योगी आदित्यनाथ ने 9.12 लाख करोड़
ऐतिहासिक फैसला और महिलाओं का सशक्तिकरण
आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। विधान परिषद में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट घोषणा की कि इन बहनों का मानदेय बढ़ाया जाएगा। यह कदम ग्रामीण स्तर पर महिलाओं के सशक्तिकरण को मजबूत करेगा। आंगनबाड़ी केंद्रों पर सेवा देने वाली ये कार्यकर्ताएं बच्चों की देखभाल, पोषण और स्वास्थ्य जागरूकता का माध्यम हैं। आशा बहुएं घर-घर जाकर टीकाकरण और मातृ स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करती हैं। योगी जी के इस ऐलान से लाखों महिलाओं को आर्थिक लाभ मिलेगा।
योगी आदित्यनाथ का विधान परिषद में भाषण
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश विधान परिषद की कार्यवाही के दौरान आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं के मानदेय वृद्धि पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “ये बहनें समाज की रीढ़ हैं। उनकी मेहनत को सम्मान देने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है।” योगी जी ने विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए विस्तार से योजना की रूपरेखा बताई। विधान परिषद सत्र 2026 में यह घोषणा राजनीतिक हलचल पैदा कर रही है। सीएम ने पिछले कार्यकाल की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए नई योजना का खुलासा किया।
वर्तमान मानदेय और प्रस्तावित वृद्धि
वर्तमान में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को लगभग 6,000 से 8,000 रुपये मासिक मानदेय मिलता है। आशा बहुओं को प्रति माह 5,000 से 7,000 रुपये के बीच भुगतान होता है। योगी सरकार प्रस्तावित वृद्धि के तहत इसे 50% तक बढ़ाने पर विचार कर रही है। नया मानदेय आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए 10,000 रुपये और आशा के लिए 9,000 रुपये हो सकता है। सुपरवाइजरों को भी 12,000 रुपये तक का लाभ मिलेगा। यह वृद्धि बजट सत्र में पास विधेयक से प्रभावी होगी। केंद्र सरकार की योजनाओं से समन्वय बनाकर इसे लागू किया जाएगा।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की भूमिका और महत्व
आंगनबाड़ी केंद्र ग्रामीण भारत का आधार हैं। ये कार्यकर्ताएं 0-6 वर्ष के बच्चों को पोषण, पूर्व-प्राथमिक शिक्षा और स्वास्थ्य जांच प्रदान करती हैं। उत्तर प्रदेश में 1.5 लाख से अधिक आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। योगी सरकार ने डिजिटल आंगनबाड़ी ऐप लॉन्च कर इनकी दक्षता बढ़ाई है। मानदेय वृद्धि से कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ेगा। गोरखपुर, लखनऊ जैसे जिलों में यह योजना तेजी से लागू होगी। महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता सुनिश्चित होगी।
आशा कार्यकर्ताओं का योगदान और कोविड में भूमिका
आशा (एक्टिवेटेड सोशल हेल्थ एक्टिविस्ट) बहुएं स्वास्थ्य विभाग की कड़ी हैं। ये टीकाकरण, गर्भवती महिलाओं की निगरानी और बीमारी रोकथाम में सक्रिय हैं। यूपी में 2 लाख आशा कार्यकर्ताएं कार्यरत हैं। कोविड-19 महामारी में इनकी भूमिका सराहनीय रही। सीएम योगी ने इनके मानदेय में इंसेंटिव जोड़ने का वादा किया। प्रति सफल टीकाकरण पर अतिरिक्त भुगतान होगा। यह योजना राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन से जुड़ेगी।
योगी सरकार की महिलाओं के लिए अन्य योजनाएं
योगी आदित्यनाथ सरकार ने महिलाओं के उत्थान के लिए कई कदम उठाए हैं। मिशन शक्ति, लडकी हूं एक सपना हूं जैसी योजनाएं सफल हैं। आंगनबाड़ी-आशा मानदेय वृद्धि इन्हीं का हिस्सा है। पिंक बस, महिला हेल्पलाइन 181 जैसी सुविधाएं पहले से चल रही हैं। विधान परिषद में सीएम ने कहा कि भाजपा सरकार गरीब महिलाओं को मजबूत बनाएगी। विपक्षी दलों पर
निशाना साधते हुए योगी जी ने कांग्रेस-सपा शासन की नाकामियों को उजागर किया।
कार्यान्वयन प्रक्रिया, समयसीमा और लाभार्थी
मानदेय वृद्धि का कार्यान्वयन अप्रैल 2026 से शुरू होगा। कैबिनेट बैठक में मंजूरी मिल चुकी है।
जिला स्तर पर प्रशिक्षण शिविर आयोजित होंगे।
पोर्टल के माध्यम से आवेदन और लाभ वितरण होगा। ग्राम पंचायतें इसकी निगरानी करेंगी।
भुगतान डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) से होगा।
उत्तर प्रदेश में 3.5 लाख से अधिक आंगनबाड़ी-आशा कार्यकर्ताएं लाभान्वित होंगी।
वार्षिक बजट 5,000 करोड़ रुपये आवंटित। केंद्र से 30% अनुदान मिलेगा।
महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता और सतत विकास
यह घोषणा उत्तर प्रदेश में ग्रामीण महिलाओं के लिए मील का पत्थर साबित होगी।
विशेषज्ञों की राय में यह महिलाओं के लिए वरदान है और बजट प्रभाव सकारात्मक रहेगा।
सीएम योगी ने पेंशन, बीमा और आंगनबाड़ी भवनों के आधुनिकीकरण की भी घोषणा की।
यह योजना सतत विकास लक्ष्यों से जुड़कर यूपी को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी।
योगी सरकार की यह पहल महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मजबूत कदम है।