लखनऊ में रातभर झमाझम बारिश, कई इलाके जलमग्न; 28 जिलों में भारी बारिश का येलो अलर्ट

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में शनिवार देर रात से रविवार सुबह तक हुई तेज बारिश ने शहर की रफ्तार पर असर डाल दिया। लगातार बारिश के कारण राजधानी के कई हिस्सों में जलभराव की स्थिति पैदा हो गई। निचले इलाकों के साथ-साथ शहर के प्रमुख और पॉश माने जाने वाले क्षेत्रों में भी सड़कें पानी से भर गईं। कई स्थानों पर हालात ऐसे नजर आए कि लोगों को पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ा।

बारिश ने जहां लोगों को उमस और गर्मी से राहत दी, वहीं जलभराव ने नगर की जलनिकासी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। गोमती नगर और अलीगंज जैसे प्रमुख इलाकों में भी बारिश के बाद पानी जमा होने की तस्वीरें सामने आईं।

रातभर होती रही बारिश, सुबह बदला शहर का नजारा

राजधानी में शनिवार देर रात शुरू हुई बारिश का सिलसिला सुबह तक जारी रहा। लगातार बारिश के कारण कई सड़कों पर पानी भर गया और यातायात प्रभावित हुआ। सुबह लोगों ने घरों से बाहर निकलकर देखा तो शहर के कई हिस्सों में सामान्य स्थिति के बजाय जलभराव दिखाई दिया।

कई इलाकों में पानी सड़क से बढ़कर आसपास के हिस्सों तक पहुंच गया। कुछ स्थानों पर पानी काफी ऊंचाई तक जमा होने की स्थिति बनी। इससे पैदल चलने वालों और दोपहिया वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

गोमती नगर और अलीगंज में भी पानी

लखनऊ के जिन इलाकों को आमतौर पर बेहतर विकसित और प्रमुख आवासीय क्षेत्र माना जाता है, वहां भी बारिश का असर देखने को मिला। गोमती नगर और अलीगंज में कई स्थानों पर जलभराव की तस्वीरें सामने आईं।

बारिश के दौरान और उसके बाद सामने आए दृश्यों में सड़कें पानी से भरी नजर आईं। इससे यह सवाल भी उठता है कि तेज बारिश के दौरान शहर की ड्रेनेज व्यवस्था कितने दबाव को संभाल सकती है।

लखनऊ जैसे बड़े शहर में कुछ घंटों की तेज बारिश के बाद यदि प्रमुख सड़कों पर पानी जमा हो जाए तो इसका सीधा असर यातायात, कार्यालय जाने वाले लोगों और स्थानीय कारोबार पर पड़ता है।

कई जगह कमर तक पानी भरने की स्थिति

बारिश के बाद शहर के कई हिस्सों में जलभराव इतना अधिक रहा कि कुछ सड़कों पर कमर तक पानी दिखाई दिया। निचले इलाकों में स्थिति ज्यादा चुनौतीपूर्ण रही। जलभराव के कारण वाहन चालकों को सावधानी से निकलना पड़ा और कई जगहों पर लोगों को अपने वाहनों के साथ परेशानी का सामना करना पड़ा।

ऐसे हालात में सबसे बड़ी चिंता उन इलाकों को लेकर रहती है जहां पहले से जलनिकासी की समस्या रहती है। यदि बारिश का दौर आगे भी जारी रहता है तो इन क्षेत्रों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

बारिश से गर्मी और उमस से मिली राहत

भारी बारिश का एक सकारात्मक असर यह रहा कि राजधानी के लोगों को पिछले दिनों की गर्मी और उमस से राहत मिली। लगातार बादल और बारिश के कारण तापमान में नरमी महसूस हुई और मौसम सुहावना हो गया।

हालांकि राहत के साथ जलभराव की परेशानी भी सामने आई। शहर के लिए चुनौती अब यह है कि बारिश रुकने के बाद पानी कितनी तेजी से निकलता है। यदि जलनिकासी जल्दी होती है तो जनजीवन सामान्य होने में ज्यादा समय नहीं लगेगा, लेकिन पानी लंबे समय तक जमा रहने पर यातायात और स्थानीय गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं।

उत्तर प्रदेश के कई जिलों में बारिश

राजधानी के अलावा उत्तर प्रदेश के कई अन्य जिलों में भी बारिश दर्ज की गई। श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली और पीलीभीत समेत कई क्षेत्रों में हल्की से तेज बारिश हुई।

मानसून की सक्रियता बढ़ने के कारण प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का मिजाज बदला हुआ है। कुछ क्षेत्रों में तेज बारिश हो रही है, जबकि अन्य स्थानों पर गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना बनी हुई है।

