  • गंभीर मामलों को समय रहते अस्पताल भेजा जा सकेगा।

AI और स्वास्थ्य सेवाओं का नया दौर

दुनिया भर में स्वास्थ्य सेवाओं में AI का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। कैंसर, मधुमेह, हृदय रोग, आंखों की बीमारियों और अब एनीमिया जैसी समस्याओं की पहचान में भी AI महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में AI डॉक्टरों का विकल्प नहीं बनेगा, बल्कि उनकी सहायता करने वाला एक शक्तिशाली उपकरण होगा। इससे मरीजों की जल्दी पहचान, बेहतर उपचार और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने में मदद मिलेगी।

भविष्य में क्या होंगे फायदे?

यदि यह AI आधारित तकनीक बड़े स्तर पर सफल होती है तो इसके कई लाभ हो सकते हैं—

  • बिना सुई और बिना दर्द की शुरुआती जांच।
  • कम समय में बड़ी आबादी की स्क्रीनिंग।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार।
  • कम लागत में जांच की सुविधा।
  • सरकारी स्वास्थ्य अभियानों को गति।
  • एनीमिया मुक्त भारत अभियान को मजबूती।

हालांकि इस तकनीक को व्यापक उपयोग से पहले विभिन्न आयु वर्गों और क्षेत्रों में

बड़े पैमाने पर परीक्षण और चिकित्सकीय सत्यापन की आवश्यकता होगी।

गोरखपुर के शोधकर्ताओं द्वारा विकसित AI आधारित एनीमिया स्क्रीनिंग तकनीक स्वास्थ्य क्षेत्र में

एक महत्वपूर्ण नवाचार के रूप में सामने आई है। आंखों की तस्वीरों के

माध्यम से एनीमिया की शुरुआती पहचान की यह पहल भविष्य में ग्रामीण और

शहरी दोनों क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ और तेज बना सकती है। हालांकि यह तकनीक

अभी स्क्रीनिंग के उद्देश्य से उपयोगी मानी जा रही है और अंतिम चिकित्सकीय निदान के लिए रक्त जांच आवश्यक रहेगी।

यदि आगे के परीक्षण सफल रहते हैं, तो यह नवाचार भारत की

सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।

read this post :गोरखपुर समाधान दिवस में बड़ी लापरवाही: तीन थानेदार और चार अधिकारी रहे गैरहाजिर, डीएम ने जारी किया नोटिस,