गोर्रा नदी किनारे इतिहास की अनमोल धरोहर पर बढ़ी चर्चा
गोरखपुर जनपद के झंगहा क्षेत्र स्थित बरही (राजधानी) गांव एक बार फिर ऐतिहासिक चर्चाओं के केंद्र में है। गोर्रा नदी के किनारे दिखाई देने वाले प्राचीन अवशेषों को लेकर स्थानीय लोगों के बीच लंबे समय से यह मान्यता रही है कि यह क्षेत्र प्राचीन पीपलीवन और उसके शासकों से जुड़ा हो सकता है। इन्हीं दावों और स्थानीय जनश्रुतियों के बीच फिशरमैन आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष फिशरमैन चंद्रभान निषाद अपनी टीम के साथ स्थल पर पहुंचे और पूरे क्षेत्र का निरीक्षण किया।
निरीक्षण के बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI), राज्य पुरातत्व विभाग और पर्यटन विभाग से इस क्षेत्र का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कराने की मांग की। उनका कहना है कि यदि यहां व्यवस्थित पुरातात्विक अध्ययन और खुदाई कराई जाए तो पूर्वांचल के इतिहास से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
स्थल निरीक्षण के दौरान संरक्षण की उठाई मांग
निरीक्षण के दौरान फिशरमैन चंद्रभान निषाद ने कहा कि गोर्रा नदी के किनारे मौजूद प्राचीन अवशेष लगातार नदी के कटाव का सामना कर रहे हैं। यदि समय रहते इनका संरक्षण नहीं किया गया तो भविष्य में महत्वपूर्ण ऐतिहासिक साक्ष्य नष्ट हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि इस पूरे क्षेत्र की आधुनिक तकनीक से ड्रोन मैपिंग, भू-वैज्ञानिक परीक्षण, ग्राउंड सर्वे तथा आवश्यकता पड़ने पर वैज्ञानिक खुदाई कराई जानी चाहिए। उनका कहना है कि वैज्ञानिक अध्ययन के बाद ही इस स्थल के वास्तविक ऐतिहासिक महत्व का पता चल सकेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि ऐतिहासिक प्रमाण मिलते हैं तो यह स्थल न केवल गोरखपुर बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के लिए गौरव का विषय बन सकता है।
पीपलीवन और प्राचीन किले से जोड़ते हैं स्थानीय लोग
बरही (राजधानी) गांव के ग्रामीण वर्षों से यह मानते रहे हैं कि गोर्रा नदी के किनारे स्थित प्राचीन अवशेष किसी पुराने नगर अथवा किले के अवशेष हो सकते हैं। स्थानीय जनश्रुतियों में इस स्थान को प्राचीन पीपलीवन से जोड़ा जाता है।
हालांकि इस संबंध में अभी तक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) या किसी अन्य सक्षम सरकारी संस्था द्वारा कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
इतिहासकारों का मानना है कि किसी भी ऐतिहासिक दावे की पुष्टि केवल पुरातात्विक साक्ष्यों, वैज्ञानिक खुदाई और विशेषज्ञों की विस्तृत जांच के बाद ही की जा सकती है।
सरकार और पुरातत्व विभाग से विशेष अपील
फिशरमैन चंद्रभान निषाद ने उत्तर प्रदेश सरकार, पुरातत्व विभाग और पर्यटन विभाग से मांग की कि इस पूरे क्षेत्र का विस्तृत सर्वेक्षण कराया जाए।
उन्होंने कहा कि यदि यहां ऐतिहासिक महत्व के प्रमाण प्राप्त होते हैं तो इस स्थान को संरक्षित स्मारक घोषित कर पर्यटन के मानचित्र पर विकसित किया जाना चाहिए। इससे प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान मिलेगी और स्थानीय लोगों को भी इसका लाभ मिलेगा।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि सर्वेक्षण के दौरान विशेषज्ञ इतिहासकारों, पुरातत्वविदों और भू-विज्ञान विशेषज्ञों की संयुक्त टीम गठित की जाए।
नदी कटाव से खतरे में ऐतिहासिक अवशेष
निरीक्षण के दौरान फिशरमैन आर्मी की टीम ने गोर्रा नदी के किनारे कई स्थानों पर कटाव की स्थिति का भी जायजा लिया।
संगठन का कहना है कि यदि कटाव रोकने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में संभावित ऐतिहासिक अवशेषों को नुकसान पहुंच सकता है।
