साइबर ठगी के पैसे निकलवाने वाला गिरफ्तार: 5% कमीशन पर ग्राहक सेवा केंद्रों से निकालता था ठगी की रकम

साइबर ठगी के पैसों का नेटवर्क बेनकाब

देशभर में बढ़ रहे साइबर अपराधों के खिलाफ पुलिस लगातार सख्त कार्रवाई कर रही है। इसी क्रम में पुलिस ने एक ऐसे आरोपी को गिरफ्तार किया है, जिस पर आरोप है कि वह साइबर ठगी से प्राप्त रकम को ग्राहक सेवा केंद्र (Customer Service Point – CSP) के माध्यम से नकद निकालने का काम करता था। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी प्रत्येक लेनदेन पर लगभग 5 प्रतिशत कमीशन लेता था और विभिन्न बैंक खातों में आई रकम को नकद निकालकर साइबर ठगों तक पहुंचाता था।

पुलिस का मानना है कि आरोपी केवल एक कड़ी हो सकता है और इस मामले में एक बड़े साइबर नेटवर्क के सक्रिय होने की आशंका है। इसलिए जांच एजेंसियां अब पूरे नेटवर्क की गहन जांच कर रही हैं।

5 प्रतिशत कमीशन पर करता था अवैध लेनदेन

पुलिस के अनुसार आरोपी साइबर अपराधियों के संपर्क में रहकर ठगी की रकम को बैंक खातों से निकालने की व्यवस्था करता था। ग्राहक सेवा केंद्रों के माध्यम से राशि निकालने के बदले वह प्रत्येक ट्रांजैक्शन पर 5 प्रतिशत कमीशन लेता था।

प्रारंभिक जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि आरोपी कितने समय से इस गतिविधि में शामिल था और अब तक कितनी राशि की निकासी कर चुका है।

पूछताछ में मिले कई अहम सुराग

गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपी से विस्तृत पूछताछ शुरू की है। उसके मोबाइल फोन, बैंक खातों, डिजिटल वॉलेट, यूपीआई ट्रांजैक्शन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच की जा रही है।

जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि आरोपी का संपर्क किन राज्यों में सक्रिय साइबर अपराधियों से था और क्या वह किसी संगठित गिरोह का हिस्सा था।

डिजिटल साक्ष्यों की हो रही जांच

साइबर विशेषज्ञ आरोपी के मोबाइल डेटा, कॉल रिकॉर्ड, बैंकिंग लेनदेन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण कर रहे हैं। पुलिस को उम्मीद है कि इन जांचों से पूरे नेटवर्क और अन्य संदिग्ध लोगों की पहचान करने में मदद मिलेगी।

यदि जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

ग्राहक सेवा केंद्रों की भूमिका भी जांच के दायरे में

पुलिस यह भी जांच कर रही है कि जिन ग्राहक सेवा केंद्रों (CSP) के माध्यम से रकम निकाली गई, वहां सभी बैंकिंग नियमों और केवाईसी (KYC) प्रक्रियाओं का पालन किया गया था या नहीं।

यदि जांच में किसी संचालक की जानबूझकर संलिप्तता या लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

साइबर अपराध पर पुलिस की सख्ती

हाल के वर्षों में ऑनलाइन बैंकिंग, यूपीआई, डिजिटल वॉलेट और इंटरनेट बैंकिंग के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर

ठगी के मामलों में भी वृद्धि देखी गई है। पुलिस और

साइबर सेल लगातार ऐसे गिरोहों पर कार्रवाई कर रही हैं

जो लोगों को फर्जी कॉल, लिंक, ओटीपी या अन्य तरीकों से ठगी का शिकार बनाते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि केवल ठगी करने वाले ही नहीं बल्कि ठगी की रकम को छिपाने या

निकालने में मदद करने वाले लोग भी कानून के दायरे में आते हैं।

लोगों के लिए जरूरी सावधानियां

पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि—

  • किसी अनजान व्यक्ति के साथ बैंक खाता, एटीएम, ओटीपी या यूपीआई पिन साझा न करें।
  • संदिग्ध लिंक या फर्जी वेबसाइट पर अपनी बैंकिंग जानकारी दर्ज न करें।
  • किसी भी साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।
  • आधिकारिक राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज की जा सकती है।
  • समय पर शिकायत करने से ठगी गई राशि को रोकने या रिकवर करने की संभावना बढ़ जाती है।

साइबर अपराध से बचाव क्यों जरूरी है?

डिजिटल लेनदेन जितना आसान हुआ है, साइबर अपराधियों के तरीके भी उतने ही आधुनिक होते जा रहे हैं।

जागरूकता, सतर्कता और समय पर शिकायत ही साइबर अपराध से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।

पुलिस का कहना है कि नागरिकों के सहयोग से ऐसे गिरोहों पर प्रभावी कार्रवाई की जा सकती है।

निष्कर्ष

साइबर ठगी की रकम को ग्राहक सेवा केंद्रों के माध्यम से निकालने के

आरोप में हुई यह गिरफ्तारी साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है।

पुलिस अब पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है और डिजिटल साक्ष्यों के

आधार पर अन्य संदिग्धों की पहचान करने का प्रयास कर रही है।

साथ ही आम लोगों से अपील की गई है कि

वे साइबर सुरक्षा के नियमों का पालन करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना दें।

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