संस्था की सूची में रोजगार पाने वालों के नाम, जांच में कई दावों पर उठे सवाल; मुख्य विकास अधिकारी ने शुरू कराई पड़ताल
गाजियाबाद, 2 अक्टूबर 2026। युवाओं को रोजगार से जोड़ने वाली एक संस्था की ओर से प्रशासन को दी गई सूची अब सवालों के घेरे में आ गई है। संस्था ने जुलाई और अगस्त के दौरान 60 युवाओं को नौकरी दिलाने और उनके रोजगार से जुड़ने का दावा किया था। लेकिन सूची में शामिल कुछ युवाओं से संपर्क करने पर अलग तस्वीर सामने आई। कई युवाओं ने नौकरी मिलने से इनकार किया, जबकि कुछ ने बताया कि नौकरी की जानकारी तो दी गई थी, लेकिन बाद में उनसे कोई संपर्क नहीं हुआ। मामले की जानकारी सामने आने के बाद मुख्य विकास अधिकारी ने जांच शुरू करा दी है।
प्रशासन को दी गई थी 60 युवाओं की सूची
जानकारी के अनुसार, हेड हेल्ड हाई फाउंडेशन की ओर से 10 सितंबर को मुख्य विकास अधिकारी को एक सूची उपलब्ध कराई गई थी। इसमें जुलाई और अगस्त के दौरान 60 युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने का दावा किया गया था।
सूची में शामिल युवाओं की वास्तविक स्थिति जानने के लिए जब उनसे संपर्क किया गया तो कई मामलों में संस्था के दावे और युवाओं द्वारा बताई गई जानकारी में अंतर सामने आया। कुछ युवाओं ने कहा कि उन्हें नौकरी मिली ही नहीं, जबकि कुछ ने नौकरी का प्रस्ताव मिलने के बाद उसे स्वीकार नहीं किया था।
कुछ युवाओं ने नौकरी से किया इनकार
जांच के दौरान सामने आए मामलों में तिगरी के पास निवासी प्रीति का नाम भी सूची में शामिल बताया गया। सूची के अनुसार उन्हें नोएडा सेक्टर-63 की एक कंपनी में नौकरी मिलने का दावा था। हालांकि, उनके पिता ने बताया कि बेटी घर पर है और उसकी नौकरी नहीं लगी है।
इसी तरह शहीद स्थल निवासी नेहा को एक फूड चेन में नौकरी मिलने की जानकारी दी गई थी, लेकिन उनके अनुसार इसके बाद उन्हें कोई कॉल नहीं आया।
कैलाभट्ठा निवासी इकरा ने बताया कि उन्होंने संस्था के माध्यम से 300 रुपये देकर कंप्यूटर कोर्स किया था। कोर्स पूरा होने के बाद नौकरी के लिए उनसे संपर्क नहीं किया गया, जबकि उनका नाम रोजगार पाने वालों की सूची में दर्ज था।
नौकरी का प्रस्ताव मिला, लेकिन युवाओं ने नहीं किया ज्वाइन
कुछ युवाओं ने बताया कि उन्हें नौकरी की पेशकश की गई थी, लेकिन उन्होंने व्यक्तिगत कारणों से नौकरी स्वीकार नहीं की। इसके बावजूद उनका नाम नौकरी करने वालों की सूची में शामिल होने की बात सामने आई है।
विजयनगर के शांतिनगर निवासी मनीष ने बताया कि वह बीबीए की पढ़ाई कर रहे हैं। संस्था के माध्यम से उन्हें नोएडा की एक कंपनी में करीब 13 हजार रुपये की नौकरी की जानकारी दी गई थी, लेकिन घर से दूर होने के कारण उन्होंने नौकरी स्वीकार नहीं की।
इसी तरह बीबीए छात्र अंशु को भी नोएडा की एक कंपनी में नौकरी मिलने की जानकारी दी गई थी। उनके अनुसार उन्होंने भी नौकरी शुरू नहीं की।
एक युवक पहले से दूसरी जगह नौकरी कर रहा था
मेरठ निवासी अरुण के मामले में भी सूची को लेकर सवाल उठा। बताया गया कि संस्था की सूची में उन्हें मेरठ में नौकरी करते दिखाया गया था, जबकि वह पहले से गाजियाबाद की एक फाइनेंस कंपनी में कार्यरत हैं।
अरुण के अनुसार संस्था की ओर से उन्हें मॉल, फूड कोर्ट और डिलीवरी संबंधी नौकरियों की जानकारी दी गई थी, लेकिन उन्होंने इनमें से कोई नौकरी स्वीकार नहीं की।
