गोला थाना क्षेत्र में दलित उत्पीड़न का मामला आया सामने
गोरखपुर जिले के गोला थाना क्षेत्र के ग्राम चाडी से दलित युवक के साथ कथित मारपीट और जातिसूचक टिप्पणी का मामला सामने आया है। पीड़ित की शिकायत पर गोला पुलिस ने दो नामजद आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है।
पुलिस के अनुसार मामले की विवेचना शुरू कर दी गई है और उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयान तथा अन्य तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच की जाएगी।
नोट: यह समाचार पुलिस में दर्ज एफआईआर और शिकायत में लगाए गए आरोपों पर आधारित है। आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।
दवा लेने जाते समय रास्ते में रोकी गई बुलेट बाइक
एफआईआर के अनुसार नितेश कुमार पुत्र अमरजीत, निवासी ग्राम चाडी, ने पुलिस को दी गई तहरीर में बताया कि वह अपने एक मित्र के साथ बुलेट मोटरसाइकिल से केशवापार दवा लेने जा रहे थे।
शिकायत में कहा गया है कि गांव में अरुण राय पुत्र जयप्रकाश राय के घर के पास पहुंचते ही उनकी मोटरसाइकिल रोक ली गई। आरोप है कि उनसे पूछा गया कि वे कहां जा रहे हैं। दवा लेने जाने की बात बताने के बाद दोनों पक्षों के बीच विवाद शुरू हो गया।
जातिसूचक टिप्पणी और मारपीट का आरोप
पीड़ित द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, विवाद के दौरान आरोपियों ने कथित रूप से जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए अपमानित किया।
एफआईआर में यह भी आरोप लगाया गया है कि अरुण राय और विश्वजीत राय पुत्र चंद्रकेश राय ने गाली-गलौज करते हुए कथित रूप से नितेश कुमार के बाल पकड़कर उन्हें जमीन पर गिरा दिया और लात-घूंसों से मारपीट की।
शिकायत के अनुसार मारपीट के दौरान उनकी नाक से खून निकलने लगा और उन्हें शारीरिक चोटें आईं।
गांव में बुलेट न चलाने और जान से मारने की कथित धमकी
पीड़ित ने अपनी तहरीर में यह भी आरोप लगाया है कि मारपीट के दौरान आरोपियों ने भविष्य में गांव में बुलेट मोटरसाइकिल न चलाने की चेतावनी दी।
इसके अलावा शिकायत में जान से मारने तथा दोबारा गांव में दिखाई देने पर गंभीर परिणाम भुगतने की कथित धमकी देने का भी उल्लेख किया गया है।
इन आरोपों की पुष्टि अभी पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।
SC/ST एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा
गोला पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए दोनों नामजद आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 115(2), 351, 352 और 126(2) के साथ-साथ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(1)(द) एवं 3(1)(घ) के तहत मुकदमा दर्ज किया है।
मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की विवेचना प्रारंभ कर दी है।
पुलिस ने शुरू की विवेचना
पुलिस अधिकारियों के अनुसार घटनास्थल का निरीक्षण किया जाएगा और सभी संबंधित पक्षों के बयान दर्ज किए जाएंगे।
साथ ही उपलब्ध साक्ष्यों, चिकित्सकीय रिपोर्ट तथा अन्य प्रमाणों के आधार पर मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके अनुसार आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
संविधान सभी नागरिकों को देता है समान अधिकार
भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को समानता का अधिकार प्रदान करता है। जाति, धर्म, भाषा या किसी अन्य आधार पर भेदभाव करना कानून के विरुद्ध है।
अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम का उद्देश्य अनुसूचित जाति एवं
अनुसूचित जनजाति समुदाय के लोगों को अत्याचार, भेदभाव और उत्पीड़न से कानूनी संरक्षण प्रदान करना तथा
दोषी पाए जाने पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
जांच पूरी होने के बाद होगी आगे की कार्रवाई
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल मामले की जांच जारी है और
अभी किसी अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा गया है।
जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों, गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर ही
आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसलिए मामले से जुड़े सभी
आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही मानी जाएगी।
निष्कर्ष
गोरखपुर के गोला थाना क्षेत्र के ग्राम चाडी में दलित युवक के साथ कथित मारपीट और
जातिसूचक टिप्पणी का मामला सामने आने के बाद पुलिस ने दो नामजद
आरोपियों के खिलाफ SC/ST एक्ट और BNS की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है।
फिलहाल पूरा मामला पुलिस जांच के अधीन है। जांच पूरी होने और न्यायिक प्रक्रिया
आगे बढ़ने के बाद ही घटना की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच और
कानून के अनुसार कार्रवाई ही न्याय सुनिश्चित करने का आधार होती है।
FAQ
प्रश्न 1: यह मामला कहां का है?
उत्तर: गोरखपुर जिले के गोला थाना क्षेत्र के ग्राम चाडी का।
प्रश्न 2: पीड़ित ने क्या आरोप लगाए हैं?
उत्तर: पीड़ित ने कथित मारपीट, जातिसूचक टिप्पणी और जान से मारने की धमकी देने के आरोप लगाए हैं।
प्रश्न 3: पुलिस ने किन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है?
उत्तर: पुलिस ने BNS की विभिन्न धाराओं तथा SC/ST (अत्याचार निवारण)
अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है।
प्रश्न 4: क्या आरोप सिद्ध हो चुके हैं?
उत्तर: नहीं। फिलहाल यह मामला एफआईआर में दर्ज आरोपों पर आधारित है।
आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
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