बांग्लादेश में हाल ही में हुए 13वें संसदीय चुनाव के बाद तारिक रहमान के नेतृत्व वाली नई बीएनपी सरकार ने अल्पसंख्यक समुदायों को प्रतिनिधित्व देकर एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। प्रधानमंत्री तारिक रहमान की 50 सदस्यीय कैबिनेट में दो अल्पसंख्यक नेता शामिल किए गए हैं – निताई रॉय चौधरी और दीपेन दीवान। निताई रॉय चौधरी, जो हिंदू समुदाय से आते हैं, मगुरा-2 निर्वाचन क्षेत्र से सांसद चुने गए। 1949 में जन्मे इस वकील और पूर्व मंत्री ने 1,47,896 वोट हासिल कर जमात उम्मीदवार मुस्तर्शीद बिल्लाह को करारी शिकस्त दी। बीएनपी के प्रमुख रणनीतिकार के रूप में जाना जाता है, वे 1990 के दशक में खालिदा जिया सरकार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। उनकी नियुक्ति बांग्लादेश में घटती हिंदू आबादी (करीब 8%) के लिए राहत की सांस है, जहां पिछले वर्षों में हिंसा की घटनाएं चिंता का विषय रहीं।
दूसरी ओर, दीपेन दीवान चकमा आदिवासी समुदाय से हैं, जो बौद्ध बहुल हैं।
रंगमती जिले से जीत दर्ज करने वाले दीवान ने निर्दलीय प्रतिद्वंद्वी को पीछे छोड़ा। बांग्लादेश के राजनीतिक इतिहास में कम ही बौद्ध नेता मंत्री बने हैं, इसलिए उनकी एंट्री आदिवासी क्षेत्रों की असुरक्षा को दूर करने का संकेत देती है। तारिक रहमान ने 17 फरवरी 2026 को ढाका के नेशनल पार्लियामेंट में 25 मंत्रियों को शपथ दिलाई, जिसमें मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर, अमीर खोशरू जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। यह कैबिनेट गठन बीएनपी की दो-तिहाई बहुमत वाली जीत के बाद हुआ, जब राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने शपथ समारोह संपन्न कराया।
अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व की यह पहल बांग्लादेश की राजनीति में बदलाव का संकेत है।
संसद में कुल 4 अल्पसंख्यक सांसद चुने गए, जिनमें मुख्यतः दो हिंदू – निताई रॉय चौधरी और गोयेश्वर चंद्र रॉय (जिनकी बजाय निताई को चुना गया)। दीपेन दीवान की नियुक्ति चटगांव हिल ट्रैक्ट्स जैसे संवेदनशील क्षेत्रों के लिए सकारात्मक है। विशेषज्ञों का मानना है कि ये मंत्री हिंदू-विरोधी हिंसा रोकने और अल्पसंख्यक अधिकारों की रक्षा में भूमिका निभाएंगे। तारिक रहमान ने इस तरह अल्पसंख्यकों को साथ लेकर चलने का संदेश दिया है, जो क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है। भारत जैसे पड़ोसी देश भी इस पर नजर रखे हुए हैं। बांग्लादेश न्यूज, बीबीसी हिंदी और आजतक जैसी मीडिया में इसकी व्यापक कवरेज हुई है।
निताई रॉय चौधरी प्रोफाइल: मगुरा से जीत, पूर्व मंत्री, बीएनपी स्ट्रैटेजिस्ट। दीपेन दीवान प्रोफाइल: चकमा नेता, रंगमती सांसद, बौद्ध प्रतिनिधि। यह कैबिनेट 2026 के चुनाव परिणामों का प्रतिबिंब है, जहां बीएनपी ने मुस्लिम बहुमत के बावजूद समावेशी छवि बनाई। अल्पसंख्यक मुद्दे बांग्लादेश राजनीति के केंद्र में हैं, और ये मंत्री उनकी सफलता की कसौटी साबित होंगे।