16 से 17 अगस्त तक 28 जिलों में येलो अलर्ट

मौसम विभाग ने 16 और 17 अगस्त के दौरान उत्तर प्रदेश के 28 जिलों में भारी बारिश को लेकर येलो अलर्ट जारी किया है। इनमें बांदा, चित्रकूट, कौशांबी,

प्रयागराज, फतेहपुर, प्रतापगढ़, सोनभद्र, देवरिया, गोरखपुर, बस्ती, सिद्धार्थनगर,

गोंडा, बलरामपुर, हरदोई, उन्नाव, लखनऊ, बाराबंकी, रायबरेली, अमेठी, सुल्तानपुर, अयोध्या,

अंबेडकरनगर, सहारनपुर, बिजनौर, शाहजहांपुर, संभल और बदायूं शामिल हैं।

येलो अलर्ट का मतलब है कि मौसम को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है।

खासकर बारिश के दौरान निचले इलाकों, जलभराव वाले रास्तों और

कमजोर संरचनाओं के आसपास सावधानी बरतना जरूरी होगा।

तराई क्षेत्र में भी बढ़ेगा बारिश का असर

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार 17 से 18 अगस्त के दौरान उत्तर प्रदेश के

तराई क्षेत्र में भारी बारिश हो सकती है। प्रदेश के दूसरे

हिस्सों में भी गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना जताई गई है।

लगातार बारिश होने की स्थिति में पहले से जलभराव वाले इलाकों में मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

प्रशासन और स्थानीय निकायों के सामने जलनिकासी व्यवस्था को सक्रिय रखने की चुनौती होगी।

लोगों को सतर्क रहने की जरूरत

बारिश के दौरान लोगों को अनावश्यक रूप से जलभराव वाले रास्तों पर जाने से बचना चाहिए।

दोपहिया वाहन चालकों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है,

क्योंकि पानी की गहराई का अनुमान लगाना मुश्किल हो सकता है।

बिजली के खंभों, खुले तारों और जलभराव वाले विद्युत क्षेत्रों से दूरी बनाए रखना भी जरूरी है।

यदि किसी इलाके में पानी तेजी से बढ़ रहा हो तो सुरक्षित स्थान पर जाना बेहतर विकल्प है।

जलनिकासी व्यवस्था पर फिर उठे सवाल

लखनऊ में तेज बारिश के बाद जलभराव की समस्या कोई नई बात नहीं है।

हर साल मानसून के दौरान शहर के कई इलाकों में ऐसी स्थिति देखने को मिलती है।

इस बार भी प्रमुख क्षेत्रों में पानी भरने से शहर की ड्रेनेज क्षमता पर सवाल खड़े हुए हैं।

तेज बारिश के दौरान जलनिकासी व्यवस्था पर अचानक दबाव बढ़ जाता है। ऐसे में नालों की सफाई,

पंपिंग व्यवस्था और पानी की निकासी के लिए पहले से तैयार तंत्र की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।

आगे कैसा रहेगा मौसम?

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक अगले कुछ दिनों में उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में

बारिश का दौर जारी रह सकता है। 17 से 18 अगस्त के बीच तराई क्षेत्रों में भारी बारिश की संभावना है,

जबकि अन्य इलाकों में भी गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है।

ऐसे में लखनऊ समेत अलर्ट वाले जिलों में रहने वाले लोगों को मौसम संबंधी अपडेट पर नजर रखनी चाहिए।

बारिश के दौरान यात्रा की योजना बनाते समय जलभराव वाले रास्तों से बचना और

स्थानीय प्रशासन की सलाह का पालन करना उपयोगी रहेगा।

निष्कर्ष

लखनऊ में रातभर हुई भारी बारिश ने एक तरफ लोगों को गर्मी और उमस से राहत दी, तो

दूसरी तरफ शहर के कई हिस्सों में जलभराव की समस्या खड़ी कर दी। गोमती नगर और

अलीगंज जैसे प्रमुख क्षेत्रों में भी पानी भरने से साफ है कि

तेज बारिश के सामने शहर की जलनिकासी व्यवस्था पर दबाव बढ़ जाता है।

वहीं, प्रदेश के 28 जिलों में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी होने से आने वाले घंटों में

मौसम पर नजर रखना जरूरी हो गया है। तराई क्षेत्र में भी बारिश बढ़ने की संभावना है।

ऐसे में प्रशासन के साथ-साथ आम लोगों को भी सावधानी बरतने की जरूरत है।

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