पढ़ाई कर रहे छात्र को भी नौकरी करने वाला बताया
प्रताप विहार निवासी जतिन एमएमएच कॉलेज में बीए की पढ़ाई कर रहे हैं।
उनके अनुसार उन्हें एक फूड चेन के आउटलेट में नौकरी
दिलाने की बात कही गई थी, लेकिन पढ़ाई के कारण उन्होंने नौकरी नहीं की।
इसके बावजूद उनका नाम रोजगार प्राप्त करने वालों की सूची में शामिल होने की जानकारी सामने आई है।
विजयनगर के भीमनगर निवासी देव बीएससी के छात्र हैं। संस्था के रिकॉर्ड में उन्हें एक कंपनी के फूड
कोर्ट में कार्यरत बताया गया। देव के अनुसार उन्हें कंप्यूटर कोर्स करना था, जो अक्टूबर में शुरू होना था।
ऐसे में उस समय तक नौकरी शुरू होने का सवाल ही नहीं था।
कुछ युवाओं ने रोजगार मिलने की पुष्टि की
हालांकि, सूची में शामिल सभी युवाओं ने संस्था के दावे से इनकार नहीं किया।
कुछ युवाओं ने रोजगार मिलने की पुष्टि भी की है।
एक युवक ने बताया कि उसे गाजियाबाद की एक होम अप्लायंस कंपनी में
नौकरी मिली है। वहीं एक युवती ने बताया कि संस्था की मदद से पहले एक कंपनी में नौकरी लगी थी,
लेकिन वहां वरिष्ठ कर्मचारी के व्यवहार से परेशान होकर
उसने नौकरी छोड़ दी। इसके बाद संस्था की मदद से उसे फूड कोर्ट में दूसरी नौकरी मिली।
संस्था ने दी अपनी सफाई
मामले पर संस्था की प्रोजेक्ट टीम की ओर से बताया गया कि रोजगार से जुड़ने की प्रक्रिया
कई कॉलेजों, प्लेसमेंट कार्यालयों और अन्य माध्यमों के साथ विकेंद्रीकृत मॉडल पर संचालित होती है।
टीम के अनुसार कुछ उम्मीदवार अभी कॉलेज में पढ़ रहे हैं और उन्हें
ऑफर लेटर दिए गए हैं। कुछ उम्मीदवार परिवार की अनुमति मिलने के बाद नौकरी ज्वाइन करेंगे।
संस्था ने यह भी बताया कि करीब 20 उम्मीदवारों को अभी पद ग्रहण करना है।
संस्था की ओर से युवाओं को प्रशिक्षण, इंटरव्यू की तैयारी और प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने की बात भी कही गई है।
विकास भवन में चल रहा है संस्था का कार्यालय
बताया गया कि संस्था का कार्यालय विकास भवन परिसर में संचालित हो रहा है। संस्था
लंबे समय से युवाओं को रोजगार से जोड़ने की गतिविधियों का दावा करती रही है। पूर्व में अधिकारियों की ओर से भी
संस्था के कार्य की सराहना किए जाने की जानकारी सामने आई है।
अब 60 युवाओं को रोजगार दिलाने संबंधी सूची में सामने आए
अंतर के बाद प्रशासन की जांच महत्वपूर्ण हो गई है।
मुख्य विकास अधिकारी ने शुरू कराई जांच
मामले को लेकर मुख्य विकास अधिकारी कुमार सौरभ ने जांच के निर्देश दिए हैं।
उन्होंने कहा कि सूची में शामिल सभी युवाओं से संपर्क कर वास्तविक स्थिति की जानकारी ली जाएगी।
यदि जांच में संस्था द्वारा दी गई सूची और वास्तविक रोजगार की
स्थिति में अंतर पाया जाता है तो संस्था से जवाब मांगा जाएगा।
निष्कर्ष
गाजियाबाद में 60 युवाओं को रोजगार दिलाने के दावे वाली सूची को लेकर
कई सवाल सामने आए हैं। सूची में शामिल कुछ युवाओं ने नौकरी मिलने से
इनकार किया, जबकि कुछ ने नौकरी का प्रस्ताव मिलने लेकिन
उसे स्वीकार नहीं करने की बात कही। वहीं कुछ युवाओं ने संस्था की मदद से रोजगार मिलने की
पुष्टि भी की है। ऐसे में अब प्रशासन की जांच से यह स्पष्ट होगा कि
सूची में दर्ज रोजगार संबंधी जानकारी कितनी सही है और किन मामलों में वास्तविक नियुक्ति हुई थी।
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