देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2026 इस बार एक ऐसे अभ्यर्थी की वजह से राष्ट्रीय चर्चा का विषय बनी हुई है, जिसकी उम्र 71 वर्ष है। उत्तर प्रदेश के रहने वाले अशोक बहार ने डॉक्टर बनने का अपना दशकों पुराना सपना पूरा करने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ का दरवाजा खटखटाया है।
अशोक बहार का कहना है कि उन्होंने वर्षों पहले अपनी मां से डॉक्टर बनने का वादा किया था। परिस्थितियों के कारण वह सपना अधूरा रह गया, लेकिन अब उन्होंने NEET UG परीक्षा देकर उसे पूरा करने का प्रयास किया है। उनका कहना है कि सीखने और शिक्षा प्राप्त करने की कोई उम्र नहीं होती।
आखिर क्या है पूरा मामला?
अशोक बहार ने NEET UG 2026 परीक्षा में भाग लिया। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर वरिष्ठ नागरिकों के लिए MBBS प्रवेश में 1% आरक्षण (या विशेष कोटा) की मांग की है। उनका तर्क है कि जब विभिन्न वर्गों के लिए विशेष प्रावधान हैं, तो योग्य वरिष्ठ नागरिकों के लिए भी अवसर होना चाहिए।
याचिका में उन्होंने कहा है कि यदि कोई वरिष्ठ नागरिक NEET जैसी कठिन परीक्षा उत्तीर्ण करता है और मेडिकल शिक्षा प्राप्त करना चाहता है, तो केवल उम्र के आधार पर उसके अवसर सीमित नहीं होने चाहिए।
शिक्षा के अधिकार का दिया हवाला
अपनी याचिका में अशोक बहार ने शिक्षा के अधिकार और समान अवसर के सिद्धांत का हवाला दिया है। उनका कहना है कि किसी व्यक्ति की सीखने की क्षमता का निर्धारण केवल उसकी आयु से नहीं किया जा सकता।
उन्होंने अदालत से अनुरोध किया है कि वरिष्ठ नागरिकों के लिए मेडिकल शिक्षा में अलग व्यवस्था या नीति बनाने पर विचार किया जाए।
मां का सपना पूरा करने निकले अशोक बहार
अशोक बहार की कहानी इसलिए भी भावुक मानी जा रही है क्योंकि उन्होंने बताया कि डॉक्टर बनना उनकी दिवंगत मां की अंतिम इच्छाओं में से एक था।
उन्होंने पहले भी कहा था कि उनके परिवार में कई डॉक्टर हैं, लेकिन वे स्वयं औपचारिक MBBS डिग्री प्राप्त नहीं कर सके। अब वे उसी अधूरे सपने को पूरा करने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
अशोक बहार की याचिका सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर व्यापक बहस शुरू हो गई है।
एक वर्ग का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति योग्यता के आधार पर परीक्षा पास करता है तो उम्र उसके सपनों की बाधा नहीं बननी चाहिए। वहीं दूसरे पक्ष का तर्क है कि MBBS की पढ़ाई लंबी और कठिन होती है तथा देश में मेडिकल सीटें सीमित हैं, इसलिए नीति बनाते समय व्यावहारिक पहलुओं को भी ध्यान में रखना होगा।
मेडिकल शिक्षा में आयु सीमा पर फिर शुरू हुई चर्चा
हाल के वर्षों में NEET UG से संबंधित नियमों में कई बदलाव हुए हैं। अधिकतम आयु सीमा को लेकर भी पहले कानूनी विवाद सामने आ चुके हैं।
अब अशोक बहार की याचिका ने एक बार फिर यह प्रश्न खड़ा कर दिया है कि क्या मेडिकल शिक्षा में वरिष्ठ नागरिकों के लिए अलग नीति बनाई जानी चाहिए या वर्तमान व्यवस्था ही जारी रहनी चाहिए। इस विषय पर अंतिम निर्णय अदालत और नीति-निर्माताओं के स्तर पर ही होगा।
अदालत के फैसले पर टिकी हैं निगाहें
रिपोर्टों के अनुसार, इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में इस याचिका पर सुनवाई निर्धारित है। अदालत का निर्णय केवल अशोक बहार के मामले तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य में मेडिकल प्रवेश नीति से जुड़ी बहस को भी प्रभावित कर सकता है।
यदि अदालत सरकार से इस विषय पर विचार करने को कहती है या कोई महत्वपूर्ण टिप्पणी करती है, तो इसका असर भविष्य की प्रवेश नीतियों पर भी पड़ सकता है।
NEET अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण सलाह
विशेषज्ञों का कहना है कि NEET UG से जुड़े सभी अभ्यर्थियों को केवल
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC), राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) और संबंधित काउंसलिंग
प्राधिकरण द्वारा जारी आधिकारिक दिशा-निर्देशों पर ही भरोसा करना चाहिए।
जब तक अदालत या सरकार की ओर से कोई नया आदेश जारी नहीं होता,
तब तक वर्तमान प्रवेश नियम ही लागू रहेंगे।
निष्कर्ष
71 वर्षीय अशोक बहार की कहानी यह संदेश देती है कि सीखने की इच्छा उम्र की मोहताज नहीं होती।
हालांकि उनका मामला केवल व्यक्तिगत सपना नहीं, बल्कि मेडिकल शिक्षा में समान अवसर,
सीमित सीटों और नीति निर्माण जैसे महत्वपूर्ण प्रश्नों से भी जुड़ गया है।
अब सभी की नजर इलाहाबाद हाईकोर्ट की सुनवाई पर है। अदालत का निर्णय यह तय करेगा कि
अशोक बहार की मांग पर आगे क्या दिशा तय होती है और क्या भविष्य में वरिष्ठ नागरिकों के लिए
मेडिकल प्रवेश नीति में किसी बदलाव की संभावना बनती है।
FAQ
प्रश्न 1: अशोक बहार कौन हैं?
उत्तर: अशोक बहार उत्तर प्रदेश के 71 वर्षीय NEET UG 2026 अभ्यर्थी हैं,
जिन्होंने डॉक्टर बनने के अपने पुराने सपने को पूरा करने के लिए परीक्षा दी है।
प्रश्न 2: उन्होंने हाईकोर्ट में क्या मांग की है?
उत्तर: उन्होंने MBBS प्रवेश में योग्य वरिष्ठ नागरिकों के लिए 1% आरक्षण या विशेष कोटा देने की मांग की है।
प्रश्न 3: उनकी याचिका का आधार क्या है?
उत्तर: उनका कहना है कि शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार उम्र से सीमित नहीं होना चाहिए और
योग्य वरिष्ठ नागरिकों को भी अवसर मिलना चाहिए।
प्रश्न 4: क्या इस मामले में अंतिम फैसला आ गया है?
उत्तर: नहीं। मामला अदालत में विचाराधीन है और अंतिम निर्णय हाईकोर्ट की सुनवाई के बाद ही होगा।
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