लखनऊ में 18 फरवरी 2026 को बसपा सुप्रीमो मायावती ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 के लिए बड़ा ऐलान किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रदेश की सभी 403 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी। किसी भी दल के साथ गठबंधन नहीं होगा। मायावती ने कहा कि जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आएंगे, विरोधी ताकतें बसपा को सत्ता से दूर रखने के लिए साजिशें रचेंगी, लेकिन पार्टी अडिग रहेगी। उन्होंने अंबेडकरवादियों से अपील की कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के आत्म-सम्मान और अधिकारों के लिए देशभर में जुट जाएं और आंदोलन को मजबूत करें।
गठबंधन की अफवाहों पर मायावती का पलटवार
मायावती ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में गठबंधन (खासकर सपा के साथ) की खबरों को ‘फेक न्यूज’ और ‘साजिश’ करार दिया। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया और कुछ मीडिया में ऐसी अफवाहें फैलाई जा रही हैं ताकि बसपा कार्यकर्ता गुमराह हों। पार्टी पिछले गठबंधनों से सबक ले चुकी है, जहां बसपा को नुकसान हुआ लेकिन साथी दलों को फायदा मिला। अब बसपा ‘एकला चलो’ की नीति पर चलेगी और पूर्ण बहुमत से सरकार बनाएगी। मायावती ने कार्यकर्ताओं को सतर्क रहने और विरोधियों की चालों से बचने की सलाह दी।
बाबा साहेब के सम्मान पर जोर
मायावती ने अपने बयान में बाबा साहेब डॉ. अंबेडकर का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बसपा का मूल मंत्र ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ है, जो दलित, पिछड़े, अल्पसंख्यक और गरीबों के हित में काम करता है। अंबेडकरवादियों को बाबा साहेब के सम्मान और उनके संविधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए एकजुट होने का आह्वान किया। यह ऐलान बसपा की पुरानी ताकत—दलित-मुस्लिम-ओबीसी फॉर्मूला—को मजबूत करने की कोशिश लगती है। पार्टी 2007 की तरह पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने का लक्ष्य रख रही है।
यूपी राजनीति पर असर
यह ऐलान यूपी की सियासत में हलचल मचा सकता है। जहां बीजेपी सत्ता में मजबूत है और सपा-कांग्रेस विपक्षी एकता की कोशिश कर रही हैं, वहीं बसपा का अकेले उतरना वोटों का बंटवारा कर सकता है। मायावती ने बीजेपी सरकार पर कानून-व्यवस्था बिगड़ने और
भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए। उन्होंने कहा कि जनता बसपा की वापसी चाहती है।
पार्टी संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को एकजुट करने पर फोकस कर रही है।
दिल्ली बंगला अलॉटमेंट पर सफाई
मायावती ने टाइप-8 बंगला अलॉट होने पर भी सफाई दी और कहा कि
यह व्यक्तिगत मामला है, चुनाव से कोई लेना-देना नहीं।
उन्होंने विरोधियों पर हमला बोला कि वे बसपा को कमजोर दिखाने की कोशिश कर रहे हैं।
मायावती का यह फैसला बसपा की स्वतंत्र छवि को मजबूत करेगा और 2027 चुनावों में नया समीकरण बना सकता है।
अंबेडकरवादियों के लिए यह बाबा साहेब के आदर्शों पर चलने का संदेश है।
बसपा अब पूर्ण बहुमत के लक्ष्य के साथ मैदान में उतरेगी।