फिशरमैन चंद्रभान निषाद ने सरकार से मांग की कि नदी किनारे सुरक्षा कार्य कराए जाएं और
पुरातात्विक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्रों को सुरक्षित किया जाए।
फिशरमैन आर्मी की टीम ने स्थानीय लोगों से जुटाई जानकारी
निरीक्षण के दौरान संगठन के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने ग्रामीणों से बातचीत कर
इस क्षेत्र से जुड़ी लोककथाओं, पारंपरिक मान्यताओं और पुराने इतिहास की जानकारी भी एकत्र की।
संगठन का कहना है कि स्थानीय लोगों की मौखिक परंपराएं और
ऐतिहासिक स्मृतियां भी शोध का महत्वपूर्ण आधार बन सकती हैं, हालांकि
अंतिम निष्कर्ष केवल वैज्ञानिक जांच के बाद ही निकाला जाना चाहिए।
पर्यटन विकसित होने से बढ़ेंगे रोजगार के अवसर
फिशरमैन चंद्रभान निषाद ने कहा कि यदि भविष्य में इस स्थल का ऐतिहासिक
महत्व प्रमाणित होता है और इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाता है, तो
इसका सीधा लाभ स्थानीय युवाओं और छोटे व्यापारियों को मिलेगा।
उन्होंने कहा कि पर्यटन बढ़ने से होटल, परिवहन, हस्तशिल्प, स्थानीय उत्पादों और
अन्य व्यवसायों को बढ़ावा मिलेगा, जिससे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था मजबूत हो सकती है।
साथ ही गोरखपुर जिले को राष्ट्रीय स्तर पर एक नई ऐतिहासिक पहचान भी मिल सकती है।
जल्द वैज्ञानिक सर्वेक्षण कराने की मांग
फिशरमैन आर्मी ने सरकार से मांग की कि विशेषज्ञों की टीम जल्द से जल्द इस क्षेत्र का वैज्ञानिक सर्वेक्षण करे।
संगठन ने कहा कि यदि सर्वेक्षण में ऐतिहासिक महत्व की पुष्टि होती है तो
इस क्षेत्र को राष्ट्रीय धरोहर के रूप में विकसित करने की दिशा में आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए।
संगठन ने यह भी कहा कि वह भविष्य में भी इस ऐतिहासिक धरोहर के
संरक्षण और शोध की मांग उठाता रहेगा।
संपादकीय टिप्पणी
इस समाचार में पीपलीवन, प्राचीन किले और बरही (राजधानी) गांव के संबंध में किए गए उल्लेख स्थानीय जनश्रुतियों,
क्षेत्रीय मान्यताओं और फिशरमैन आर्मी द्वारा किए गए स्थल निरीक्षण पर आधारित हैं।
इन दावों की भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) अथवा किसी अन्य सक्षम सरकारी संस्था द्वारा अभी तक
आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। किसी भी ऐतिहासिक निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले
वैज्ञानिक सर्वेक्षण, पुरातात्विक खुदाई और विशेषज्ञों की जांच आवश्यक होगी।
FAQ
प्रश्न 1: बरही (राजधानी) गांव कहां स्थित है?
बरही (राजधानी) गांव उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जनपद के झंगहा क्षेत्र में गोर्रा नदी के किनारे स्थित है।
प्रश्न 2: फिशरमैन चंद्रभान निषाद ने क्या मांग की है?
उन्होंने सरकार, पुरातत्व विभाग और पर्यटन विभाग से वैज्ञानिक सर्वेक्षण,
ड्रोन मैपिंग, पुरातात्विक खुदाई और स्थल के संरक्षण की मांग की है।
प्रश्न 3: क्या पीपलीवन के किले की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है?
नहीं। अभी तक किसी सरकारी पुरातात्विक संस्था ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
प्रश्न 4: यदि ऐतिहासिक महत्व प्रमाणित होता है तो क्या लाभ होगा?
ऐतिहासिक महत्व प्रमाणित होने पर यह क्षेत्र संरक्षित धरोहर और पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो सकता है,
जिससे स्थानीय रोजगार और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
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