कानपुर में बीमार पिता
रिश्तों को शर्मसार करने वाली घटना
Kanpur से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने इंसानियत और रिश्तों दोनों को झकझोर कर रख दिया है। जिस पिता ने अपने बेटों को पाल-पोसकर बड़ा किया, पढ़ाया-लिखाया और जिंदगीभर उनके लिए संघर्ष किया, वही पिता अंतिम समय में अकेला पड़ गया। बीमार पिता बिना इलाज के दम तोड़ गया, लेकिन दोनों बेटे उसे देखने तक नहीं पहुंचे।
पड़ोसियों ने निभाया परिवार का फर्ज
कानपुर के शास्त्रीनगर इलाके में रहने वाले 60 वर्षीय संतोष सिंह लंबे समय से बीमार चल रहे थे। पड़ोसियों के मुताबिक उनकी आर्थिक और पारिवारिक स्थिति बेहद खराब हो चुकी थी। पत्नी की मानसिक स्थिति भी ठीक नहीं थी और दोनों बेटे वर्षों से घर नहीं आए थे।
स्थानीय लोगों ने बताया कि संतोष सिंह के दोनों बेटे बाहर रहकर नौकरी करते हैं। बड़ा बेटा गुजरात में प्राइवेट नौकरी करता है जबकि छोटा बेटा लखनऊ में रहता है। बावजूद इसके किसी ने भी पिता की हालत जानने की कोशिश नहीं की।
फ्लाइट का किराया भेजा, फिर भी घर नहीं आया बेटा
मोहल्ले के लोगों और पड़ोसियों ने इंसानियत दिखाते हुए बड़े बेटे को घर बुलाने की कोशिश की। पड़ोसी कृष्ण कुमार सिंह और अन्य लोगों ने मिलकर फ्लाइट टिकट के लिए करीब 12 हजार रुपये तक भेज दिए ताकि बेटा जल्द कानपुर पहुंच सके।
बताया जा रहा है कि बेटा शहर तक आ भी गया, लेकिन उसने घर आना जरूरी नहीं समझा। पिता की मौत की खबर मिलने के बावजूद वह अंतिम दर्शन के लिए नहीं पहुंचा।
सात साल से घर नहीं आए बेटे
पड़ोसियों के अनुसार दोनों बेटे और बहुएं पिछले सात वर्षों से घर नहीं आए थे। संतोष सिंह और उनकी पत्नी
अकेले ही जिंदगी गुजार रहे थे। बीमारी बढ़ने के बावजूद बेटों ने कोई जिम्मेदारी नहीं निभाई।
मोहल्ले के लोगों का कहना है कि संतोष सिंह अक्सर अपने बेटों को याद कर भावुक हो जाते थे,
लेकिन बेटों की बेरुखी लगातार बढ़ती गई।
साले और पड़ोसियों ने किया अंतिम संस्कार
जब संतोष सिंह की मौत हुई तो परिवार के लोग आगे नहीं आए।
आखिरकार उनके साले और मोहल्ले के लोगों ने मिलकर अंतिम संस्कार कराया। स्थानीय लोगों ने कहा कि
ने वह जिम्मेदारी निभाई जो बेटों को निभानी चाहिए थी।
इस घटना के बाद इलाके में लोग बेहद दुखी और नाराज नजर आए। कई लोगों ने
इसे बदलते सामाजिक रिश्तों और परिवारों में बढ़ती दूरी का दुखद उदाहरण बताया।
सोशल मीडिया पर भी लोग भावुक
यह मामला सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। लोग बेटों के व्यवहार की
आलोचना कर रहे हैं और पड़ोसियों की मानवता की तारीफ कर रहे हैं। कई यूजर्स ने लिखा कि आज के
समय में रिश्ते कमजोर होते जा रहे हैं और लोग अपने माता-पिता को अकेला छोड़ रहे हैं।
समाज के लिए बड़ा सवाल
यह घटना केवल एक परिवार की कहानी नहीं, बल्कि समाज के सामने खड़ा बड़ा सवाल भी है।
बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल और जिम्मेदारी को लेकर लगातार चिंताएं बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि
परिवारों में बढ़ती दूरी और व्यस्त जीवनशैली का असर बुजुर्गों पर सबसे ज्यादा पड़ रहा है।
कानपुर की यह घटना हर किसी को सोचने पर मजबूर कर रही है। जिस पिता ने पूरी जिंदगी
अपने बच्चों के लिए बिताई, अंतिम समय में वही अकेला रह गया। पड़ोसियों ने
इंसानियत निभाई, लेकिन बेटों की बेरुखी ने रिश्तों को शर्मसार कर दिया।
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