Pilibhit News: बहाली के लिए 8 लाख रुपये मांगने का आरोप, बर्खास्त पालिका कर्मचारी ने की आत्महत्या | पीलीभीत ताजा खबर,

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले के बीसलपुर नगर पालिका से जुड़ा एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। नगर पालिका के बर्खास्त कर संग्रहक उपेंद्र शंखधर ने अपने घर में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना के बाद मौके से पांच पन्नों का सुसाइड नोट बरामद हुआ, जिसमें उन्होंने नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी (EO) और एक प्रधान लिपिक पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सुसाइड नोट के अनुसार, बहाली कराने और मुकदमे से राहत दिलाने के नाम पर उनसे लाखों रुपये लिए गए, लेकिन नौकरी वापस नहीं मिली। वहीं मृतक के भाई ने भी आरोप लगाया कि आत्महत्या से कुछ घंटे पहले फोन पर बहाली के लिए आठ लाख रुपये की मांग की गई थी। घटना के बाद पूरे जिले में हड़कंप मच गया है और प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है।

50 लाख के टैक्स घोटाले के बाद हुई थी बर्खास्तगी,

जानकारी के अनुसार उपेंद्र शंखधर बीसलपुर नगर पालिका में कर संग्रहक के पद पर कार्यरत थे। वर्ष 2025 में लगभग 50 लाख रुपये के टैक्स घोटाले का मामला सामने आने के बाद उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी। पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा था और बाद में फरवरी 2026 में उन्हें नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया।

मृतक के परिजनों का कहना है कि जेल से बाहर आने के बाद उपेंद्र लगातार अपनी नौकरी वापस पाने का प्रयास कर रहे थे। इसी दौरान वह मानसिक तनाव में रहने लगे। परिवार के अनुसार उन्होंने अपनी जमीन बेची, कर्ज लिया और कई जगहों से पैसे जुटाए, ताकि नौकरी बहाल हो सके, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिली।

सुसाइड नोट में करोड़ों नहीं, लेकिन लाखों रुपये के लेनदेन का दावा,

मौके से मिले पांच पन्नों के सुसाइड नोट में उपेंद्र शंखधर ने कई चौंकाने वाले दावे किए हैं। उन्होंने लिखा कि नौकरी बचाने और मुकदमे से राहत दिलाने के नाम पर उनसे पहले विभिन्न मदों में बड़ी रकम जमा कराई गई। इसके बाद कथित रूप से 20 लाख रुपये की मांग की गई। सुसाइड नोट में यह भी आरोप लगाया गया है कि बाद में उनसे आठ लाख रुपये और देने के लिए कहा गया, यह कहते हुए कि यह राशि अन्य अधिकारियों और संबंधित लोगों तक पहुंचानी होगी। जब उन्होंने पैसे वापस मांगे तो कथित रूप से उन्हें धमकियां मिलीं।

इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। प्रशासन का कहना है कि सुसाइड नोट की फोरेंसिक जांच और अन्य साक्ष्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।

भाई ने लगाए गंभीर आरोप, प्रशासन ने गठित की जांच समिति,

मृतक के भाई अनुराग शंखधर ने वीडियो जारी कर मुख्यमंत्री से न्याय की मांग की है। उनका कहना है कि आत्महत्या से पहले उपेंद्र ने परिवार को बताया था कि बहाली के लिए उनसे फिर आठ लाख रुपये मांगे जा रहे हैं। परिवार ने उन्हें शिकायत करने की सलाह दी थी, लेकिन मानसिक रूप से टूट चुके उपेंद्र ने यह आत्मघाती कदम उठा लिया।

घटना के बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। जिला प्रशासन ने पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित करने की घोषणा की है। पुलिस अधीक्षक ने कहा है कि सुसाइड नोट, परिजनों की शिकायत और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच की जाएगी तथा जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी के अनुसार कार्रवाई होगी। दूसरी ओर, जिन अधिकारियों पर आरोप लगाए गए हैं उन्होंने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए स्वयं को निर्दोष बताया है।

मामले ने उठाए कई गंभीर सवाल,

यह घटना केवल एक आत्महत्या का मामला नहीं है, बल्कि सरकारी विभागों में पारदर्शिता, भ्रष्टाचार के आरोपों और कर्मचारियों की मानसिक स्थिति जैसे कई गंभीर सवाल भी खड़े करती है। यदि जांच में सुसाइड नोट में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो यह प्रशासनिक व्यवस्था के लिए भी बड़ा मुद्दा बन सकता है। वहीं यदि आरोप गलत साबित होते हैं तो जांच से वास्तविक कारण सामने आएंगे। फिलहाल पूरे मामले की सच्चाई जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। प्रशासन ने निष्पक्ष कार्रवाई का भरोसा दिया है और पूरे प्रदेश की नजर अब जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है।

घटना के मुख्य बिंदु,

  • बीसलपुर नगर पालिका के बर्खास्त कर्मचारी उपेंद्र शंखधर ने आत्महत्या की।
  • पांच पन्नों का सुसाइड नोट बरामद हुआ।
  • सुसाइड नोट में EO और एक कर्मचारी पर गंभीर आरोप लगाए गए।
  • मृतक के भाई ने बहाली के लिए आठ लाख रुपये मांगने का आरोप लगाया।
  • जिला प्रशासन ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित करने की घोषणा की।
  • आरोपों से संबंधित अधिकारियों ने खुद को निर्दोष बताया।
  • पुलिस और प्रशासन सभी पहलुओं की जांच कर रहे हैं।

FAQ,

1. यह घटना कहां की है?

यह मामला उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले के बीसलपुर नगर पालिका क्षेत्र का है।

2. आत्महत्या करने वाले कर्मचारी का नाम क्या था?

मृतक का नाम उपेंद्र शंखधर था, जो नगर पालिका में कर संग्रहक के पद पर

कार्यरत थे और बाद में बर्खास्त कर दिए गए थे।

3. सुसाइड नोट में क्या आरोप लगाए गए हैं?

सुसाइड नोट में बहाली और मुकदमे से राहत दिलाने के नाम पर लाखों

रुपये मांगने और लेने के आरोप लगाए गए हैं। इन आरोपों की जांच जारी है।

4. प्रशासन ने क्या कार्रवाई की है?

जिला प्रशासन ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित करने की घोषणा की है और

पुलिस मामले की जांच कर रही है।

5. क्या आरोप साबित हो चुके हैं?

नहीं। फिलहाल आरोपों की जांच चल रही है। जांच पूरी होने के बाद ही

आधिकारिक रूप से तथ्यों की पुष्टि होगी

read this post :₹1 लाख का इनामी बदमाश STF मुठभेड़ में ढेर, 2024 में महाराष्ट्र पुलिस की हिरासत से हुआ था फरार