गैस संकट का असर: छोटे उद्योगों पर गहराया संकट, महंगाई बढ़ने के संकेत

देश में बढ़ते तेल और गैस संकट का असर अब साफ तौर पर उद्योगों पर दिखाई देने लगा है। उत्तर प्रदेश के मथुरा में साड़ी, चांदी, गिलट, प्रिंटिंग प्रेस और होटल-रेस्टोरेंट जैसे कई उद्योग गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। उत्पादन में गिरावट और लागत में भारी बढ़ोतरी के कारण कई छोटे उद्योग बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं।

क्यों बढ़ा संकट

पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और युद्ध के कारण गैस और पेट्रोलियम पदार्थों की सप्लाई प्रभावित हुई है। एलपीजी, सीएनजी और पीएनजी की आपूर्ति में कटौती से उद्योगों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है।

पीएनजी सप्लाई करने वाली कंपनियों ने 18 मार्च के बाद नई बंदिशें लागू की हैं, जिसके तहत पिछले छह महीनों के औसत खपत का केवल 70 प्रतिशत गैस ही उपलब्ध कराई जा रही है। इससे गैस की उपलब्धता में करीब 30 प्रतिशत की कमी आई है।

साड़ी उद्योग पर बड़ा असर

मथुरा का प्रमुख साड़ी उद्योग इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। उत्पादन में 30 से 35 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है।

उद्यमियों का कहना है कि गैस की कमी और कच्चे माल की बढ़ती कीमतों के कारण लागत बढ़ गई है, जिससे ऑर्डर पूरे करना मुश्किल हो गया है। इसका सीधा असर बाजार में साड़ियों की कीमतों पर पड़ेगा।

चांदी और गिलट उद्योग संकट में

चांदी और गिलट उद्योग भी इस संकट की चपेट में हैं। गैस की कमी के कारण गलाई और अन्य प्रक्रियाएं प्रभावित हो रही हैं।

मेटल की कीमतें पहले से ही ऊंची थीं, अब गैस संकट ने स्थिति और खराब कर दी है।

कई छोटे कारखाने बंद होने की स्थिति में पहुंच गए हैं और बाजार में गिलट व चांदी के उत्पाद महंगे हो रहे हैं।

प्रिंटिंग और होटल व्यवसाय भी प्रभावित

प्रिंटिंग प्रेस उद्योग में भी लागत तेजी से बढ़ी है। कागज, रंग और

गैस की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण प्रिंटिंग के दाम बढ़ गए हैं।

वहीं होटल और रेस्टोरेंट व्यवसाय में भी गैस संकट का सीधा असर देखा जा रहा है।

खाना बनाने की लागत बढ़ने से व्यवसायियों पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है।

महंगाई पर पड़ेगा सीधा असर

विशेषज्ञों का मानना है कि इस संकट का सीधा असर आम जनता पर महंगाई के रूप में दिखाई देगा।

साड़ी, चांदी, प्रिंटिंग और खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ सकते हैं।

इससे बाजार में मांग और आपूर्ति का संतुलन भी बिगड़ सकता है।

सब्सिडी को लेकर भी उठे सवाल

मथुरा के उद्योगपतियों का कहना है कि ताज ट्रिपेजियम जोन में होने के बावजूद

उन्हें पीएनजी पर सब्सिडी नहीं मिल रही, जबकि अन्य शहरों जैसे आगरा और फिरोजाबाद में यह सुविधा उपलब्ध है।

इस असमानता को लेकर भी व्यापारियों में नाराजगी है।

उद्योग जगत की प्रतिक्रिया

उद्योग संगठनों का कहना है कि वैश्विक संकट का असर तो पड़ेगा ही, लेकिन

सरकार को छोटे उद्योगों के लिए राहत उपाय करने चाहिए।

चैंबर ऑफ कॉमर्स के पदाधिकारियों का मानना है कि स्थिति चुनौतीपूर्ण है,

लेकिन संयम और रणनीति से इससे निपटा जा सकता है।

गैस संकट ने मथुरा के छोटे और मध्यम उद्योगों की कमर तोड़ दी है। उत्पादन में गिरावट,

लागत में बढ़ोतरी और सप्लाई की कमी ने उद्योगों को संकट में डाल दिया है।

अगर जल्द ही स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो इसका असर न

केवल उद्योगों बल्कि आम जनता की जेब पर भी पड़ेगा।